हरियाणा का एडवोकेट जनरल ऑफिस पूरी तरह डिजिटल, 'प्रो-केस मैनेजमेंट सिस्टम' हुआ लाइव

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हरियाणा का एडवोकेट जनरल ऑफिस पूरी तरह डिजिटल, 'प्रो-केस मैनेजमेंट सिस्टम' हुआ लाइव

सारांश

हरियाणा ने कानूनी प्रशासन में इतिहास रच दिया — एडवोकेट जनरल ऑफिस अब देश का पहला पूर्णतः डिजिटल AG कार्यालय बन गया है। 'प्रो-केस मैनेजमेंट सिस्टम' के लाइव होने से कागज़ी फाइलों की जगह PDF और इलेक्ट्रॉनिक रोस्टर ने ले ली है — एक बदलाव जो पूरे देश के लिए मिसाल बन सकता है।

मुख्य बातें

हरियाणा देश का पहला राज्य बना, जहाँ एडवोकेट जनरल ऑफिस पूर्णतः डिजिटल हो गया है।
7 मई 2026 को एडवोकेट जनरल प्रविंद्र सिंह चौहान ने ' प्रो-केस मैनेजमेंट सिस्टम ' को आधिकारिक रूप से लाइव लॉन्च किया।
यह परिवर्तन लगभग छह महीने पहले शुरू हुआ था; सीनियर डिप्टी एडवोकेट जनरल अरुण तेवतिया को डिजिटलीकरण का चेयरमैन नियुक्त किया गया था।
सभी केस दस्तावेज़ अब PDF में उपलब्ध; इलेक्ट्रॉनिक रोस्टर , इलेक्ट्रॉनिक राय और इलेक्ट्रॉनिक फैसले प्रणाली में शामिल।
राज्य सरकार ने इस मॉडल को पूरे देश के लिए नया पैमाना बताया है।

हरियाणा के एडवोकेट जनरल का कार्यालय अब पूरी तरह डिजिटल हो गया है — 7 मई 2026 को चंडीगढ़ में एडवोकेट जनरल प्रविंद्र सिंह चौहान ने आधिकारिक रूप से 'प्रो-केस मैनेजमेंट सिस्टम' को लाइव लॉन्च किया। इस उपलब्धि के साथ हरियाणा देश का पहला ऐसा राज्य बन गया है, जहाँ एडवोकेट जनरल ऑफिस के सभी कानूनी कार्य पूर्णतः डिजिटल प्रणाली के माध्यम से संपादित किए जा रहे हैं।

मुख्य घटनाक्रम

यह डिजिटल परिवर्तन की यात्रा लगभग छह महीने पहले शुरू हुई थी, जब एडवोकेट जनरल चौहान ने सीनियर डिप्टी एडवोकेट जनरल अरुण तेवतिया को सूचना प्रौद्योगिकी, सुरक्षा नोडल अधिकारी और कम्प्यूटरीकरण का चेयरमैन नियुक्त किया। उन्हें ऑफिस के समस्त मैन्युअल कार्यों को डिजिटल प्रक्रियाओं में रूपांतरित करने की जिम्मेदारी सौंपी गई। इसके बाद मिशन मोड में काम शुरू हुआ और पारंपरिक कामकाज को एक आधुनिक डिजिटल ढाँचे में ढाल दिया गया।

प्रो-केस मैनेजमेंट सिस्टम: क्या है यह प्लेटफॉर्म

राज्य सरकार के अनुसार, इस डिजिटल इकोसिस्टम की रीढ़ 'प्रो-केस मैनेजमेंट सिस्टम' है, जो मौजूदा 'लिटिगेशन मैनेजमेंट सिस्टम' का एक उन्नत विस्तार है। इस प्लेटफॉर्म के ज़रिए एडवोकेट जनरल के कार्यालय और सरकारी विभागों के बीच जाँच-पड़ताल, कानूनी राय, केस से जुड़ा पत्राचार और मुकदमों का प्रबंधन अब पूर्णतः डिजिटल तरीके से किया जा रहा है। इससे कार्य की गति में उल्लेखनीय तेज़ी आई है और अनावश्यक देरी में कमी आई है।

आम जनता और विभागों पर असर

केस से जुड़े सभी दस्तावेज़ — जिनमें पेपर बुक, जवाब, लिखित बयान और अदालत के पिछले आदेश शामिल हैं — अब 'पोर्टेबल डॉक्यूमेंट फॉर्मेट (PDF)' में सुरक्षित रूप से उपलब्ध हैं। इससे कागज़ी फाइलों पर निर्भरता लगभग समाप्त हो गई है, जबकि पारदर्शिता, कार्यक्षमता और पहुँच में सुधार हुआ है।

