PM मोदी की नॉर्वे यात्रा: 43 साल बाद ऐतिहासिक दौरा, व्यापार-शांति एजेंडे पर होगी बड़ी चर्चा
सारांश
मुख्य बातें
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपनी 5 देशों की यात्रा के चौथे चरण में सोमवार, 19 मई 2025 को नॉर्वे पहुँचेंगे — यह किसी भारतीय प्रधानमंत्री की नॉर्वे की 43 वर्षों में पहली यात्रा है। नॉर्वे में भारत की राजदूत ग्लोरिया गंगटे ने इस दौरे को द्विपक्षीय संबंधों के लिए ऐतिहासिक करार दिया है और कहा है कि यह यात्रा व्यापार, समुद्री सहयोग, हरित प्रौद्योगिकी और वैश्विक शांति जैसे अहम मुद्दों पर नई दिशा तय करेगी।
स्वागत और सांस्कृतिक कार्यक्रम
राजदूत गंगटे के अनुसार, प्रधानमंत्री मोदी के ओस्लो पहुँचने पर होटल में भारतीय समुदाय के सैकड़ों सदस्य उनका स्वागत करेंगे। इस अवसर पर भारत और नॉर्वे के बच्चों द्वारा एक विशेष सांस्कृतिक कार्यक्रम भी प्रस्तुत किया जाएगा, जो दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक सेतु को रेखांकित करेगा।
गंगटे ने कहा, "प्रधानमंत्री सुबह नॉर्वे पहुँचेंगे और फिर होटल जाएंगे, जहाँ भारतीय समुदाय के सैकड़ों सदस्य उनका स्वागत करेंगे। नॉर्वे और भारत के बच्चों की ओर से एक सांस्कृतिक कार्यक्रम भी प्रस्तुत किया जाएगा।"
द्विपक्षीय एजेंडा: व्यापार से लेकर हरित ऊर्जा तक
राजदूत ने बताया कि इस यात्रा का एजेंडा व्यापक है। व्यापार, समुद्री संबंध, हरित प्रौद्योगिकी और निवेश को बढ़ावा देना इसके प्रमुख बिंदु हैं। गौरतलब है कि वर्तमान में समुद्री क्षेत्र दोनों देशों के सहयोग का सबसे मज़बूत स्तंभ है — शिपओनर्स एसोसिएशन के नए जहाज़ों के लगभग 10 प्रतिशत ऑर्डर भारत को दिए जा रहे हैं।
यह यात्रा ऐसे समय में हो रही है जब भारत वैश्विक आपूर्ति शृंखलाओं में अपनी भूमिका को पुनर्परिभाषित कर रहा है और नॉर्वे हरित ऊर्जा संक्रमण में अग्रणी देशों में शुमार है।
वैश्विक शांति और क्षेत्रीय मुद्दे
राजदूत गंगटे ने बताया कि वैश्विक शांति, पश्चिम एशिया में तनाव और दीर्घकालिक रणनीतिक सहयोग इस यात्रा के केंद्रीय विषयों में शामिल हैं। उन्होंने कहा, "दोनों पक्ष इस बात पर विचार कर रहे हैं कि वे वैश्विक शांति को बढ़ावा देने और दुनिया के विभिन्न क्षेत्रों में समस्याओं का समाधान खोजने के लिए किस तरह का योगदान दे सकते हैं।"
यह ऐसे समय में विशेष रूप से महत्त्वपूर्ण है जब पश्चिम एशिया में संघर्ष जारी है और वैश्विक कूटनीतिक समुदाय मध्यस्थता के नए रास्ते तलाश रहा है।
तीसरा भारत-नॉर्डिक शिखर सम्मेलन
इस यात्रा के दौरान तीसरा भारत-नॉर्डिक शिखर सम्मेलन भी आयोजित होगा, जो भारत और नॉर्डिक देशों के बीच बढ़ते रणनीतिक महत्त्व का प्रमाण है। राजदूत गंगटे ने कहा कि इस शिखर सम्मेलन का आयोजन ही यह दर्शाता है कि दोनों पक्ष भविष्य में सहयोग की कितनी बड़ी संभावनाएँ देख रहे हैं।
उल्लेखनीय है कि नॉर्वे यह मानता है कि भारत — जो विश्व का सर्वाधिक आबादी वाला देश है — संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की स्थायी सदस्यता का हकदार है। यह समर्थन भारत की बहुपक्षीय कूटनीति के लिए एक महत्त्वपूर्ण संकेत है।
आगे की राह
प्रधानमंत्री मोदी की यह यात्रा भारत-नॉर्वे संबंधों को एक नए अध्याय में ले जाने की क्षमता रखती है। समुद्री, हरित ऊर्जा और रणनीतिक सहयोग के क्षेत्रों में अपेक्षित समझौतों से दोनों देशों के बीच व्यापारिक और कूटनीतिक संबंध अगले दशक के लिए मज़बूत आधार पाएंगे।