तन्वी शर्मा ने ताइपे ओपन जीता: 17 साल की उम्र में BWF सुपर 300 खिताब, साइना के बाद दूसरी भारतीय
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय बैडमिंटन की उभरती सितारा तन्वी शर्मा ने 2 अगस्त 2026 को ताइपे ओपन का महिला सिंगल्स खिताब जीतकर इतिहास के पन्नों में अपना नाम दर्ज करा लिया। मात्र 17 साल और 222 दिन की उम्र में उन्होंने यह उपलब्धि हासिल की, जिससे वह इस टूर्नामेंट के किसी भी वर्ग में खिताब जीतने वाली सबसे कम उम्र की खिलाड़ी बन गईं। यह उनका पहला BWF वर्ल्ड टूर सुपर 300 खिताब भी है।
फाइनल का रोमांचक मुकाबला
रविवार को खेले गए फाइनल में तन्वी ने वियतनाम की छठी वरीयता प्राप्त खिलाड़ी गुयेन थुई लिन्ह को सीधे गेमों में 21-16, 21-16 से पराजित किया। पूरा मुकाबला महज 36 मिनट में समाप्त हो गया। पहले गेम में तन्वी ने तेज़ शुरुआत करते हुए 10-2 की बड़ी बढ़त बनाई। गुयेन ने वापसी का प्रयास करते हुए स्कोर 10-8 तक पहुँचाया, लेकिन तन्वी ने अपनी एकाग्रता बनाए रखी और पहला गेम आसानी से अपने नाम किया।
दूसरे गेम में तन्वी 0-3 से पीछे थीं, लेकिन उन्होंने तुरंत वापसी की और सात अंकों की बढ़त बना ली। आक्रामक क्रॉस-कोर्ट शॉट्स और सटीक प्लेसमेंट के दम पर उन्होंने प्रतिद्वंद्वी को कभी लय पकड़ने का मौका नहीं दिया। अंतिम पॉइंट उन्होंने एक शानदार क्रॉस-कोर्ट ड्रॉप शॉट से हासिल किया।
ऐतिहासिक रिकॉर्ड और विशेष क्लब
तन्वी की यह जीत कई मायनों में ऐतिहासिक है। वह साइना नेहवाल (2008) के बाद ताइपे ओपन महिला सिंगल्स खिताब जीतने वाली दूसरी भारतीय खिलाड़ी बनी हैं। इस जीत से ताइपे ओपन में भारत का 17 साल का खिताबी सूखा भी समाप्त हुआ — इससे पहले 2009 में ज्वाला गुट्टा और वी. दिजू की मिक्स्ड डबल्स जोड़ी ने ग्रां प्री गोल्ड दौर में जीत दर्ज की थी। यह इस टूर्नामेंट में भारत की कुल तीसरी जीत है।
इसके साथ ही तन्वी सुपर 300 या उससे ऊँचे स्तर का खिताब जीतने वाली चौथी भारतीय महिला सिंगल्स शटलर बन गई हैं — साइना नेहवाल, पीवी सिंधु और देविका सिहाग के बाद। उन्होंने कोरियाई डबल्स दिग्गज ली योंग डे का सबसे कम उम्र के फाइनलिस्ट का रिकॉर्ड भी तोड़ा, जो 2006 में पुरुष डबल्स फाइनल में पहुँचने के समय 17 साल और 287 दिन के थे।
खिलाड़ी की प्रतिक्रिया
जीत के बाद तन्वी ने कहा, 'यह खिताब जीतकर मैं बहुत खुश हूँ। मैंने हर कदम और हर मैच पर ध्यान देते हुए अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने की कोशिश की और मुझे लगा कि पूरे टूर्नामेंट में मैंने बहुत अच्छा खेला। मैं थोड़ी घबराई हुई थी, लेकिन मैंने खुद से कहा कि अपना 100 प्रतिशत दूँ और अपने खेल पर ध्यान बनाए रखूँ।'
करियर का संदर्भ
यह तन्वी के करियर का केवल दूसरा BWF वर्ल्ड टूर फाइनल था। इससे पहले वह यूएस ओपन में बेइवेन झांग से हारकर उपविजेता रही थीं। इतनी कम उम्र में इस स्तर की निरंतरता भारतीय बैडमिंटन के भविष्य के लिए एक सशक्त संकेत है। गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब भारतीय महिला बैडमिंटन अंतरराष्ट्रीय मंच पर लगातार मज़बूत होती जा रही है।