भारत-नॉर्वे ग्रीन रणनीतिक साझेदारी का ऐलान, मोदी बोले — पूरी दुनिया को होगा फायदा

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भारत-नॉर्वे ग्रीन रणनीतिक साझेदारी का ऐलान, मोदी बोले — पूरी दुनिया को होगा फायदा

सारांश

ओस्लो में मोदी और नॉर्वे के PM स्टोरे की मुलाकात महज़ शिष्टाचार नहीं थी — इसने भारत-नॉर्वे संबंधों को 'ग्रीन रणनीतिक साझेदारी' का ठोस ढाँचा दिया। EFTA समझौते के तहत 100 अरब डॉलर निवेश, ISRO-नॉर्वे MoU और हिंद-प्रशांत में नॉर्वे की एंट्री — यह यात्रा भारत की यूरोप-नीति में नई इबारत लिखती है।

मुख्य बातें

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 18 मई 2026 को ओस्लो में भारत-नॉर्वे ग्रीन रणनीतिक साझेदारी की घोषणा की।
EFTA समझौते के तहत अगले 15 वर्षों में भारत में 100 अरब डॉलर निवेश और 10 लाख नौकरियाँ सृजित करने का लक्ष्य।
ISRO और नॉर्वे अंतरिक्ष एजेंसी के बीच समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर।
नॉर्वे हिंद-प्रशांत समुद्री पहल से औपचारिक रूप से जुड़ा।
स्वच्छ ऊर्जा, ब्लू इकोनॉमी , ग्रीन शिपिंग , AI और आर्कटिक अनुसंधान में सहयोग विस्तार पर सहमति।
पहलगाम आतंकी हमले के बाद स्थगित यात्रा अब संपन्न; नॉर्वे की एकजुटता के लिए मोदी ने आभार जताया।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 18 मई 2026 को ओस्लो में नॉर्वे के प्रधानमंत्री जोनास गहर स्टोरे के साथ द्विपक्षीय वार्ता के बाद भारत और नॉर्वे के बीच ग्रीन रणनीतिक साझेदारी की औपचारिक घोषणा की। मोदी ने कहा कि यह साझेदारी केवल दोनों देशों तक सीमित नहीं, बल्कि पूरे विश्व के लिए लाभकारी सिद्ध होगी।

साझेदारी की पृष्ठभूमि और संदर्भ

यह यात्रा ऐसे समय में हुई है जब भारत और यूरोपीय मुक्त व्यापार संघ (EFTA) के बीच पिछले वर्ष एक ऐतिहासिक व्यापार एवं आर्थिक साझेदारी समझौता लागू हुआ। इस समझौते में अगले 15 वर्षों में भारत में 100 अरब डॉलर के निवेश और 10 लाख नौकरियाँ सृजित करने का लक्ष्य रखा गया है। गौरतलब है कि मोदी की यह यात्रा पहले निर्धारित थी, किंतु पहलगाम आतंकी हमले के कारण स्थगित करनी पड़ी थी।

मोदी ने नॉर्वे के उस रुख की सराहना की जब उसने आतंकवाद के विरुद्ध भारत के साथ एकजुटता दिखाई। उन्होंने कहा, 'उस कठिन समय में नॉर्वे ने आतंकवाद के खिलाफ भारत के साथ खड़े होकर सच्ची मित्रता का परिचय दिया।'

ग्रीन साझेदारी के मुख्य क्षेत्र

नई ग्रीन रणनीतिक साझेदारी के अंतर्गत स्वच्छ ऊर्जा, जलवायु अनुकूलन, ब्लू इकोनॉमी और ग्रीन शिपिंग जैसे क्षेत्रों में सहयोग को प्राथमिकता दी जाएगी। मोदी के अनुसार, भारत की स्केल, गति और प्रतिभा को नॉर्वे की तकनीक और पूँजी के साथ जोड़कर वैश्विक समाधान तैयार किए जाएंगे।

इसके अलावा स्थिरता (Sustainability), महासागर ऊर्जा, भूविज्ञान और स्वास्थ्य क्षेत्रों में शोध-सहयोग बढ़ाने पर सहमति बनी है। इंजीनियरिंग, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, साइबर और डिजिटल क्षेत्रों में दोनों देशों के विश्वविद्यालयों और स्टार्टअप इकोसिस्टम को जोड़ा जाएगा।

अंतरिक्ष और आर्कटिक सहयोग

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) और नॉर्वे की अंतरिक्ष एजेंसी के बीच एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए, जो दोनों देशों के अंतरिक्ष सहयोग को नया आयाम देगा। मोदी ने यह भी रेखांकित किया कि नॉर्वे आर्कटिक क्षेत्र का एक महत्वपूर्ण देश है और भारत के आर्कटिक अनुसंधान केंद्र 'हिमाद्री' के संचालन में नॉर्वे का सहयोग अमूल्य रहा है।

