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सिद्दारमैया स्टिंग केस: कुमारस्वामी के दिल्ली आवास की तलाशी की तैयारी में बेंगलुरु पुलिस

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सिद्दारमैया स्टिंग केस: कुमारस्वामी के दिल्ली आवास की तलाशी की तैयारी में बेंगलुरु पुलिस

सारांश

बेंगलुरु पुलिस सिद्दारमैया स्टिंग केस में कुमारस्वामी के दिल्ली आवास की तलाशी की तैयारी कर रही है। प्रज्वल प्रसाद से सीसीबी ने पूछताछ की, मोबाइल फॉरेंसिक जांच को भेजा गया। मंत्री तंगडगी ने कुमारस्वामी पर वीडियो प्रसार का सीधा आरोप लगाया — कर्नाटक की राजनीतिक जंग नए मोर्चे पर पहुँची।

मुख्य बातें

बेंगलुरु पुलिस केंद्रीय मंत्री एचडी कुमारस्वामी के दिल्ली स्थित कुशक रोड आवास की तलाशी की तैयारी कर रही है।
प्रज्वल प्रसाद — कुमारस्वामी की सोशल मीडिया टीम से कथित तौर पर जुड़े — मंगलवार को सीसीबी के सामने पेश हुए; उनका मोबाइल फोन फॉरेंसिक जांच के लिए भेजा गया।
गिरफ्तार रितेश कुमार पांडे ने बताया कि करोलबाग से फोन खरीदकर कुमारस्वामी के आधिकारिक आवास पर लाया गया था।
कर्नाटक मंत्री शिवराज तंगडगी ने आरोप लगाया कि स्टिंग वीडियो का प्रचार कुमारस्वामी के कार्यालय के ज़रिए किया गया।
पुलिस आयुक्त सीमांत कुमार सिंह ने वरिष्ठ अधिकारियों के साथ आगे की कार्रवाई पर बैठक की।

बेंगलुरु पुलिस पूर्व कर्नाटक मुख्यमंत्री सिद्दारमैया से जुड़े कथित स्टिंग ऑपरेशन मामले की जांच के तहत केंद्रीय मंत्री और जनता दल (सेक्युलर) [जेडी(एस)] नेता एचडी कुमारस्वामी के नई दिल्ली स्थित आधिकारिक आवास की तलाशी की तैयारी कर रही है। 4 नवंबर 2026 को यह जानकारी सामने आई, जब बेंगलुरु के पुलिस आयुक्त सीमांत कुमार सिंह ने वरिष्ठ अधिकारियों के साथ आगे की जांच-कार्रवाई पर बैठक की।

प्रज्वल प्रसाद की पूछताछ और मोबाइल जब्त

कुमारस्वामी की सोशल मीडिया जनसंपर्क टीम से कथित तौर पर जुड़े प्रज्वल प्रसाद मंगलवार को बेंगलुरु स्थित सेंट्रल क्राइम ब्रांच (सीसीबी) के सामने पेश हुए। पूछताछ के दौरान प्रसाद ने खुद को निर्दोष बताया और दावा किया कि उन्हें इस मामले की जानकारी केवल सोशल मीडिया के ज़रिए मिली। उन्होंने यह भी कहा कि वह कंटेंट क्रिएटर रितेश कुमार पांडे को नहीं जानते।

जांच के तहत पुलिस ने प्रज्वल प्रसाद का मोबाइल फोन जब्त कर उसे फॉरेंसिक जांच के लिए भेज दिया है। सीसीबी ने उन्हें पहले नोटिस जारी किया था; उन पर आरोप है कि उन्होंने नई दिल्ली में कुमारस्वामी के आधिकारिक आवास पर रितेश कुमार पांडे को एक मोबाइल फोन उपलब्ध कराया था।

मुख्य घटनाक्रम: फोन खरीद से अपलोड तक

पुलिस आयुक्त सीमांत कुमार सिंह के अनुसार, जिस मोबाइल फोन का कथित तौर पर स्टिंग ऑपरेशन का वीडियो अपलोड करने के लिए इस्तेमाल किया गया, वह दिल्ली में खरीदा गया था और बाद में कुशक रोड स्थित कुमारस्वामी के आधिकारिक आवास पर लाया गया। नई दिल्ली से गिरफ्तार रितेश पांडे ने पूछताछ में बताया कि उन्होंने विनोद शर्मा के साथ मिलकर करोलबाग से यह फोन खरीदा था — कथित तौर पर प्रज्वल प्रसाद के निर्देश पर।

जांच में यह भी सामने आया है कि वह फोन बाद में कुमारस्वामी के आधिकारिक आवास पर लाया गया और कथित तौर पर प्रज्वल प्रसाद को सौंपा गया। गौरतलब है कि यह मामला पूर्व मुख्यमंत्री सिद्दारमैया को निशाना बनाकर तैयार किए गए कथित फर्जी स्टिंग से जुड़ा है।

सरकार की प्रतिक्रिया: मंत्री तंगडगी का तीखा हमला

कर्नाटक के कन्नड़ एवं संस्कृति तथा पिछड़ा वर्ग कल्याण मंत्री शिवराज तंगडगी ने बुधवार को कुमारस्वामी पर जोरदार हमला बोला। उन्होंने सवाल किया कि कुमारस्वामी बार-बार यह क्यों कह रहे हैं कि सिद्दारमैया के साथ अन्याय हो रहा है, और उनकी 'बयानबाजी' से किसे लाभ मिलने वाला है।

