शेखपुरा पुलिस लाइन का एडीजी अमित लोढ़ा और डीआईजी राकेश कुमार ने किया औचक निरीक्षण, डायल 112 समेत कानून-व्यवस्था की समीक्षा
सारांश
मुख्य बातें
अपर महानिदेशक (एडीजी) अमित लोढ़ा और पुलिस उपमहानिरीक्षक (डीआईजी) राकेश कुमार ने सोमवार, 8 जून को शेखपुरा जिले में नवनिर्मित पुलिस लाइन का औचक निरीक्षण किया। इस दौरान दोनों वरिष्ठ अधिकारियों ने कानून-व्यवस्था, अपराध नियंत्रण की कार्यप्रणाली और डायल 112 आपातकालीन सेवा की व्यापक समीक्षा की।
निरीक्षण का उद्देश्य और पृष्ठभूमि
एडीजी अमित लोढ़ा ने बताया कि राज्य में सभी वरिष्ठ पुलिस पदाधिकारियों — जैसे आईजी और अतिरिक्त डीजी — को निर्दिष्ट जिलों का दायित्व सौंपा गया है। इसका उद्देश्य यह है कि वे संबंधित जिलों के पुलिस अधीक्षक (एसपी) और उनकी टीम को सीधे निर्देश दे सकें तथा पुलिसिंग की गुणवत्ता पर निगरानी रख सकें। इसी क्रम में उन्होंने शेखपुरा का दौरा किया।
पुलिसकर्मियों से संवाद और सुझाव
निरीक्षण के दौरान एडीजी लोढ़ा ने पुलिस लाइन में तैनात जवानों और अधिकारियों से सीधी बातचीत की। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस भेंट का एक प्रमुख उद्देश्य पुलिसकर्मियों की व्यक्तिगत समस्याएँ सुनना और उनके सुझाव लेना भी है, ताकि जमीनी स्तर पर सेवा की गुणवत्ता सुधारी जा सके।
डायल 112 सेवा की समीक्षा
एडीजी ने डायल 112 आपातकालीन सेवा को पुलिस-जन समन्वय का सबसे प्रभावी माध्यम बताया। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री के निर्देश पर लगातार यह प्रयास किया जा रहा है कि आगामी 6 महीनों में डायल 112 का रिस्पॉन्स टाइम घटाकर मात्र 6 से 7 मिनट तक लाया जाए। इसके अतिरिक्त वायरलेस संचार व्यवस्था और अन्य विभागों द्वारा संचालित आपातकालीन सेवाओं की गुणवत्ता पर भी ध्यान दिया जाएगा।
अपराध नियंत्रण पर जोर
एडीजी लोढ़ा ने कहा कि बिहार पुलिस अपराध नियंत्रण के प्रति हमेशा प्रतिबद्ध रही है और राज्य के सभी जिलों के एसपी इस दिशा में उल्लेखनीय कार्य कर रहे हैं। शेखपुरा में अपराध नियंत्रण के लिए एसपी और डीआईजी की कार्यप्रणाली की भी समीक्षा इस निरीक्षण का हिस्सा रही। गौरतलब है कि यह औचक दौरा बिहार पुलिस की उस व्यापक पहल का हिस्सा है, जिसके तहत वरिष्ठ अधिकारी नियमित रूप से जिलों का दौरा कर जमीनी हकीकत का जायजा लेते हैं।
आगे की दिशा
वरिष्ठ अधिकारियों को जिलों का दायित्व सौंपने की यह प्रणाली पुलिस-जन संबंधों को मजबूत करने और सार्वजनिक सेवा को अधिक जवाबदेह बनाने की दिशा में एक संरचनात्मक कदम है। डायल 112 के रिस्पॉन्स टाइम में सुधार का लक्ष्य अगले छह महीनों में परखा जाएगा।