पश्चिम बंगाल चुनाव 2026: TMC के 35 में से 22 मंत्री हारे, ममता बनर्जी भी भवानीपुर सीट से पराजित
सारांश
मुख्य बातें
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 में तृणमूल कांग्रेस (TMC) को ऐतिहासिक झटका लगा है। कोलकाता से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार, चुनाव मैदान में उतरे 35 मंत्रियों में से 22 अपनी सीटें नहीं बचा पाए — यानी करीब 63 प्रतिशत मंत्री पराजित हुए। इनमें स्वयं मुख्यमंत्री ममता बनर्जी भी शामिल हैं, जो अपनी परंपरागत सीट भवानीपुर (सीट संख्या 159) से हार गईं। राजनीतिक विश्लेषक इसे राज्य में गहरी एंटी-इंकंबेंसी की लहर का स्पष्ट प्रमाण मान रहे हैं।
मुख्य घटनाक्रम
हारने वाले मंत्रियों की सूची लंबी और चौंकाने वाली है। इनमें अरूप बिस्वास (टॉलीगंज), ब्रत्य बसु (दमदम), चंद्रिमा भट्टाचार्य (दमदम उत्तर), शशि पांजा (श्यामपुकुर), सुजीत बोस (बिधाननगर), इंद्रनील सेन (चंदननगर), बेचेराम मन्ना (सिंगुर), स्वपन देबनाथ (पुर्बस्थली दक्षिण), बुलु चिक बड़ाइक (माल), प्रदीप कुमार मजूमदार (दुर्गापुर पूर्व), बिरबाहा हांसदा (बिनपुर), मानस रंजन भुइयां (साबंग), मलय घटक (आसनसोल उत्तर), सिद्दीकुल्लाह चौधरी (मोंटेश्वर), उदयन गुहा (दिनहाटा), संध्यारानी टुडू (मानबाजार), बंकिम चंद्र हाजरा (सागर), उज्जल बिस्वास (कृष्णानगर दक्षिण), स्नेहासिस चक्रवर्ती (जंगीपाड़ा), श्रीकांत महतो (सल्बोनी) और सत्यजीत बर्मन (हेम्ताबाद) शामिल हैं।
हार का अंतर — कुछ सीटों पर भारी पराजय
कई सीटों पर हार का अंतर अत्यंत व्यापक रहा, जो जनता के तीखे असंतोष को दर्शाता है। उद्योग मंत्री शशि पांजा श्यामपुकुर सीट पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) की पूर्णिमा चक्रवर्ती से 14,600 से अधिक मतों से पराजित हुईं। उदयन गुहा दिनहाटा सीट पर BJP के अजय रे से 17,400 से अधिक मतों से हारे।
सिद्दीकुल्लाह चौधरी मंतेश्वर सीट पर BJP के सैकत पांजा से 14,700 से अधिक मतों से पराजित हुए। प्रदीप मजूमदार दुर्गापुर पूर्व सीट पर BJP के चंद्र शेखर बनर्जी से 30,900 से अधिक मतों से हारे — जो इस सूची की सबसे बड़ी पराजयों में से एक है। चंद्रिमा भट्टाचार्य को दमदम उत्तर सीट पर BJP के सौरव सिकदार से 26,400 से अधिक मतों से हार का सामना करना पड़ा। इसके अलावा, पूर्व मंत्री निर्मल माझी गोगहाट सीट पर BJP के प्रशांत डिगर से 49,500 से अधिक मतों से पराजित हुए।
कौन से विभाग रहे प्रभावित
पराजित मंत्रियों में राज्य के कई संवेदनशील और महत्वपूर्ण विभागों के प्रमुख शामिल थे — महिला एवं बाल विकास, उद्योग, आवास, बिजली, शिक्षा, परिवहन और पिछड़ा वर्ग कल्याण जैसे मंत्रालय। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि यह महज व्यक्तिगत पराजय नहीं, बल्कि TMC के शासन मॉडल के विरुद्ध जनता का सामूहिक फैसला है।
विशेषज्ञ क्या कहते हैं
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मतदाताओं ने केवल उम्मीदवारों को नहीं, बल्कि TMC के पूरे नेतृत्व और उसकी कार्यशैली को नकारा है। गौरतलब है कि यह ऐसे समय में हुआ है जब राज्य में भ्रष्टाचार, कानून-व्यवस्था और बेरोज़गारी जैसे मुद्दे चुनावी चर्चा के केंद्र में थे। विश्लेषकों के अनुसार, 63 प्रतिशत मंत्रियों की पराजय आधुनिक भारतीय राज्य-स्तरीय चुनावों में एंटी-इंकंबेंसी के सबसे तीखे उदाहरणों में से एक है।
क्या होगा आगे
ममता बनर्जी की व्यक्तिगत पराजय और मंत्रिमंडल के बड़े हिस्से के सफाए के बाद TMC के भीतर नेतृत्व को लेकर सवाल उठने तय हैं। नई सरकार के गठन और सत्ता-हस्तांतरण की प्रक्रिया आने वाले दिनों में स्पष्ट होगी। पश्चिम बंगाल की राजनीति में यह परिणाम एक नए अध्याय की शुरुआत माना जा रहा है।