सिलीगुड़ी नगर निगम मेयर गौतम देव का इस्तीफा, पश्चिम बंगाल में चौथा TMC बोर्ड भंग होने की कगार पर
सारांश
मुख्य बातें
पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के नेतृत्व वाले नगर निकायों में उथल-पुथल जारी है। दार्जिलिंग जिले के सिलीगुड़ी नगर निगम (SMC) के मेयर गौतम देव ने शुक्रवार, 19 जून 2026 को अपने पद से इस्तीफा दे दिया, जिससे यह राज्य का चौथा ऐसा नगर निगम बन गया है जिसका TMC-नेतृत्व वाला बोर्ड भंग होने के मुहाने पर खड़ा है। गौतम देव ने अपना इस्तीफा SMC आयुक्त अश्विनी कुमार रॉय को सौंपा।
मुख्य घटनाक्रम
जानकारी के अनुसार, गौतम देव ने गुरुवार को सिलीगुड़ी नगर निगम के मेयर-इन-काउंसिल के सदस्यों के साथ बैठक की थी। इस बैठक में उन्होंने पद छोड़ने की इच्छा जाहिर की। परिषद के कुछ सदस्यों ने उन्हें अगले एक वर्ष तक कार्यकाल पूरा करने का अनुरोध किया, लेकिन गौतम देव अपने निर्णय पर अडिग रहे और अगले दिन औपचारिक इस्तीफा सौंप दिया।
पश्चिम बंगाल में TMC बोर्डों की स्थिति
गौतम देव के इस्तीफे से पहले तीन अन्य TMC-नेतृत्व वाले नगर निगमों के मेयर भी पद छोड़ चुके हैं। सबसे पहले बिधाननगर नगर निगम (BMC) की मेयर कृष्णा चक्रवर्ती ने इस्तीफा दिया। इसके बाद कोलकाता नगर निगम (KMC) के मेयर और चार बार के TMC विधायक फिरहाद हाकिम ने पद छोड़ा। तीसरे चंदननगर नगर निगम (CMC) के मेयर राम चक्रवर्ती ने भी इस्तीफा दे दिया। अब सिलीगुड़ी के गौतम देव के इस्तीफे से यह क्रम चौथे नगर निगम तक पहुँच गया है।
गौतम देव का राजनीतिक सफर
गौतम देव का TMC में लंबा राजनीतिक इतिहास रहा है। उन्होंने 2011 के विधानसभा चुनाव में दाबग्राम-फूलबाड़ी सीट से जीत दर्ज की थी और उत्तर बंगाल विकास विभाग के मंत्री की जिम्मेदारी संभाली थी। 2016 में दोबारा विधायक चुने जाने पर उन्हें राज्य का पर्यटन मंत्री बनाया गया।
हालांकि 2021 के विधानसभा चुनाव में वह भारतीय जनता पार्टी (BJP) की उम्मीदवार शिखा चटर्जी से हार गए थे। इसके बावजूद 2022 के सिलीगुड़ी नगर निगम चुनाव में उनके नेतृत्व में TMC ने जीत हासिल की और वह मेयर बने। 2026 के विधानसभा चुनाव में उन्हें सिलीगुड़ी सीट पर BJP उम्मीदवार और वर्तमान पश्चिम बंगाल के संसदीय कार्य मंत्री शंकर घोष के हाथों पुनः हार का सामना करना पड़ा।
आम जनता और प्रशासन पर असर
यह ऐसे समय में आया है जब पश्चिम बंगाल के कई शहरी निकायों में प्रशासनिक नेतृत्व का शून्य बन रहा है। गौरतलब है कि नगर निगम बोर्ड भंग होने की स्थिति में स्थानीय नागरिक सेवाओं — जैसे सफाई, जल आपूर्ति और निर्माण अनुमतियाँ — के संचालन पर सीधा असर पड़ सकता है।
क्या होगा आगे
राज्य सरकार की ओर से अभी तक यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि रिक्त मेयर पदों को भरने के लिए नए चुनाव कराए जाएंगे या प्रशासक नियुक्त किए जाएंगे। TMC के भीतर इन इस्तीफों की श्रृंखला और उसके राजनीतिक निहितार्थ पर नज़र बनी हुई है।