भारत-नॉर्डिक संबंधों में नया स्वर्णिम युग: ओस्लो समिट में मोदी ने व्यापार, ग्रीन टेक और शांति पर दिया जोर

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
भारत-नॉर्डिक संबंधों में नया स्वर्णिम युग: ओस्लो समिट में मोदी ने व्यापार, ग्रीन टेक और शांति पर दिया जोर

सारांश

ओस्लो में तीसरे इंडिया-नॉर्डिक समिट में PM मोदी ने व्यापार, ग्रीन टेक और वैश्विक शांति पर नॉर्डिक नेताओं के साथ साझा रुख पेश किया। EFTA और EU व्यापार समझौतों की बुनियाद पर खड़ी यह साझेदारी दस वर्षों में चार गुना बढ़े द्विपक्षीय व्यापार को नई ऊँचाई देने की कोशिश है।

मुख्य बातें

PM नरेंद्र मोदी ने 19 मई 2026 को ओस्लो में तीसरे इंडिया-नॉर्डिक समिट में भाग लिया।
पिछले 10 वर्षों में भारत-नॉर्डिक द्विपक्षीय व्यापार चार गुना और नॉर्डिक निवेश लगभग 200% बढ़ा।
अक्टूबर 2025 से EFTA देशों के साथ व्यापार एवं आर्थिक साझेदारी समझौता लागू; भारत-EU FTA में डेनमार्क, फिनलैंड, स्वीडन भी शामिल।
भारत-नॉर्वे संबंधों को ग्रीन टेक्नोलॉजी और नवाचार रणनीतिक साझेदारी का दर्जा देने का निर्णय।
यूक्रेन और पश्चिम एशिया संघर्षों की जल्द समाप्ति और बहुपक्षीय संस्थानों में सुधार पर दोनों पक्षों में सहमति।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 19 मई 2026 को ओस्लो में आयोजित तीसरे इंडिया-नॉर्डिक समिट में भाग लिया और नॉर्डिक देशों के नेताओं के साथ संयुक्त प्रेस वार्ता को संबोधित किया। समिट में सस्टेनेबिलिटी, क्लीन एनर्जी, इनोवेशन और नई तकनीक के क्षेत्र में सहयोग को केंद्र में रखा गया। मोदी ने कहा कि हाल ही में हुए व्यापार समझौते भारत और नॉर्डिक देशों के बीच नए स्वर्णिम युग की नींव रखेंगे।

समिट की पृष्ठभूमि और महत्व

यह समिट उस फॉर्मेट का तीसरा संस्करण है जिसे आठ वर्ष पहले भारत और नॉर्डिक देशों — नॉर्वे, डेनमार्क, स्वीडन, फिनलैंड और आइसलैंड — के बीच संबंधों को नई ऊर्जा देने के उद्देश्य से गठित किया गया था। प्रधानमंत्री मोदी ने रेखांकित किया कि लोकतंत्र, कानून के शासन और बहुपक्षवाद के प्रति साझा प्रतिबद्धता दोनों पक्षों को स्वाभाविक साझेदार बनाती है। गौरतलब है कि यह समिट ऐसे समय में हुई जब वैश्विक स्तर पर व्यापार तनाव और भू-राजनीतिक अनिश्चितता चरम पर है।

व्यापार और निवेश: दस वर्षों में चार गुना वृद्धि

मोदी ने बताया कि पिछले दस वर्षों में भारत और नॉर्डिक देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार चार गुना बढ़ा है, और इसी अवधि में नॉर्डिक देशों से भारत में निवेश में लगभग 200 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। उन्होंने कहा कि नॉर्डिक निवेश फंड भारत की तेज़ आर्थिक वृद्धि में अहम साझेदार बन रहे हैं और इस साझेदारी ने नॉर्डिक अर्थव्यवस्थाओं में भी हजारों नई नौकरियाँ पैदा की हैं।

अक्टूबर 2025 से नॉर्वे, आइसलैंड और अन्य EFTA देशों के साथ व्यापार एवं आर्थिक साझेदारी समझौता लागू हो चुका है। इसके अलावा, हाल ही में संपन्न भारत-EU FTA में डेनमार्क, फिनलैंड और स्वीडन भी भागीदार हैं। मोदी के अनुसार, इन समझौतों से द्विपक्षीय संबंधों को ऐतिहासिक गति मिलेगी।

ग्रीन टेक्नोलॉजी और रणनीतिक साझेदारी

समिट में भारत और नॉर्वे के संबंधों को ग्रीन टेक्नोलॉजी और नवाचार रणनीतिक साझेदारी का स्वरूप देने का निर्णय लिया गया। प्रधानमंत्री ने कहा कि इस साझेदारी के तहत आइसलैंड की जीरो-कार्बन थर्मल विशेषज्ञता, नॉर्वे की ब्लू इकोनॉमी और आर्कटिक अनुभव, तथा सभी नॉर्डिक देशों की मैरिटाइम सस्टेनेबिलिटी को भारत के पैमाने के साथ जोड़ा जाएगा।

इसके साथ ही, स्वीडन की उन्नत मैन्युफैक्चरिंग और रक्षा तकनीक, फिनलैंड की टेलीकॉम और डिजिटल क्षमता, तथा डेनमार्क की साइबर सिक्योरिटी विशेषज्ञता को भारत के तकनीकी प्रतिभा-भंडार से जोड़कर वैश्विक स्तर पर विश्वसनीय समाधान विकसित किए जाएंगे। विश्वविद्यालयों, स्टार्टअप और प्रयोगशालाओं के बीच संपर्क बढ़ाने, आर्कटिक-पोलर अनुसंधान में सहयोग गहरा करने और स्किल डेवलपमेंट व मोबिलिटी के नए अवसर सुनिश्चित करने पर भी सहमति बनी।

