4 नवंबर 2026
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राजस्थान: एनसीआर के 6 जिलों में दीपावली पर सिर्फ 3 घंटे पटाखे, ग्रीन पटाखों पर QR कोड अनिवार्य

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राजस्थान: एनसीआर के 6 जिलों में दीपावली पर सिर्फ 3 घंटे पटाखे, ग्रीन पटाखों पर QR कोड अनिवार्य

सारांश

दीपावली से ठीक पहले राजस्थान सरकार ने एनसीआर के 6 जिलों में पटाखों पर कड़ी पाबंदी लगाई — केवल 3 घंटे, केवल ग्रीन पटाखे, और हर पैकेट पर QR कोड अनिवार्य। यह कदम बढ़ते वायु प्रदूषण संकट के बीच जवाबदेही और प्रवर्तन दोनों को कसने की कोशिश है।

मुख्य बातें

राजस्थान सरकार ने 4 नवंबर 2026 को एनसीआर के 6 जिलों — अलवर, भरतपुर, दौसा, डीग, खैरथल-तिजारा, कोटपूतली-बहरोड़ — के लिए दीपावली पटाखा गाइडलाइंस जारी कीं।
पटाखे केवल 7 और 8 नवंबर को, दो निर्धारित स्लॉट में, कुल 3 घंटे ही जलाए जा सकेंगे।
केवल सीएसआईआर-एनईईआरआई प्रमाणित ग्रीन पटाखों की बिक्री और उपयोग की अनुमति; पारंपरिक पटाखों पर पूर्ण प्रतिबंध।
हर ग्रीन पटाखे के पैकेट पर QR कोड अनिवार्य; ऑनलाइन बिक्री और बिना QR कोड वाले पटाखों पर रोक।
अस्पतालों, स्वास्थ्य केंद्रों और शिक्षण संस्थानों के 300 मीटर दायरे में पटाखे जलाना पूर्णतः प्रतिबंधित।
उल्लंघन पर पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम के तहत कार्रवाई; विशेष टीमें और वाहन जाँच भी लागू।

राजस्थान सरकार ने 4 नवंबर 2026 को दीपावली के दौरान वायु प्रदूषण पर लगाम लगाने के लिए कड़े दिशा-निर्देश जारी किए हैं, जिसके तहत राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में शामिल राज्य के छह जिलों में पटाखों की बिक्री और उपयोग पर सख्त पाबंदियाँ लागू की गई हैं। इन जिलों में केवल सीएसआईआर-एनईईआरआई द्वारा प्रमाणित ग्रीन पटाखे ही जलाने की अनुमति होगी, और वह भी महज तीन घंटे के निर्धारित समय-सीमा के भीतर।

प्रतिबंध किन जिलों में, क्या हैं नियम

अलवर, भरतपुर, दौसा, डीग, खैरथल-तिजारा और कोटपूतली-बहरोड़ — ये छह जिले एनसीआर के दायरे में आते हैं और इन्हीं पर नई गाइडलाइंस लागू होंगी। इन जिलों में पटाखे केवल 7 और 8 नवंबर को जलाए जा सकेंगे। समय भी निर्धारित है — सुबह 6 बजे से 7 बजे के बीच और रात 8 बजे से 10 बजे के बीच, यानी कुल मिलाकर मात्र तीन घंटे।

इसके अलावा, अस्पतालों, स्वास्थ्य केंद्रों और शिक्षण संस्थानों के 300 मीटर के दायरे में पटाखे जलाना पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा। पारंपरिक पटाखों पर पूर्ण रोक है; केवल पर्यावरण के अनुकूल 'ग्रीन पटाखे' ही इस्तेमाल किए जा सकेंगे।

QR कोड अनिवार्यता — पारदर्शिता की नई कोशिश

राज्य सरकार ने ग्रीन पटाखों के हर पैकेट पर QR कोड अनिवार्य किया है। उपभोक्ता इस कोड को स्कैन करके निर्माता का नाम, प्रमाणन विवरण और लाइसेंस की जानकारी तुरंत जाँच सकते हैं। बिना QR कोड वाले पटाखों की बिक्री पूरी तरह प्रतिबंधित होगी। इन पटाखों को केवल अधिकृत दुकानों से ही बेचा जा सकेगा और ऑनलाइन बिक्री पर भी प्रतिबंध रहेगा।

यह कदम उस बड़ी चिंता को दूर करने की कोशिश है जहाँ 'ग्रीन पटाखे' के नाम पर गैर-प्रमाणित उत्पाद बाज़ार में बिकते रहे हैं। QR कोड प्रणाली से आपूर्ति श्रृंखला की निगरानी संभव होगी।

प्रवर्तन और निगरानी तंत्र

राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और जिलास्तरीय अधिकारी दीपावली के दौरान और उसके बाद भी प्रतिदिन प्रदूषण स्तर की निगरानी करेंगे। जिला कलेक्टरों और पुलिस अधिकारियों को अवैध पटाखों की बिक्री, भंडारण और आपूर्ति रोकने के निर्देश दिए गए हैं।

