भारत 500 गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा लक्ष्य पर सही राह पर: स्वीडन राजदूत, 61% स्वीडिश कंपनियाँ भारत में निवेश बढ़ाएंगी
सारांश
मुख्य बातें
भारत में स्वीडन की राजदूत पेट्रा मेनेंडर ने 4 नवंबर 2026 को कहा कि भारत 2030 तक 500 गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता हासिल करने के लक्ष्य की दिशा में मजबूती से आगे बढ़ रहा है और सौर ऊर्जा सहित अन्य स्वच्छ ऊर्जा स्रोतों में उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की जा रही है। उन्होंने यह भी बताया कि हालिया सर्वेक्षणों के अनुसार 61 प्रतिशत स्वीडिश कंपनियाँ अगले एक वर्ष में भारत में अपना निवेश बढ़ाने की योजना बना रही हैं।
स्वीडन की भारत में निवेश रुचि
मेनेंडर ने कहा कि यह आँकड़ा भारत की आर्थिक संभावनाओं और निवेश माहौल में बढ़ते विश्वास को दर्शाता है। हालाँकि उन्होंने किसी विशेष क्षेत्र का उल्लेख नहीं किया, लेकिन उन्होंने संकेत दिया कि स्वच्छ ऊर्जा, प्रौद्योगिकी और नवाचार जैसे क्षेत्रों में सहयोग की व्यापक संभावनाएँ मौजूद हैं। स्वीडन तकनीक, नवाचार और निवेश के माध्यम से भारत के साथ साझेदारी और गहरी करने का इरादा रखता है।
इंटरनेशनल सोलर अलायंस में भारत की भूमिका
मेनेंडर ने इंटरनेशनल सोलर अलायंस (ISA) के ज़रिये सौर ऊर्जा को वैश्विक स्तर पर बढ़ावा देने में भारत की भूमिका की सराहना की। उन्होंने कहा, "भारत केवल अपने लिए ही नहीं, बल्कि अन्य देशों को भी सौर ऊर्जा उत्पादन बढ़ाने में सहायता कर रहा है, जो वैश्विक ऊर्जा परिवर्तन के लिए महत्वपूर्ण कदम है।" यह ऐसे समय में आया है जब भारत वैश्विक जलवायु कूटनीति में अपनी स्थिति मज़बूत कर रहा है।
जॉर्डन के राजदूत ने भी ऊर्जा सहयोग पर जताई उम्मीद
भारत में जॉर्डन के राजदूत यूसुफ अब्दुल गनी ने बताया कि जॉर्डन हाल ही में इंटरनेशनल सोलर अलायंस में शामिल हुआ है। उन्होंने कहा, "प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हालिया जॉर्डन यात्रा के दौरान हमने नवीकरणीय और हरित ऊर्जा के क्षेत्र में तकनीकी सहयोग के लिए एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं।" उन्होंने बताया कि जॉर्डन में साल में 300 से अधिक दिन धूप रहती है, जिससे भारतीय निवेशकों के लिए सौर ऊर्जा उत्पादन के बेहतरीन अवसर बनते हैं।
ग्रीन हाइड्रोजन और दीर्घकालिक ऊर्जा योजना
मेनेंडर ने ग्रीन हाइड्रोजन को एक उभरती हुई तकनीक बताया, जिसके व्यापक उपयोग के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग अनिवार्य है। उन्होंने बताया कि स्वीडन पहले ही स्टील उत्पादन जैसे क्षेत्रों में ग्रीन हाइड्रोजन तकनीक का उपयोग कर रहा है। उनके अनुसार, भारत और स्वीडन के बीच पिछले चार दशकों से चल रही रिसर्च और इनोवेशन पार्टनरशिप के तहत इन उभरती प्रौद्योगिकियों पर सहयोग जारी है।
ग्रिड स्थिरता और आगे की राह
मेनेंडर ने ज़ोर देते हुए कहा कि केवल उत्पादन क्षमता बढ़ाना पर्याप्त नहीं है — यह सुनिश्चित करना भी ज़रूरी है कि नवीकरणीय ऊर्जा स्थिर और भरोसेमंद तरीके से उपभोक्ताओं तक पहुँचे। उन्होंने कहा कि दीर्घकालिक योजना और ग्रिड स्थिरता किसी भी ऊर्जा परिवर्तन की सफलता की बुनियाद हैं। गौरतलब है कि भारत का 500 GW लक्ष्य महत्वाकांक्षी ज़रूर है, लेकिन राजदूत के अनुसार भारत सही दिशा में आगे बढ़ रहा है और अंतरराष्ट्रीय साझेदारी इस यात्रा को और गति दे सकती है।