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आंध्र स्कूल चेन सॉ हमले पर RGV बोले: 'हिंसा के लिए फिल्मों को दोष देना गलत'

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आंध्र स्कूल चेन सॉ हमले पर RGV बोले: 'हिंसा के लिए फिल्मों को दोष देना गलत'

सारांश

आंध्र प्रदेश के रापताडु में एक स्कूल के भीतर हुए चेन सॉ हमले ने 'एनिमल' और संदीप रेड्डी वांगा पर बहस फिर छेड़ दी। RGV ने एक्स पर साफ कहा — फिल्मों को दोष देना गलत है। लेकिन सवाल यह है कि परदे पर हिंसा के महिमामंडन की सामाजिक कीमत कौन चुकाता है?

मुख्य बातें

राम गोपाल वर्मा ने 1 नवंबर 2026 को एक्स पर लिखा — 'हिंसा के लिए फिल्मों को दोष देना गलत है।' आंध्र प्रदेश के अनंतपुर जिले के रापताडु स्थित स्कूल में 21 वर्षीय हेमंत ने 15 वर्षीय छात्रा पर चेन सॉ से हमला किया।
पीड़िता का बेंगलुरु के मणिपाल अस्पताल में इलाज जारी, हालत स्थिर; बचाव में घायल हुई छात्रा लक्ष्मी भी उपचाराधीन।
आरोपी को धर्मावरम में हिरासत में लिया गया; पुलिस के अनुसार वह लंबे समय से पीड़िता का पीछा कर रहा था।
सोशल मीडिया पर संदीप रेड्डी वांगा की फिल्म 'एनिमल' के एक क्लासरूम दृश्य को लेकर तीखी आलोचना हुई।
RGV, संदीप रेड्डी वांगा के मुखर समर्थक हैं; संदीप खुद आरजीवी को अपना आदर्श मानते हैं।

फिल्म निर्माता राम गोपाल वर्मा (RGV) ने रविवार, 1 नवंबर 2026 को अपने एक्स (पूर्व में ट्विटर) अकाउंट पर एक पोस्ट के ज़रिए उस बहस में हस्तक्षेप किया, जो आंध्र प्रदेश के अनंतपुर जिले के रापताडु में एक स्कूल के भीतर हुए चेन सॉ हमले के बाद भड़की है। वर्मा ने लिखा कि हिंसक फिल्मों को वास्तविक जीवन की हिंसा के लिए ज़िम्मेदार ठहराना गलत है।

रापताडु में क्या हुआ

हेमंत नाम के एक 21 वर्षीय युवक ने अनंतपुर जिले के रापताडु स्थित एक स्कूल में 10वीं कक्षा के क्लासरूम में घुसकर 15 वर्षीय एक छात्रा पर चेन सॉ से हमला कर दिया। पुलिस की प्रारंभिक जाँच के अनुसार, आरोपी काफी समय से पीड़िता का पीछा कर रहा था और जब उसने उसके प्रस्तावों को ठुकरा दिया, तो उसने यह कदम उठाया।

हमले के दौरान अपनी सहपाठी को बचाने की कोशिश में लक्ष्मी नाम की एक अन्य छात्रा भी घायल हो गई। पीड़िता का बेंगलुरु के मणिपाल अस्पताल में उपचार जारी है और उसकी हालत फिलहाल स्थिर बताई जा रही है। आरोपी को धर्मावरम में हिरासत में ले लिया गया है।

RGV की एक्स पर प्रतिक्रिया

इस घटना के बाद सोशल मीडिया पर फिल्म निर्माता संदीप रेड्डी वांगा की फिल्म 'एनिमल' — जिसमें रणबीर कपूर मुख्य भूमिका में हैं — का एक दृश्य चर्चा में आ गया, जिसमें अभिनेता एक लोडेड बंदूक लेकर स्कूल के क्लासरूम में प्रवेश करता है।

इस पृष्ठभूमि में राम गोपाल वर्मा ने अपने एक्स अकाउंट पर लिखा: "हिंसा बढ़ने के लिए फिल्मों को दोष देना, ठीक वैसा ही है जैसे अपहरण की घटनाओं के बढ़ने के लिए रामायण को दोष देना।" गौरतलब है कि आरजीवी, संदीप रेड्डी वांगा के मुखर समर्थक रहे हैं और सार्वजनिक रूप से उनकी फिल्म निर्माण शैली की तारीफ करते रहे हैं। संदीप खुद आरजीवी को अपना आदर्श मानते हैं।

सोशल मीडिया पर आलोचना

एक्स पर कई उपयोगकर्ताओं ने 'एनिमल' और उसके निर्देशक की तीखी आलोचना की। एक उपयोगकर्ता ने लिखा: "संदीप रेड्डी वांगा की फिल्म 'एनिमल' में एक दृश्य है, जिसमें रणबीर कपूर AK 47 लेकर क्लासरूम में घुसते हैं। ऐसी फिल्मों का नतीजा यही होता है।"

