भारत-नॉर्डिक संबंधों में नया स्वर्णिम युग: ओस्लो समिट में मोदी ने व्यापार, ग्रीन टेक और शांति पर दिया जोर
सारांश
मुख्य बातें
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 19 मई 2026 को ओस्लो में आयोजित तीसरे इंडिया-नॉर्डिक समिट में भाग लिया और नॉर्डिक देशों के नेताओं के साथ संयुक्त प्रेस वार्ता को संबोधित किया। समिट में सस्टेनेबिलिटी, क्लीन एनर्जी, इनोवेशन और नई तकनीक के क्षेत्र में सहयोग को केंद्र में रखा गया। मोदी ने कहा कि हाल ही में हुए व्यापार समझौते भारत और नॉर्डिक देशों के बीच नए स्वर्णिम युग की नींव रखेंगे।
समिट की पृष्ठभूमि और महत्व
यह समिट उस फॉर्मेट का तीसरा संस्करण है जिसे आठ वर्ष पहले भारत और नॉर्डिक देशों — नॉर्वे, डेनमार्क, स्वीडन, फिनलैंड और आइसलैंड — के बीच संबंधों को नई ऊर्जा देने के उद्देश्य से गठित किया गया था। प्रधानमंत्री मोदी ने रेखांकित किया कि लोकतंत्र, कानून के शासन और बहुपक्षवाद के प्रति साझा प्रतिबद्धता दोनों पक्षों को स्वाभाविक साझेदार बनाती है। गौरतलब है कि यह समिट ऐसे समय में हुई जब वैश्विक स्तर पर व्यापार तनाव और भू-राजनीतिक अनिश्चितता चरम पर है।
व्यापार और निवेश: दस वर्षों में चार गुना वृद्धि
मोदी ने बताया कि पिछले दस वर्षों में भारत और नॉर्डिक देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार चार गुना बढ़ा है, और इसी अवधि में नॉर्डिक देशों से भारत में निवेश में लगभग 200 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। उन्होंने कहा कि नॉर्डिक निवेश फंड भारत की तेज़ आर्थिक वृद्धि में अहम साझेदार बन रहे हैं और इस साझेदारी ने नॉर्डिक अर्थव्यवस्थाओं में भी हजारों नई नौकरियाँ पैदा की हैं।
अक्टूबर 2025 से नॉर्वे, आइसलैंड और अन्य EFTA देशों के साथ व्यापार एवं आर्थिक साझेदारी समझौता लागू हो चुका है। इसके अलावा, हाल ही में संपन्न भारत-EU FTA में डेनमार्क, फिनलैंड और स्वीडन भी भागीदार हैं। मोदी के अनुसार, इन समझौतों से द्विपक्षीय संबंधों को ऐतिहासिक गति मिलेगी।
ग्रीन टेक्नोलॉजी और रणनीतिक साझेदारी
समिट में भारत और नॉर्वे के संबंधों को ग्रीन टेक्नोलॉजी और नवाचार रणनीतिक साझेदारी का स्वरूप देने का निर्णय लिया गया। प्रधानमंत्री ने कहा कि इस साझेदारी के तहत आइसलैंड की जीरो-कार्बन थर्मल विशेषज्ञता, नॉर्वे की ब्लू इकोनॉमी और आर्कटिक अनुभव, तथा सभी नॉर्डिक देशों की मैरिटाइम सस्टेनेबिलिटी को भारत के पैमाने के साथ जोड़ा जाएगा।
इसके साथ ही, स्वीडन की उन्नत मैन्युफैक्चरिंग और रक्षा तकनीक, फिनलैंड की टेलीकॉम और डिजिटल क्षमता, तथा डेनमार्क की साइबर सिक्योरिटी विशेषज्ञता को भारत के तकनीकी प्रतिभा-भंडार से जोड़कर वैश्विक स्तर पर विश्वसनीय समाधान विकसित किए जाएंगे। विश्वविद्यालयों, स्टार्टअप और प्रयोगशालाओं के बीच संपर्क बढ़ाने, आर्कटिक-पोलर अनुसंधान में सहयोग गहरा करने और स्किल डेवलपमेंट व मोबिलिटी के नए अवसर सुनिश्चित करने पर भी सहमति बनी।
वैश्विक शांति और बहुपक्षीय सुधार पर साझा रुख
मोदी ने कहा कि भारत और नॉर्डिक देश मिलकर नियम-आधारित वैश्विक व्यवस्था को मजबूत करते रहेंगे। यूक्रेन और पश्चिम एशिया में जारी संघर्षों की जल्द समाप्ति और शांति प्रयासों के समर्थन पर दोनों पक्षों में सहमति जताई गई। उन्होंने यह भी कहा कि बहुपक्षीय संस्थानों में सुधार अनिवार्य और तत्काल आवश्यक है — एक ऐसा रुख जो भारत की संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद सुधार की दीर्घकालिक माँग के अनुरूप है।
आगे की राह
यह ऐसे समय में आया है जब भारत वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में अपनी स्थिति मजबूत करने की कोशिश कर रहा है और नॉर्डिक देश हरित ऊर्जा परिवर्तन में निवेश के नए गंतव्य तलाश रहे हैं। रणनीतिक साझेदारी के विस्तृत क्रियान्वयन ढाँचे और संयुक्त परियोजनाओं की घोषणा आने वाले महीनों में अपेक्षित है।