तन्वी शर्मा ने 17 साल में जीता ताइपे ओपन, साइना के बाद दूसरी भारतीय; 17 साल का सूखा खत्म
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय बैडमिंटन खिलाड़ी तन्वी शर्मा ने महज 17 वर्ष की आयु में ताइपे ओपन 2026 का महिला सिंगल्स खिताब जीतकर इतिहास रच दिया। 12 अगस्त को जिराकपुर में मीडिया से बात करते हुए तन्वी ने स्वीकार किया कि उन्हें खुद खिताब जीतने की उम्मीद नहीं थी — उनका एकमात्र लक्ष्य अपना 100 प्रतिशत देना था। वह साइना नेहवाल के बाद ताइपे ओपन जीतने वाली केवल दूसरी भारतीय खिलाड़ी बनीं और इस खिताब पर भारत का 17 साल का इंतज़ार खत्म किया।
फाइनल में शानदार प्रदर्शन
तन्वी ने महिला सिंगल्स के फाइनल में वियतनाम की खिलाड़ी गुयेन थुई को सीधे गेमों में 21-16, 21-16 से पराजित किया। यह जीत न केवल उनके करियर की सबसे बड़ी उपलब्धि है, बल्कि इससे वह ताइपे ओपन खिताब जीतने वाली सबसे युवा खिलाड़ी भी बन गई हैं।
खिलाड़ी की पहली प्रतिक्रिया
जीत के बाद तन्वी ने कहा, 'ऐसा कुछ था नहीं था। मैं अपने आप में प्रोसेस नहीं कर पा रही थी। मुझे यह उम्मीद करके नहीं गई थी कि मैं खिताब को जीतने में सफल रहूंगी। मैंने बस अपना 100 प्रतिशत देने का प्रयास किया और पूरे जोश के साथ खेला। खिताब को जीतने के बाद मैं काफी खुश थी। हालांकि, जीत के तुरंत बाद मेरा अगला लक्ष्य सुपर 500 और 750 के लिए तैयार होना था।'
आगे की तैयारी और महत्वाकांक्षाएँ
तन्वी ने इस जीत को एक शुरुआत बताया। उनके अनुसार, 'सुपर 300 जीतना काफी अहम था। यह एक अच्छा लेवल है। हालांकि, 750, 500 और 1000 जैसे और भी इवेंट्स हैं। इसी वजह से मुझे इन सभी को जीतने के लिए भी तैयारी करनी है।' उन्होंने यह भी कहा कि वह अपने खेल में कई पहलुओं पर सुधार करना चाहती हैं और इसके लिए कड़ी मेहनत जारी रखेंगी।
बहन राधिका का अहम योगदान
तन्वी ने अपनी सफलता में बड़ी बहन राधिका के योगदान को विशेष रूप से रेखांकित किया। उनके अनुसार, राधिका ने शुरुआत से ही उनका मार्गदर्शन किया और ट्रेनिंग में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। गौरतलब है कि परिवार का यह सहयोग तन्वी की इस असाधारण यात्रा की नींव रहा है।
ऐतिहासिक संदर्भ
यह ऐसे समय में आया है जब भारतीय बैडमिंटन जूनियर खिलाड़ियों की एक नई पीढ़ी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर दस्तक दे रही है। साइना नेहवाल के बाद किसी भारतीय महिला खिलाड़ी द्वारा ताइपे ओपन जीतना इस बात का प्रमाण है कि भारतीय बैडमिंटन की गहराई बढ़ रही है। तन्वी की यह जीत आने वाले सीज़न में उन्हें उच्च-स्तरीय टूर्नामेंटों में भारत की प्रमुख दावेदार के रूप में स्थापित करती है।