आरएसएस पर अधीर रंजन चौधरी का हमला: 'भागवत को देश से माफी माँगनी चाहिए'
सारांश
मुख्य बातें
कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी ने 15 अगस्त को कोलकाता में पत्रकारों से बातचीत के दौरान राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) प्रमुख मोहन भागवत पर तीखा हमला बोला और कहा कि उन्हें देश से सार्वजनिक माफी माँगनी चाहिए। चौधरी ने आरोप लगाया कि आरएसएस के नागपुर स्थित मुख्यालय में पिछले 52 वर्षों तक तिरंगा नहीं फहराया गया।
मुख्य आरोप और बयान
चौधरी ने स्पष्ट शब्दों में कहा, 'हमें ऐसे लोगों से लोकतंत्र और आजादी के बारे में सीखने की कोई जरूरत नहीं है।' उन्होंने राष्ट्रगीत और राष्ट्रगान का उल्लेख करते हुए कहा कि इन दोनों को स्वतंत्रता के पहले दिन से ही देश में मान्यता प्राप्त थी, और इस पर कोई विवाद खड़ा करना तथ्यों से परे है।
वंदे मातरम पर कांग्रेस नेता का पक्ष
चौधरी ने वंदे मातरम के ऐतिहासिक महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि यह गीत उस युग से भारतीय चेतना का हिस्सा है, जब — उनके अनुसार — भारतीय जनता पार्टी (BJP) से जुड़े लोग आजादी के आंदोलन से दूरी बनाए हुए थे। उन्होंने कहा, 'जब देश का विभाजन हुआ, उस समय हमारे देश के लोग वंदे मातरम का नारा लगाकर शपथ लेते थे — यह कोई नई बात नहीं है, यह हमेशा से प्रचलन में रहा है।' उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोगों ने इस परंपरा में 'फेरबदल' करने की कोशिश की।
महाराष्ट्र मंत्री की प्रतिक्रिया
महाराष्ट्र सरकार में गृह राज्य मंत्री योगेश कदम ने भागवत के बयान का बचाव करते हुए कहा कि उनके वक्तव्यों को नकारात्मक दृष्टि से नहीं, बल्कि सकारात्मक संदर्भ में देखा जाना चाहिए। कदम ने कहा, 'हमें उनके बयान के पीछे के मूल उद्देश्यों और पृष्ठभूमि को समझना होगा, तभी हम किसी उचित निष्कर्ष पर पहुँच सकते हैं।' उन्होंने यह भी जोड़ा कि जो लोग आरएसएस का विरोध करते हैं, वे स्वाभाविक रूप से उसके बारे में नकारात्मक ही बोलेंगे।
राजनीतिक पृष्ठभूमि
यह विवाद ऐसे समय में उभरा है जब स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर राष्ट्रीय प्रतीकों — राष्ट्रगीत, राष्ट्रगान और तिरंगे — को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। गौरतलब है कि आरएसएस और उससे जुड़े संगठनों पर राष्ट्रीय प्रतीकों के प्रति रवैये को लेकर विपक्षी दल समय-समय पर सवाल उठाते रहे हैं। चौधरी का यह बयान उसी श्रृंखला की एक कड़ी है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर संसदीय और सार्वजनिक बहस और तेज होने की संभावना है।