वैश्विक शांति और बहुपक्षीय सुधार पर साझा रुख

मोदी ने कहा कि भारत और नॉर्डिक देश मिलकर नियम-आधारित वैश्विक व्यवस्था को मजबूत करते रहेंगे। यूक्रेन और पश्चिम एशिया में जारी संघर्षों की जल्द समाप्ति और शांति प्रयासों के समर्थन पर दोनों पक्षों में सहमति जताई गई। उन्होंने यह भी कहा कि बहुपक्षीय संस्थानों में सुधार अनिवार्य और तत्काल आवश्यक है — एक ऐसा रुख जो भारत की संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद सुधार की दीर्घकालिक माँग के अनुरूप है।

आगे की राह

यह ऐसे समय में आया है जब भारत वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में अपनी स्थिति मजबूत करने की कोशिश कर रहा है और नॉर्डिक देश हरित ऊर्जा परिवर्तन में निवेश के नए गंतव्य तलाश रहे हैं। रणनीतिक साझेदारी के विस्तृत क्रियान्वयन ढाँचे और संयुक्त परियोजनाओं की घोषणा आने वाले महीनों में अपेक्षित है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली परीक्षा यह है कि EFTA और EU व्यापार समझौते ज़मीन पर कितनी जल्दी परिणाम देते हैं। ग्रीन टेक्नोलॉजी साझेदारी की घोषणा महत्वाकांक्षी है, परंतु इसके क्रियान्वयन ढाँचे, वित्तपोषण और समयसीमा अभी सार्वजनिक नहीं हुई — जो पिछले कई ऐसे समझौतों की परिचित कमज़ोरी रही है। वैश्विक व्यापार पुनर्गठन के इस दौर में नॉर्डिक देशों के साथ गठबंधन रणनीतिक रूप से सही दिशा है, लेकिन 'स्वर्णिम युग' तभी साकार होगा जब संयुक्त परियोजनाओं में रोज़गार और तकनीक हस्तांतरण के ठोस, सत्यापन-योग्य लक्ष्य तय किए जाएँ।
RashtraPress
19 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

तीसरा इंडिया-नॉर्डिक समिट क्या है और यह कहाँ हुआ?
तीसरा इंडिया-नॉर्डिक समिट 19 मई 2026 को नॉर्वे की राजधानी ओस्लो में आयोजित हुआ, जिसमें भारत और पाँच नॉर्डिक देशों — नॉर्वे, डेनमार्क, स्वीडन, फिनलैंड और आइसलैंड — के नेताओं ने भाग लिया। यह फॉर्मेट आठ वर्ष पहले द्विपक्षीय संबंधों को नई ऊर्जा देने के लिए बनाया गया था।
भारत और नॉर्डिक देशों के बीच व्यापार कितना बढ़ा है?
PM मोदी के अनुसार पिछले दस वर्षों में भारत-नॉर्डिक द्विपक्षीय व्यापार चार गुना बढ़ा है और इसी अवधि में नॉर्डिक देशों से भारत में निवेश में लगभग 200 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। नॉर्डिक निवेश फंड भारत की आर्थिक वृद्धि में सक्रिय भागीदार बन रहे हैं।
EFTA और EU व्यापार समझौते भारत-नॉर्डिक संबंधों को कैसे प्रभावित करेंगे?
अक्टूबर 2025 से नॉर्वे, आइसलैंड और अन्य EFTA देशों के साथ व्यापार एवं आर्थिक साझेदारी समझौता लागू हो चुका है। इसके अलावा हाल ही में संपन्न भारत-EU FTA में डेनमार्क, फिनलैंड और स्वीडन भी शामिल हैं, जिससे व्यापार और निवेश को नई गति मिलने की उम्मीद है।
भारत-नॉर्वे ग्रीन टेक्नोलॉजी साझेदारी में क्या शामिल है?
इस साझेदारी के तहत आइसलैंड की जीरो-कार्बन थर्मल विशेषज्ञता, नॉर्वे की ब्लू इकोनॉमी और आर्कटिक अनुभव को भारत के पैमाने से जोड़ा जाएगा। साथ ही स्वीडन की रक्षा-मैन्युफैक्चरिंग, फिनलैंड की टेलीकॉम-डिजिटल और डेनमार्क की साइबर सिक्योरिटी विशेषज्ञता को भारतीय प्रतिभा के साथ मिलाकर वैश्विक समाधान विकसित किए जाएंगे।
समिट में यूक्रेन और पश्चिम एशिया पर क्या रुख अपनाया गया?
भारत और नॉर्डिक देशों ने यूक्रेन और पश्चिम एशिया में जारी संघर्षों की जल्द समाप्ति तथा शांति प्रयासों के समर्थन पर सहमति जताई। दोनों पक्षों ने नियम-आधारित वैश्विक व्यवस्था को मजबूत करने और बहुपक्षीय संस्थानों में तत्काल सुधार की आवश्यकता पर भी एकमत होने की बात कही।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 4 घंटे पहले
  2. 5 घंटे पहले
  3. 10 घंटे पहले
  4. 13 घंटे पहले
  5. 20 घंटे पहले
  6. कल
  7. कल
  8. कल