चेनसॉ हमले के बाद फिल्मों पर उठे सवाल, संदीप रेड्डी वांगा बोले — 'सिनेमा को बलि का बकरा न बनाएं'
सारांश
मुख्य बातें
आंध्र प्रदेश के अनंतपुर जिले के राप्टाडु स्थित एक स्कूल में छात्रा पर हुए चेनसॉ हमले के बाद फिल्मों में दिखाई जाने वाली हिंसा को लेकर देशभर में बहस छिड़ गई है। इसी बीच 'एनिमल' और 'कबीर सिंह' जैसी विवादास्पद फिल्मों के निर्देशक संदीप रेड्डी वांगा ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट कर अपने आलोचकों को करारा जवाब दिया। उन्होंने कहा कि किसी त्रासदी के बाद सिनेमा को 'आसान निशाना' बनाना पीड़ितों के साथ अन्याय है।
क्या है पूरा मामला
पुलिस की प्रारंभिक जांच के मुताबिक, 21 वर्षीय हेमंत कथित तौर पर कक्षा 10 के एक क्लासरूम में घुसा और 15 वर्षीय एक छात्रा पर चेनसॉ से हमला कर दिया। इस दौरान लक्ष्मी नामक एक अन्य छात्रा भी घायल हो गई, जो कथित तौर पर अपनी सहपाठी को बचाने की कोशिश कर रही थी। पुलिस के अनुसार, आरोपी पीड़िता का रिश्तेदार बताया जा रहा है और वह लंबे समय से उसका पीछा कर रहा था। आरोप है कि अपना प्रस्ताव ठुकराए जाने के बाद उसने यह हमला किया।
संदीप रेड्डी वांगा की प्रतिक्रिया
इस घटना के बाद सोशल मीडिया पर वांगा की फिल्म 'एनिमल' के एक दृश्य की चर्चा होने लगी, जिसमें अभिनेता रणबीर कपूर बंदूक लेकर एक स्कूल की कक्षा में दाखिल होते दिखाई देते हैं। आलोचकों ने इसे हमले से जोड़ते हुए फिल्मी हिंसा के सामाजिक प्रभाव पर सवाल उठाए।
वांगा ने एक्स पर लिखा, 'जब कोई व्यक्ति जघन्य अपराध करता है, तो हमारी पहली प्रतिक्रिया पीड़ितों के प्रति संवेदना जताने और समस्या की गहराई को समझने की होनी चाहिए। सिनेमा को आसान निशाना बनाकर बलि का बकरा नहीं ढूंढना चाहिए।' उन्होंने आगे कहा, 'अब यह साफ होता जा रहा है कि आपकी चिंता पीड़ितों या उनके परिवारों के लिए नहीं है, बल्कि आप इस भयानक घटना का इस्तेमाल अपने निजी हिसाब-किताब चुकाने के लिए कर रहे हैं।'
फिल्म इंडस्ट्री पर भी निशाना
वांगा ने इंडस्ट्री के भीतर की कुछ प्रवृत्तियों पर भी कड़ी टिप्पणी की। उन्होंने लिखा, 'कुछ कलाकार और फिल्ममेकर ऐसी घटनाओं का इस्तेमाल दूसरों के काम पर निशाना साधने के लिए करते हैं और मौका मिलते ही खुद को समाज सुधारक घोषित कर देते हैं। किसी त्रासदी के समय संवेदना दिखानी चाहिए, उसका फायदा नहीं उठाना चाहिए। दोनों के बीच का फर्क समझिए।'
राम गोपाल वर्मा का तर्क
फिल्ममेकर राम गोपाल वर्मा ने भी एक्स पर इस बहस में अपनी राय रखी। उन्होंने लिखा, 'हिंसा बढ़ने के लिए फिल्मों को दोष देना ऐसा ही है, जैसे अपहरण की घटनाएं बढ़ने के लिए रामायण को दोष देना।' यह ऐसे समय में आया है जब फिल्मों और वास्तविक जीवन की हिंसा के बीच संबंध पर सार्वजनिक बहस तेज हो रही है।
व्यापक सामाजिक प्रश्न
गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है जब किसी हिंसक घटना के बाद फिल्मी कंटेंट को कटघरे में खड़ा किया गया हो। आलोचकों का कहना है कि पर्दे पर दिखाई जाने वाली हिंसा और वास्तविक अपराध के बीच सीधा कारण-प्रभाव संबंध स्थापित करना शोध के आधार पर जटिल और विवादित विषय है। वहीं, घटना के बाद इलाके में गुस्से का माहौल है और परिजन न्याय की माँग कर रहे हैं। पुलिस की जांच अभी जारी है।