तंगडगी ने आरोप लगाया कि स्टिंग ऑपरेशन का प्रचार-प्रसार कुमारस्वामी के कार्यालय के माध्यम से किया गया था। उन्होंने यह भी कहा कि कुमारस्वामी मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार और सिद्दारमैया के बीच दूरी पैदा करने का प्रयास कर रहे हैं — यानी कांग्रेस के भीतर फूट डालने की कोशिश।

तंगडगी ने सीधे शब्दों में कहा, 'वीडियो को अपलोड और प्रचारित कुमारस्वामी ने किया। उन्होंने खुद इसे स्वीकार किया है। क्या एक पूर्व मुख्यमंत्री के लिए इस तरह की गतिविधियों में शामिल होना शर्मनाक नहीं है?'

व्यापक संदर्भ

यह मामला ऐसे समय में तूल पकड़ रहा है जब कर्नाटक में कांग्रेस सरकार और विपक्षी जेडी(एस)-बीजेपी गठबंधन के बीच राजनीतिक तनाव पहले से ही चरम पर है। सिद्दारमैया पहले MUDA भूमि आवंटन विवाद को लेकर भी घिरे रह चुके हैं। आलोचकों का कहना है कि यह स्टिंग मामला उस विवाद की पृष्ठभूमि में और अधिक राजनीतिक संवेदनशीलता रखता है।

क्या होगा आगे

बेंगलुरु पुलिस की टीम कुमारस्वामी के दिल्ली आवास की तलाशी के लिए कानूनी औपचारिकताएँ पूरी करने में जुटी है। फोन की फॉरेंसिक जांच रिपोर्ट आने के बाद जांच की दिशा और स्पष्ट होने की उम्मीद है। इस मामले में अगले कुछ दिनों में नए घटनाक्रम सामने आ सकते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

तो कुमारस्वामी की 'मैं केवल सार्वजनिक मामला उठा रहा था' वाली सफाई कमज़ोर पड़ जाएगी। दूसरी ओर, कांग्रेस सरकार पर भी यह सुनिश्चित करने का दबाव रहेगा कि जांच राजनीतिक प्रतिशोध न दिखे — क्योंकि सिद्दारमैया खुद MUDA मामले में कठघरे में रह चुके हैं। मुख्यधारा की कवरेज जो चूक रही है वह यह है कि इस मामले में 'पीड़ित' और 'आरोपी' दोनों पक्ष अपने-अपने विवादों से घिरे हैं।
RashtraPress
4 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सिद्दारमैया स्टिंग ऑपरेशन केस क्या है?
यह पूर्व कर्नाटक मुख्यमंत्री सिद्दारमैया को निशाना बनाकर तैयार किए गए कथित फर्जी स्टिंग ऑपरेशन का मामला है, जिसमें बेंगलुरु पुलिस की सीसीबी जांच कर रही है। आरोप है कि वीडियो को एक मोबाइल फोन के ज़रिए अपलोड और प्रसारित किया गया, जिसका संबंध कुमारस्वामी के दिल्ली आवास से जोड़ा जा रहा है।
बेंगलुरु पुलिस कुमारस्वामी के दिल्ली आवास की तलाशी क्यों लेना चाहती है?
पुलिस जांच में सामने आया है कि कथित स्टिंग वीडियो अपलोड करने के लिए इस्तेमाल मोबाइल फोन दिल्ली में खरीदा गया और कुशक रोड स्थित कुमारस्वामी के आधिकारिक आवास पर लाया गया था। इस लिंक की पुष्टि के लिए पुलिस तलाशी की कानूनी तैयारी कर रही है।
प्रज्वल प्रसाद कौन हैं और उनकी भूमिका क्या बताई जा रही है?
प्रज्वल प्रसाद कथित तौर पर कुमारस्वामी की सोशल मीडिया जनसंपर्क टीम से जुड़े बताए जाते हैं। आरोप है कि उन्होंने कंटेंट क्रिएटर रितेश कुमार पांडे को कुमारस्वामी के आवास पर मोबाइल फोन उपलब्ध कराया। हालाँकि पूछताछ में उन्होंने खुद को निर्दोष बताया और रितेश पांडे से अपना कोई संबंध नहीं होने का दावा किया।
इस मामले में मंत्री शिवराज तंगडगी ने क्या आरोप लगाए?
कर्नाटक मंत्री शिवराज तंगडगी ने आरोप लगाया कि स्टिंग वीडियो का प्रचार-प्रसार कुमारस्वामी के कार्यालय के माध्यम से हुआ और कुमारस्वामी ने खुद इसे स्वीकार किया है। उन्होंने यह भी कहा कि कुमारस्वामी मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार और सिद्दारमैया के बीच दरार पैदा करने की कोशिश कर रहे हैं।
इस मामले में आगे क्या हो सकता है?
फॉरेंसिक जांच की रिपोर्ट आने के बाद जांच की दिशा और स्पष्ट होगी। बेंगलुरु पुलिस कुमारस्वामी के दिल्ली आवास की तलाशी के लिए कानूनी प्रक्रिया पूरी कर रही है, जिसके बाद नए तथ्य सामने आने की संभावना है।
राष्ट्र प्रेस
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