भरतपुर विधानसभा 2026: टीएमसी के मुस्तफिजुर रहमान ने भाजपा को 30,753 मतों से हराया
सारांश
मुख्य बातें
तृणमूल कांग्रेस (TMC) के उम्मीदवार मुस्तफिजुर रहमान (सुमन) ने पश्चिम बंगाल की भरतपुर विधानसभा सीट पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) की प्रत्याशी अनामिका घोष को 30,753 मतों के बड़े अंतर से पराजित कर दिया। मुर्शिदाबाद जिले की यह सीट राजनीतिक उथल-पुथल और बदलते सामाजिक समीकरणों के कारण इस बार भी चर्चा के केंद्र में रही।
मुख्य चुनावी नतीजे
TMC उम्मीदवार मुस्तफिजुर रहमान ने 30,753 मतों की निर्णायक बढ़त से यह सीट अपने नाम की। भाजपा की अनामिका घोष दूसरे स्थान पर रहीं। यह जीत ऐसे समय में आई जब सीट के पूर्व विधायक और TMC के दिग्गज नेता हुमायूं कबीर पार्टी से निष्कासित होकर अलग मैदान में थे। इसके बावजूद TMC ने इस सीट पर अपनी पकड़ बनाए रखी।
हुमायूं कबीर और बदलते समीकरण
इस सीट के सबसे चर्चित राजनीतिक चेहरे हुमायूं कबीर रहे हैं, जिन्होंने पुलिस कमिश्नर के पद से इस्तीफा देकर राजनीति में प्रवेश किया था। वे ममता बनर्जी सरकार में मंत्री पद पर भी रह चुके हैं। हाल ही में बाबरी मस्जिद के पुनर्निर्माण को लेकर दिए गए विवादास्पद बयान के कारण TMC ने उन्हें निलंबित कर दिया, जिसके बाद उन्होंने आम जनता उन्नयन पार्टी (AUJP) का गठन किया। इस बार कबीर ने भरतपुर की बजाय रेजीनगर और नौदा सीटों से चुनाव लड़ा।
भरतपुर सीट का राजनीतिक इतिहास
भरतपुर एक सामान्य (General) श्रेणी की विधानसभा सीट है और बहरामपुर लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत आती है। इसमें भरतपुर-2 ब्लॉक और भरतपुर-1 ब्लॉक की कुछ ग्राम पंचायतें शामिल हैं। यह क्षेत्र मुख्यतः ग्रामीण है।
1951 से 2021 तक के चुनावी इतिहास पर नज़र डालें तो रिवोल्यूशनरी सोशलिस्ट पार्टी (RSP) ने नौ बार यहाँ जीत दर्ज की। कांग्रेस ने छह बार सफलता पाई, जबकि TMC और CPI(M) को एक-एक बार जीत मिली। RSP के ईद मोहम्मद ने 1991 से 2011 तक लगातार पाँच बार इस सीट का प्रतिनिधित्व किया।
2011 के बाद सीट की राजनीति में बड़ा बदलाव आया। RSP की पकड़ कमज़ोर पड़ी और 2016 में कांग्रेस ने जीत दर्ज की। इसके बाद 2021 में TMC ने पहली बार यह सीट जीती, जब हुमायूं कबीर ने बड़े अंतर से प्रतिद्वंद्वी को हराया था।
जनसांख्यिकीय और भौगोलिक स्थिति
जनसांख्यिकीय दृष्टि से भरतपुर एक मुस्लिम बहुल क्षेत्र है, जहाँ वर्तमान में लगभग 57.90 प्रतिशत मतदाता मुस्लिम हैं। अनुसूचित जाति के मतदाता लगभग 16.44 प्रतिशत हैं। हाल के वर्षों में मतदाताओं की संख्या में तेज़ वृद्धि इस क्षेत्र के बदलते सामाजिक समीकरणों को रेखांकित करती है।
भौगोलिक रूप से भरतपुर, बहरामपुर, कृष्णानगर और कोलकाता से सड़क मार्ग से जुड़ा हुआ है, जबकि रेल संपर्क पास के स्टेशनों के ज़रिए उपलब्ध है।
आगे की राजनीतिक तस्वीर
लोकसभा चुनावों के आँकड़े भी यहाँ के बदलते रुझान की पुष्टि करते हैं — जहाँ पहले कांग्रेस और RSP का दबदबा था, वहीं हाल के वर्षों में TMC ने लगातार मज़बूत प्रदर्शन किया है। हुमायूं कबीर के अलग होने के बावजूद TMC की यह जीत संकेत देती है कि पार्टी का जनाधार इस सीट पर अभी भी सुदृढ़ है।