पश्चिम बंगाल पुलिस कल्याण बोर्ड भंग: CM सुवेंदु अधिकारी का बड़ा फैसला, 18 मई को अधिसूचना
सारांश
मुख्य बातें
पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने शनिवार, 16 मई 2026 को पश्चिम बंगाल पुलिस कल्याण बोर्ड को तत्काल प्रभाव से भंग करने की घोषणा की। दक्षिण 24 परगना जिले के डायमंड हार्बर में एक प्रशासनिक समीक्षा बैठक के दौरान मीडिया से मुखातिब होते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि इस निर्णय की आधिकारिक अधिसूचना 18 मई को जारी की जाएगी। यह घोषणा ऐसे समय में आई है जब बोर्ड के कथित संचालक और कोलकाता पुलिस के पूर्व उपायुक्त शांतनु सिन्हा बिस्वास मनी लॉन्ड्रिंग और अवैध भूमि हड़पने के मामलों में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की हिरासत में हैं।
मुख्यमंत्री का बयान और आरोप
अधिकारी ने कहा कि बोर्ड का गठन मूलतः पुलिस कर्मियों और उनके परिवारों के कल्याण के लिए किया गया था, लेकिन कालांतर में यह तृणमूल कांग्रेस (TMC) की पिछली सरकार के दौरान एक राजनीतिक दल की शाखा मात्र बनकर रह गया। उन्होंने कहा, 'बाद के चरण में यह बोर्ड शांतनु सिन्हा बिस्वास जैसे पुलिस अधिकारियों के लिए सुविधा का साधन बन गया।' गौरतलब है कि सिन्हा बिस्वास को पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का अत्यंत करीबी माना जाता था और वे कल्याण बोर्ड के दो समन्वयकों में से एक थे।
सेवा विस्तार रद्द करने के बाद का कदम
यह घोषणा नई राज्य सरकार द्वारा उठाए गए एक और कदम के बाद आई है — ईडी द्वारा सिन्हा बिस्वास की गिरफ्तारी के पश्चात उन्हें दी गई दो वर्ष की सेवा विस्तार अवधि को सरकार ने पहले ही समाप्त कर दिया था। इस प्रकार बोर्ड को भंग करना उस निर्णय की स्वाभाविक अगली कड़ी मानी जा रही है। आलोचकों का कहना है कि इन कदमों से स्पष्ट होता है कि नई सरकार TMC के कार्यकाल में स्थापित प्रशासनिक ढाँचों की व्यापक समीक्षा कर रही है।
राजनीतिक हिंसा पीड़ितों के लिए नई व्यवस्था
मुख्यमंत्री ने यह भी घोषणा की कि अब से राजनीतिक हिंसा से प्रभावित पीड़ित पुलिस में शिकायत दर्ज करा सकेंगे और अपने दावों के समर्थन में दस्तावेज प्रस्तुत कर सकेंगे। इसके बाद भारतीय न्याय संहिता, 2023 के तहत आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यदि पीड़ितों को किसी पुलिस अधिकारी के विरुद्ध विशेष शिकायत हो, तो वे संबंधित पुलिसकर्मियों के खिलाफ भी शिकायत दर्ज करा सकेंगे।
पुलिस की भूमिका पर जोर
अधिकारी ने कहा, 'पुलिस अब निष्पक्ष रूप से कार्य करेगी और अपने साथी पुलिसकर्मियों के खिलाफ भी शिकायतें स्वीकार करेगी। अब से पश्चिम बंगाल में कानून का शासन होगा, न कि शासक का कानून।' यह बयान राज्य में पुलिस की कथित राजनीतिक पक्षधरता को लेकर उठते रहे सवालों के बीच आया है।
आगे क्या होगा
18 मई 2026 को जारी होने वाली आधिकारिक अधिसूचना के बाद बोर्ड औपचारिक रूप से भंग हो जाएगा। राज्य प्रशासन से अपेक्षा है कि वह पुलिस कर्मियों के कल्याण के लिए कोई वैकल्पिक पारदर्शी तंत्र प्रस्तुत करे, हालाँकि अभी तक इस बारे में कोई विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है।