सीनियर डिप्टी एडवोकेट जनरल अरुण तेवतिया ने बताया कि इलेक्ट्रॉनिक रोस्टर के ज़रिए कानून अधिकारियों को पेपर बुक, जवाब और अदालत के अंतिम आदेश सीधे उनके खाते में तुरंत प्राप्त होंगे। इलेक्ट्रॉनिक फैसलों से अदालती निर्णयों तक तत्काल पहुँच सुनिश्चित होगी, और इलेक्ट्रॉनिक राय के माध्यम से विभागों को कानूनी सलाह अधिक शीघ्रता से मिल सकेगी।

राष्ट्रीय महत्व

गौरतलब है कि यह उपलब्धि ऐसे समय में आई है जब केंद्र सरकार न्यायिक प्रक्रियाओं के डिजिटलीकरण पर ज़ोर दे रही है। राज्य सरकार का कहना है कि इस मॉडल को न केवल हरियाणा के लिए, बल्कि पूरे देश के लिए एक नया पैमाना माना जा रहा है। यह पहली बार है जब किसी राज्य के एडवोकेट जनरल ऑफिस ने इस स्तर का पूर्ण डिजिटल रूपांतरण हासिल किया हो।

क्या होगा आगे

एडवोकेट जनरल प्रविंद्र सिंह चौहान ने कहा कि यह सपना अब पूरी तरह साकार हो गया है और इस डिजिटल प्रणाली को और अधिक सुदृढ़ बनाने का काम जारी रहेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह मॉडल अन्य राज्यों में भी अपनाया जाए, तो न्यायिक प्रशासन में देरी की समस्या को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन 'देश में पहला' का दावा तब तक अधूरा है जब तक स्वतंत्र तकनीकी ऑडिट इसकी पुष्टि न करे। असली कसौटी यह है कि क्या यह प्रणाली न्यायिक परिणामों में — यानी मुकदमों के निपटारे की गति में — मापनीय सुधार लाती है, या केवल डेटा एंट्री का डिजिटलीकरण है। गौरतलब है कि भारत में न्यायालयों में लंबित मामलों की संख्या पाँच करोड़ से अधिक है; ऐसे में बैक-एंड डिजिटलीकरण ज़रूरी है, पर पर्याप्त नहीं। यदि यह मॉडल अन्य राज्य अपनाते हैं और परिणाम सत्यापित होते हैं, तभी यह वास्तविक 'राष्ट्रीय पैमाना' बनेगा।
RashtraPress
13 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

हरियाणा का एडवोकेट जनरल ऑफिस डिजिटल होने का क्या मतलब है?
इसका मतलब है कि अब एडवोकेट जनरल कार्यालय में सभी कानूनी कार्य — जाँच-पड़ताल, कानूनी राय, पत्राचार और मुकदमों का प्रबंधन — पूर्णतः डिजिटल प्रणाली के ज़रिए होंगे। कागज़ी फाइलों की जगह PDF दस्तावेज़ और इलेक्ट्रॉनिक रोस्टर ने ले ली है।
'प्रो-केस मैनेजमेंट सिस्टम' क्या है?
'प्रो-केस मैनेजमेंट सिस्टम' मौजूदा 'लिटिगेशन मैनेजमेंट सिस्टम' का उन्नत विस्तार है, जिसे 7 मई 2026 को लाइव लॉन्च किया गया। यह प्लेटफॉर्म एडवोकेट जनरल ऑफिस और सरकारी विभागों के बीच सभी कानूनी प्रक्रियाओं को डिजिटल रूप से संचालित करता है।
इस डिजिटल बदलाव की शुरुआत कब और कैसे हुई?
यह प्रक्रिया लगभग छह महीने पहले शुरू हुई, जब एडवोकेट जनरल प्रविंद्र सिंह चौहान ने सीनियर डिप्टी एडवोकेट जनरल अरुण तेवतिया को IT और कम्प्यूटरीकरण का चेयरमैन नियुक्त किया। उन्हें मिशन मोड में सभी मैन्युअल कार्यों को डिजिटल प्रक्रियाओं में बदलने की जिम्मेदारी दी गई थी।
इससे सरकारी विभागों और कानून अधिकारियों को क्या फायदा होगा?
इलेक्ट्रॉनिक रोस्टर के ज़रिए कानून अधिकारियों को पेपर बुक और अदालती आदेश तुरंत उनके खाते में मिलेंगे। विभागों को कानूनी सलाह अधिक शीघ्रता से मिलेगी और अदालती फैसलों तक तत्काल पहुँच सुनिश्चित होगी।
क्या हरियाणा का यह मॉडल अन्य राज्यों के लिए उदाहरण बन सकता है?
राज्य सरकार का दावा है कि यह मॉडल पूरे देश के लिए नया पैमाना है। हालाँकि, विशेषज्ञों का कहना है कि इसके व्यापक अनुकरण के लिए स्वतंत्र सत्यापन और मापनीय न्यायिक परिणाम आवश्यक होंगे।
राष्ट्र प्रेस
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