राजस्थान: एनसीआर के 6 जिलों में दीपावली पर सिर्फ 3 घंटे पटाखे, ग्रीन पटाखों पर QR कोड अनिवार्य
सारांश
मुख्य बातें
राजस्थान सरकार ने 4 नवंबर 2026 को दीपावली के दौरान वायु प्रदूषण पर लगाम लगाने के लिए कड़े दिशा-निर्देश जारी किए हैं, जिसके तहत राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में शामिल राज्य के छह जिलों में पटाखों की बिक्री और उपयोग पर सख्त पाबंदियाँ लागू की गई हैं। इन जिलों में केवल सीएसआईआर-एनईईआरआई द्वारा प्रमाणित ग्रीन पटाखे ही जलाने की अनुमति होगी, और वह भी महज तीन घंटे के निर्धारित समय-सीमा के भीतर।
प्रतिबंध किन जिलों में, क्या हैं नियम
अलवर, भरतपुर, दौसा, डीग, खैरथल-तिजारा और कोटपूतली-बहरोड़ — ये छह जिले एनसीआर के दायरे में आते हैं और इन्हीं पर नई गाइडलाइंस लागू होंगी। इन जिलों में पटाखे केवल 7 और 8 नवंबर को जलाए जा सकेंगे। समय भी निर्धारित है — सुबह 6 बजे से 7 बजे के बीच और रात 8 बजे से 10 बजे के बीच, यानी कुल मिलाकर मात्र तीन घंटे।
इसके अलावा, अस्पतालों, स्वास्थ्य केंद्रों और शिक्षण संस्थानों के 300 मीटर के दायरे में पटाखे जलाना पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा। पारंपरिक पटाखों पर पूर्ण रोक है; केवल पर्यावरण के अनुकूल 'ग्रीन पटाखे' ही इस्तेमाल किए जा सकेंगे।
QR कोड अनिवार्यता — पारदर्शिता की नई कोशिश
राज्य सरकार ने ग्रीन पटाखों के हर पैकेट पर QR कोड अनिवार्य किया है। उपभोक्ता इस कोड को स्कैन करके निर्माता का नाम, प्रमाणन विवरण और लाइसेंस की जानकारी तुरंत जाँच सकते हैं। बिना QR कोड वाले पटाखों की बिक्री पूरी तरह प्रतिबंधित होगी। इन पटाखों को केवल अधिकृत दुकानों से ही बेचा जा सकेगा और ऑनलाइन बिक्री पर भी प्रतिबंध रहेगा।
यह कदम उस बड़ी चिंता को दूर करने की कोशिश है जहाँ 'ग्रीन पटाखे' के नाम पर गैर-प्रमाणित उत्पाद बाज़ार में बिकते रहे हैं। QR कोड प्रणाली से आपूर्ति श्रृंखला की निगरानी संभव होगी।
प्रवर्तन और निगरानी तंत्र
राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और जिलास्तरीय अधिकारी दीपावली के दौरान और उसके बाद भी प्रतिदिन प्रदूषण स्तर की निगरानी करेंगे। जिला कलेक्टरों और पुलिस अधिकारियों को अवैध पटाखों की बिक्री, भंडारण और आपूर्ति रोकने के निर्देश दिए गए हैं।
दुकानों और गोदामों की जाँच के लिए विशेष टीमें गठित की जाएंगी। दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र से राजस्थान में प्रवेश करने वाले वाहनों की भी जाँच होगी। नियमों का उल्लंघन करने पर पटाखे जब्त कर पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम के तहत व्यक्तियों, व्यापारियों और निर्माताओं के विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी।
व्यापक संदर्भ: एनसीआर में बढ़ता प्रदूषण संकट
यह ऐसे समय में आया है जब दीपावली से पहले दिल्ली-एनसीआर में वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) खतरनाक स्तर तक पहुँचने की आशंका रहती है। गौरतलब है कि सर्वोच्च न्यायालय और केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) पहले भी एनसीआर जिलों में पटाखों पर प्रतिबंध संबंधी आदेश दे चुके हैं। राजस्थान की यह गाइडलाइन उसी नीतिगत दिशा में एक और कदम है।
राजस्थान सूचना एवं जनसंपर्क विभाग (डीआईपीआर) ने इन दिशा-निर्देशों को सार्वजनिक रूप से साझा किया है। अधिकारियों द्वारा प्रदूषण स्तर पर नियमित रिपोर्ट तैयार की जाएगी, जो नीति की जवाबदेही सुनिश्चित करेगी।
आगे क्या होगा
इन निर्देशों का असर जमीन पर कितना पड़ता है, यह प्रवर्तन की सक्रियता पर निर्भर करेगा। राज्य सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती अवैध पटाखों की तस्करी और गैर-अधिकृत बिक्री को रोकना होगी — खासकर दिल्ली-एनसीआर सीमा से लगे क्षेत्रों में। आने वाले दिनों में प्रदूषण निगरानी की रिपोर्टें यह तय करेंगी कि ये कदम पर्याप्त थे या नहीं।