दुकानों और गोदामों की जाँच के लिए विशेष टीमें गठित की जाएंगी। दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र से राजस्थान में प्रवेश करने वाले वाहनों की भी जाँच होगी। नियमों का उल्लंघन करने पर पटाखे जब्त कर पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम के तहत व्यक्तियों, व्यापारियों और निर्माताओं के विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी।

व्यापक संदर्भ: एनसीआर में बढ़ता प्रदूषण संकट

यह ऐसे समय में आया है जब दीपावली से पहले दिल्ली-एनसीआर में वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) खतरनाक स्तर तक पहुँचने की आशंका रहती है। गौरतलब है कि सर्वोच्च न्यायालय और केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) पहले भी एनसीआर जिलों में पटाखों पर प्रतिबंध संबंधी आदेश दे चुके हैं। राजस्थान की यह गाइडलाइन उसी नीतिगत दिशा में एक और कदम है।

राजस्थान सूचना एवं जनसंपर्क विभाग (डीआईपीआर) ने इन दिशा-निर्देशों को सार्वजनिक रूप से साझा किया है। अधिकारियों द्वारा प्रदूषण स्तर पर नियमित रिपोर्ट तैयार की जाएगी, जो नीति की जवाबदेही सुनिश्चित करेगी।

आगे क्या होगा

इन निर्देशों का असर जमीन पर कितना पड़ता है, यह प्रवर्तन की सक्रियता पर निर्भर करेगा। राज्य सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती अवैध पटाखों की तस्करी और गैर-अधिकृत बिक्री को रोकना होगी — खासकर दिल्ली-एनसीआर सीमा से लगे क्षेत्रों में। आने वाले दिनों में प्रदूषण निगरानी की रिपोर्टें यह तय करेंगी कि ये कदम पर्याप्त थे या नहीं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली परीक्षा प्रवर्तन की होगी — खासकर उन सीमावर्ती जिलों में जहाँ दिल्ली-एनसीआर से पटाखों की तस्करी की संभावना बनी रहती है। QR कोड प्रणाली एक नवाचारी कदम है, परंतु अगर अधिकृत दुकानों की संख्या सीमित रही और जाँच टीमें पर्याप्त नहीं हुईं, तो यह महज कागज़ी नियम बनकर रह सकता है। यह भी ध्यान देने योग्य है कि पिछले वर्षों में भी इसी तरह के आदेश आए थे, लेकिन जमीनी हकीकत अक्सर अलग रही — इस बार पारदर्शिता के लिए प्रदूषण निगरानी रिपोर्टों को सार्वजनिक करना ज़रूरी होगा।
RashtraPress
4 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

राजस्थान के किन जिलों में दीपावली पर पटाखों पर पाबंदी लगाई गई है?
एनसीआर में शामिल राजस्थान के 6 जिलों — अलवर, भरतपुर, दौसा, डीग, खैरथल-तिजारा और कोटपूतली-बहरोड़ — में ये नए नियम लागू होंगे। इन जिलों में केवल सीएसआईआर-एनईईआरआई प्रमाणित ग्रीन पटाखे ही जलाए जा सकेंगे।
दीपावली पर पटाखे जलाने का अनुमत समय क्या है?
7 और 8 नवंबर को केवल दो समय-सीमाओं में पटाखे जलाने की अनुमति होगी — सुबह 6 बजे से 7 बजे तक और रात 8 बजे से 10 बजे तक, यानी कुल मिलाकर 3 घंटे। इस समय के बाहर पटाखे जलाना प्रतिबंधित रहेगा।
ग्रीन पटाखों पर QR कोड क्यों अनिवार्य किया गया है?
QR कोड से उपभोक्ता निर्माता का नाम, प्रमाणन विवरण और लाइसेंस की जानकारी तुरंत जाँच सकते हैं। यह व्यवस्था बाज़ार में गैर-प्रमाणित पटाखों की बिक्री रोकने और आपूर्ति श्रृंखला में पारदर्शिता लाने के लिए लागू की गई है।
नियमों का उल्लंघन करने पर क्या होगा?
नियम तोड़ने पर पटाखे तुरंत जब्त कर लिए जाएंगे और पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम के तहत व्यक्तियों, व्यापारियों और निर्माताओं के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। अवैध पटाखों की जाँच के लिए विशेष टीमें बनाई जाएंगी और दिल्ली-एनसीआर से आने वाले वाहनों की भी जाँच होगी।
क्या अस्पतालों और स्कूलों के पास पटाखे जलाए जा सकते हैं?
नहीं। अस्पतालों, स्वास्थ्य केंद्रों और शिक्षण संस्थानों के 300 मीटर के दायरे में पटाखे जलाना पूरी तरह प्रतिबंधित है। यह प्रतिबंध निर्धारित समय-सीमा के दौरान भी लागू रहेगा।
राष्ट्र प्रेस
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