दिल्ली-एनसीआर में बिन QR कोड बिक रहे पटाखे, सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को दिया सख्त निर्देश
सारांश
मुख्य बातें
सर्वोच्च न्यायालय ने 3 नवंबर 2026 को दिल्ली-एनसीआर में प्रतिबंधित पटाखों की खुलेआम बिक्री पर गंभीर चिंता जताई, यह कहते हुए कि न्यायालय के आदेश के बावजूद बाज़ार में हर प्रकार के पटाखे धड़ल्ले से बिक रहे हैं और बड़ी संख्या में पटाखे बिना अनिवार्य QR कोड के उपलब्ध हैं। कोर्ट ने सरकार को इस उल्लंघन पर तत्काल ध्यान देने का निर्देश दिया।
कोर्ट की तत्काल आपत्ति
जस्टिस एम.एम. सुंदरेश ने मीडिया रिपोर्टों का हवाला देते हुए सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी से कहा कि बाज़ार में न केवल हर तरह के पटाखे मिल रहे हैं, बल्कि बिना QR कोड के पटाखे भी बेचे जा रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि कोर्ट के आदेश की अवहेलना हो रही है और सरकार को इस पर तत्काल कार्रवाई करनी चाहिए।
गौरतलब है कि कोर्ट ने 15 अक्टूबर 2025 के अपने आदेश में स्पष्ट किया था कि केवल CSIR-NEERI से प्रमाणित और PESO से वैध मंजूरी प्राप्त ग्रीन पटाखों का ही निर्माण एवं बिक्री की जा सकती है। इसके बावजूद बाज़ार में आदेश की अनुपालना होती नहीं दिख रही।
अनुमत समय-सीमा और नियम
सर्वोच्च न्यायालय ने दिल्ली-एनसीआर में केवल 7 और 8 नवंबर को प्रमाणित ग्रीन पटाखे जलाने की अनुमति दी है। इन दोनों दिनों पटाखे सुबह 6 से 7 बजे और रात 8 से 10 बजे तक ही जलाए जा सकेंगे। 9 नवंबर से पटाखों पर पूर्ण प्रतिबंध पुनः लागू हो जाएगा।
यह ऐसे समय में आया है जब 2 नवंबर को ही कोर्ट ने दीपावली पर सीमित पटाखों की अनुमति दी थी। अदालत ने पहले भी कई वर्षों में वायु गुणवत्ता को देखते हुए पटाखों पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया था।
'नो क्रैकर जोन' और संवेदनशील क्षेत्र
कोर्ट के आदेश के अनुसार अस्पतालों, नर्सिंग होम, प्राथमिक एवं जिला स्वास्थ्य केंद्रों, वृद्धाश्रमों और अधिसूचित साइलेंस जोन के 300 मीटर के दायरे में पटाखे जलाना पूरी तरह वर्जित है। इन क्षेत्रों को औपचारिक रूप से 'नो क्रैकर जोन' घोषित किया जाएगा।
संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि वे इन क्षेत्रों की ज़मीनी स्तर पर मार्किंग करें और यह जानकारी सार्वजनिक रूप से प्रकाशित करें, ताकि बीमार और बुज़ुर्ग नागरिकों को किसी भी प्रकार की परेशानी न हो।
निर्माण पर सख्त शर्तें
कोर्ट ने स्पष्ट किया था कि 2 से 6 नवंबर के बीच निर्माता केवल CSIR-NEERI की वेबसाइट पर अपलोड किए गए प्रमाणित ग्रीन पटाखों का ही उत्पादन कर सकेंगे। बिना PESO की मंजूरी और CSIR-NEERI प्रमाणन के किसी भी पटाखे का निर्माण, भंडारण या बिक्री अवैध मानी जाएगी।
न्यायालय ने यह भी रेखांकित किया कि दीपावली उत्सव और नागरिकों के स्वास्थ्य के बीच संतुलन बनाए रखना अनिवार्य है — त्योहार की खुशी महत्वपूर्ण है, लेकिन प्रदूषण से स्वास्थ्य को होने वाला नुकसान नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता।
आगे क्या होगा
सर्वोच्च न्यायालय के स्पष्ट निर्देश के बाद अब सरकार और संबंधित प्रवर्तन एजेंसियों पर यह दबाव है कि वे बाज़ार में अवैध पटाखों की बिक्री रोकने के लिए तत्काल कार्रवाई करें। यदि आदेश की अवहेलना जारी रही, तो कोर्ट आगामी सुनवाई में और कड़े कदम उठा सकता है।