समुद्री और वैश्विक सुरक्षा

नॉर्वे हिंद-प्रशांत समुद्री पहल से औपचारिक रूप से जुड़ रहा है। दोनों देश मिलकर समुद्री अर्थव्यवस्था, समुद्री सुरक्षा और क्षमता-निर्माण के क्षेत्रों में सहयोग को और सुदृढ़ करेंगे। मोदी ने वैश्विक अस्थिरता — विशेष रूप से यूक्रेन और पश्चिम एशिया के संघर्षों — का उल्लेख करते हुए कहा कि ऐसे समय में भारत और यूरोप के संबंध एक नए स्वर्णिम युग में प्रवेश कर रहे हैं।

आगे की राह

कौशल विकास और श्रम गतिशीलता के क्षेत्र में भी द्विपक्षीय सहयोग को व्यापक बनाने पर सहमति व्यक्त की गई। विशेषज्ञों का मानना है कि यह साझेदारी जलवायु परिवर्तन से मुकाबले और हरित अर्थव्यवस्था की दिशा में एक ठोस कदम है, जिसके दीर्घकालिक परिणाम दोनों देशों की अर्थव्यवस्थाओं को लाभ पहुँचाएंगे।

संपादकीय दृष्टिकोण

इसलिए इसका पूरा होना स्वयं एक कूटनीतिक संदेश है। EFTA के ज़रिए 100 अरब डॉलर निवेश का लक्ष्य महत्वाकांक्षी है, लेकिन असली सवाल यह है कि पिछले बड़े निवेश-वादों की तरह यह भी केवल घोषणा तक सीमित रहेगा या ज़मीन पर उतरेगा। नॉर्वे का हिंद-प्रशांत पहल से जुड़ना भारत की इंडो-पैसिफिक रणनीति के लिए एक छोटी लेकिन सुनियोजित जीत है। ISRO-नॉर्वे MoU और हिमाद्री आर्कटिक स्टेशन के संदर्भ में यह साझेदारी विज्ञान-कूटनीति के उस मॉडल को आगे बढ़ाती है जिसे भारत अपनी 'सॉफ्ट पावर' का औज़ार बना रहा है।
RashtraPress
18 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारत-नॉर्वे ग्रीन रणनीतिक साझेदारी क्या है?
यह 18 मई 2026 को ओस्लो में घोषित एक द्विपक्षीय ढाँचा है जिसके तहत स्वच्छ ऊर्जा, ब्लू इकोनॉमी, ग्रीन शिपिंग, आर्कटिक अनुसंधान और डिजिटल क्षेत्रों में भारत और नॉर्वे मिलकर काम करेंगे। इसका उद्देश्य भारत की तकनीकी क्षमता को नॉर्वे की पूँजी और विशेषज्ञता के साथ जोड़कर वैश्विक समाधान तैयार करना है।
EFTA-भारत व्यापार समझौते में निवेश और नौकरियों का क्या लक्ष्य है?
EFTA समझौते के तहत अगले 15 वर्षों में भारत में 100 अरब डॉलर का निवेश और 10 लाख नौकरियाँ सृजित करने का लक्ष्य रखा गया है। यह समझौता पिछले वर्ष लागू हुआ और भारत-नॉर्वे साझा विकास का ब्लूप्रिंट माना जा रहा है।
ISRO और नॉर्वे अंतरिक्ष एजेंसी के बीच MoU से क्या होगा?
इस समझौता ज्ञापन के ज़रिए दोनों देशों के बीच अंतरिक्ष सहयोग को नया आयाम मिलेगा। इसमें उपग्रह डेटा साझाकरण, आर्कटिक और जलवायु अनुसंधान में अंतरिक्ष तकनीक के उपयोग पर ध्यान केंद्रित किए जाने की संभावना है।
नॉर्वे हिंद-प्रशांत समुद्री पहल से क्यों जुड़ा?
नॉर्वे का हिंद-प्रशांत समुद्री पहल से जुड़ना समुद्री अर्थव्यवस्था, सुरक्षा और क्षमता-निर्माण में सहयोग को औपचारिक रूप देता है। यह भारत की इंडो-पैसिफिक रणनीति में यूरोपीय देशों की भागीदारी बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
मोदी की नॉर्वे यात्रा पहले क्यों स्थगित हुई थी?
पहलगाम आतंकी हमले के कारण मोदी की पिछले वर्ष निर्धारित नॉर्वे यात्रा स्थगित करनी पड़ी थी। उस दौरान नॉर्वे ने आतंकवाद के विरुद्ध भारत के साथ एकजुटता व्यक्त की थी, जिसके लिए मोदी ने ओस्लो में आभार जताया।
राष्ट्र प्रेस
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