एक अन्य उपयोगकर्ता ने आरोप लगाया: "जब ध्रुव राठी ने आदित्य धर और संदीप रेड्डी वांगा पर 'धुरंधर' जैसी फिल्मों के ज़रिए हिंसा और प्रोपेगेंडा को बढ़ावा देने का आरोप लगाया था, तो कुछ लोगों ने उन्हें निशाना बनाया था। और अब हम देख रहे हैं कि नफरत को सामान्य मानने और हिंसा को महिमामंडित करने के क्या नतीजे होते हैं।"

तीसरे उपयोगकर्ता ने लिखा: "स्क्रीन पर अत्यधिक हिंसा को 'मर्दाना' या 'अल्फा' व्यवहार के रूप में पेश करना हमारी बुनियादी मानवीय संवेदनाओं को खत्म कर रहा है।"

विशेषज्ञ क्या कहते हैं

मनोरंजन उद्योग और मीडिया विशेषज्ञों के बीच यह बहस नई नहीं है। आलोचकों का कहना है कि परदे पर हिंसा को रोमांटिक या 'पुरुषोचित' रूप में दिखाना सामाजिक व्यवहार को प्रभावित कर सकता है, जबकि फिल्मकारों का तर्क है कि दर्शक और निर्माता के बीच एक स्पष्ट रेखा होती है। यह ऐसे समय में आया है जब भारत में 'स्टॉकिंग' और महिलाओं के प्रति हिंसा से जुड़े मामलों पर सार्वजनिक बहस तेज़ हो रही है।

आगे क्या

पुलिस मामले की विस्तृत जाँच कर रही है। पीड़िता की स्थिति स्थिर है और आरोपी हिरासत में है। इस घटना ने स्कूल परिसरों में सुरक्षा व्यवस्था और फिल्मी कंटेंट की सामाजिक ज़िम्मेदारी पर एक बार फिर बहस को हवा दी है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि यह है कि परदे पर स्त्री विरोधी जुनून को 'मर्दानगी' और 'प्रेम' के रूप में रोमांटिक बनाना किस तरह की सामाजिक भाषा गढ़ता है। भारत में 'स्टॉकिंग' से जुड़े अपराधों के आँकड़े चिंताजनक हैं, और यह पूछना वैध है कि मुख्यधारा का सिनेमा इस मानसिकता को सामान्य बनाने में कितनी भूमिका निभाता है। मनोरंजन उद्योग की जवाबदेही की यह बहस केवल एक फिल्म तक सीमित नहीं — यह उस व्यापक सांस्कृतिक विमर्श का हिस्सा है जिसे भारतीय सिनेमा अभी तक गंभीरता से नहीं ले रहा।
RashtraPress
1 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

रापताडु स्कूल चेन सॉ हमला क्या है?
आंध्र प्रदेश के अनंतपुर जिले के रापताडु में 21 वर्षीय हेमंत ने एक स्कूल की 10वीं कक्षा में घुसकर 15 वर्षीय छात्रा पर चेन सॉ से हमला किया। पुलिस के अनुसार आरोपी लंबे समय से पीड़िता का पीछा कर रहा था और उसके प्रस्ताव ठुकराए जाने पर उसने यह कदम उठाया।
राम गोपाल वर्मा ने इस हमले पर क्या कहा?
RGV ने एक्स पर लिखा कि 'हिंसा बढ़ने के लिए फिल्मों को दोष देना, ठीक वैसा ही है जैसे अपहरण की घटनाओं के बढ़ने के लिए रामायण को दोष देना।' उनका कहना है कि हिंसक कंटेंट वाली फिल्मों के प्रति गुस्सा अक्सर गलत दिशा में होता है।
इस हमले के बाद 'एनिमल' फिल्म विवाद में क्यों आई?
फिल्म 'एनिमल' में एक दृश्य है जिसमें रणबीर कपूर बंदूक लेकर स्कूल के क्लासरूम में प्रवेश करते हैं। रापताडु हमले के बाद सोशल मीडिया पर इस दृश्य को लेकर निर्देशक संदीप रेड्डी वांगा की आलोचना हुई और यह बहस छिड़ी कि सिनेमा में हिंसा के महिमामंडन का समाज पर क्या प्रभाव पड़ता है।
आरोपी हेमंत को कहाँ से पकड़ा गया और पीड़िता की हालत कैसी है?
आरोपी हेमंत को धर्मावरम में हिरासत में लिया गया है। पीड़िता का बेंगलुरु के मणिपाल अस्पताल में उपचार जारी है और उसकी हालत स्थिर बताई जा रही है।
क्या भारत में फिल्मी हिंसा और वास्तविक अपराध के बीच संबंध पर बहस पहले भी हुई है?
हाँ, यह बहस नई नहीं है। आलोचकों का कहना है कि परदे पर स्त्री विरोधी जुनून और हिंसा को रोमांटिक रूप में दिखाना सामाजिक व्यवहार को प्रभावित करता है, जबकि फिल्मकार तर्क देते हैं कि कला और वास्तविकता के बीच एक स्पष्ट रेखा होती है। 'एनिमल' की रिलीज़ के समय भी इसी मुद्दे पर व्यापक बहस हुई थी।
राष्ट्र प्रेस
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