पश्चिम बंगाल में BJP सरकार का बड़ा फैसला: उत्तरी बंगाल के चार TMC-संचालित नगर निकाय भंग, उप-विभागीय अधिकारी नियुक्त
सारांश
मुख्य बातें
पश्चिम बंगाल के नगर निगम विभाग ने 19 मई 2026 को उत्तरी बंगाल में तृणमूल कांग्रेस (TMC) द्वारा संचालित चार शहरी नगर निकायों के बोर्डों को तत्काल प्रभाव से भंग कर दिया। राज्य में सत्ता परिवर्तन के बाद भारतीय जनता पार्टी (BJP) की नई सरकार ने यह कदम उठाया, जिसमें इन निकायों पर बिना चुनाव कराए वर्षों तक कथित तौर पर अवैध रूप से प्रशासनिक बोर्डों के माध्यम से काम करने के गंभीर आरोप थे।
कौन से चार नगर निकाय भंग किए गए
भंग किए गए चार नगर निकायों में से तीन दार्जिलिंग जिले में हैं — कर्सियोंग नगरपालिका, मिरिक अधिसूचित क्षेत्र प्राधिकरण और कलिम्पोंग नगरपालिका। चौथा निकाय दक्षिण दिनाजपुर जिले में स्थित बुनियादपुर नगरपालिका है। इन सभी में चुनाव के बजाय पूर्व बोर्ड अध्यक्षों को ही प्रशासक बनाए रखा गया था।
राज्यपाल की सलाह पर लिया गया निर्णय
राज्य नगर निगम विभाग द्वारा जारी आधिकारिक अधिसूचना के अनुसार, यह निर्णय राज्यपाल आर.एन. रवि के कार्यालय से प्राप्त सलाह के आधार पर लिया गया। नए चुनाव संपन्न होने और निर्वाचित बोर्ड सदस्यों के पदभार ग्रहण करने तक इन चारों निकायों का प्रशासनिक नियंत्रण संबंधित उप-विभागीय अधिकारियों को सौंपा गया है।
बुनियादपुर नगरपालिका के प्रशासक के रूप में गंगारामपुर के उप-विभागीय अधिकारी को नियुक्त किया गया है। कर्सियोंग, मिरिक और कलिम्पोंग के उप-विभागीय अधिकारियों को क्रमशः उनके संबंधित नगर निकायों का प्रशासक बनाया गया है।
वर्षों से चुनाव क्यों नहीं हुए
कर्सियोंग, मिरिक और कलिम्पोंग में अंतिम नगर निकाय चुनाव मई 2017 में हुए थे, जिनमें तत्कालीन सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस ने अपने स्थानीय पहाड़ी सहयोगियों के साथ मिलकर इन तीनों बोर्डों पर नियंत्रण स्थापित किया था। अप्रैल 2022 में इन बोर्डों का कार्यकाल समाप्त होने के बावजूद राज्य सरकार ने नए चुनाव नहीं कराए और बोर्ड अध्यक्षों को ही प्रशासक नियुक्त कर दिया।
इसी प्रकार, बुनियादपुर नगरपालिका में 13 अगस्त 2017 को चुनाव हुए थे। TMC-संचालित बोर्ड का कार्यकाल सितंबर 2022 में समाप्त हो गया, परंतु वहाँ भी चुनाव नहीं हुए और पूर्व अध्यक्ष को ही प्रशासक बनाए रखा गया।
विपक्ष और आलोचकों की प्रतिक्रिया
विपक्षी दलों ने पहले ही आरोप लगाया था कि बोर्ड अध्यक्षों को प्रशासक नियुक्त करने से नगरपालिकाओं की शक्तियाँ प्रभावी रूप से सत्ताधारी दल के हाथों में केंद्रित हो गईं। आलोचकों का कहना है कि चुनाव टालने की यह प्रवृत्ति स्थानीय लोकतंत्र की मूल भावना के विरुद्ध है।
आगे क्या होगा
स्वतंत्रता के बाद पहली बार पश्चिम बंगाल में अपनी सरकार बनाने वाली BJP ने कथित तौर पर अवैध रूप से संचालित ऐसे सभी बोर्डों को चिह्नित कर उन्हें भंग करने और नौकरशाही प्रशासकों की नियुक्ति करने की नीति अपनाई है। अब इन चारों नगर निकायों में नए सिरे से चुनाव कराना नई सरकार की प्राथमिकता सूची में है, हालांकि चुनाव की तिथि अभी घोषित नहीं हुई है।