19 अगस्त 2026
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बिहार के सभी जिलों में जिला दंगा निरोधी दस्ता गठित होगा, 20 मिनट में घटनास्थल पहुंचने का लक्ष्य

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बिहार के सभी जिलों में जिला दंगा निरोधी दस्ता गठित होगा, 20 मिनट में घटनास्थल पहुंचने का लक्ष्य

सारांश

बिहार पुलिस मुख्यालय ने राज्य के सभी जिलों में जिला दंगा निरोधी दस्ता गठित करने की योजना जारी की है — 49 कंपनियाँ, 294 वाहन और 20 मिनट की प्रतिक्रिया समयसीमा। यह बिहार की कानून-व्यवस्था को एक नई संरचनात्मक मजबूती देने का प्रयास है।

मुख्य बातें

बिहार पुलिस मुख्यालय ने 19 अगस्त 2026 को सभी जिलों में जिला दंगा निरोधी दस्ता गठित करने की विस्तृत कार्ययोजना जारी की।
राज्यभर में कुल 49 कंपनियाँ गठित होंगी और 294 वाहन उपलब्ध कराए जाएंगे।
प्रत्येक प्लाटून में 47 कर्मी और 2 वाहन ; अलर्ट मिलने के 20 मिनट के भीतर घटनास्थल के लिए रवानगी का लक्ष्य।
जिलों को तीन श्रेणियों (A, B, C) में बाँटकर बल की तैनाती; पटना को सर्वाधिक 3 कंपनियाँ और 18 वाहन ।
प्रशिक्षकों को रैपिड एक्शन फोर्स अकादमी, मेरठ में प्रशिक्षण; हर 3 महीने पर एक सप्ताह का रिफ्रेशर कोर्स।
निगरानी पुलिस महानिरीक्षक और पुलिस उपमहानिरीक्षक स्तर पर।

बिहार पुलिस मुख्यालय ने 19 अगस्त 2026 को राज्य के सभी जिलों में जिला दंगा निरोधी दस्ता गठित करने की विस्तृत कार्ययोजना जारी की है। इसका उद्देश्य दंगा, हिंसक प्रदर्शन, सामुदायिक तनाव, सड़क जाम और सरकारी संपत्ति पर हमले जैसी आकस्मिक स्थितियों में 20 मिनट के भीतर घटनास्थल पर बल पहुँचाना है। यह पहल बिहार में कानून-व्यवस्था की त्वरित प्रतिक्रिया क्षमता को नई संरचना देने का प्रयास है।

दस्ते की संरचना और बल-तैनाती

पुलिस मुख्यालय के अनुसार, प्रत्येक जिले एवं अनुमंडल स्तर पर दंगा नियंत्रण इकाई गठित की जाएगी। प्रत्येक कंपनी में तीन प्लाटून होंगी और हर प्लाटून में अश्रु गैस दस्ता, लाठी दस्ता, सशस्त्र बल, चालक और वायरलेस ऑपरेटर सहित कुल 47 कर्मी तैनात रहेंगे। प्रत्येक प्लाटून के साथ दो वाहन उपलब्ध कराए जाएंगे। राज्यभर में कुल 49 कंपनियाँ गठित होंगी और इनके लिए 294 वाहन उपलब्ध कराने की योजना है।

दस्तों में प्रभारी पदाधिकारी, प्रशिक्षित पुलिस पदाधिकारी एवं कर्मी, प्रशिक्षित महिला पुलिसकर्मी, चिकित्सा एवं एंबुलेंस सहायता दल, वीडियोग्राफी एवं दस्तावेजीकरण के लिए नामित कर्मी तथा संचार एवं रिजर्व बल शामिल होंगे।

जिलों की तीन श्रेणियों में तैनाती

बल की तैनाती जिलों को तीन श्रेणियों में बाँटकर की जाएगी। श्रेणी 'ए' में पटना को तीन कंपनियाँ और 18 वाहन मिलेंगे, जबकि गया, रोहतास, मुजफ्फरपुर, सारण, मोतिहारी, बेतिया, दरभंगा, मधुबनी, समस्तीपुर, भागलपुर और बेगूसराय को दो-दो कंपनियाँ एवं 12-12 वाहन दिए जाएंगे।

श्रेणी 'बी' में नालंदा, औरंगाबाद, नवादा, जहानाबाद, भोजपुर, बक्सर, कैमूर, वैशाली, सीतामढ़ी, सिवान, गोपालगंज, सहरसा, सुपौल, मधेपुरा, पूर्णिया, कटिहार, अररिया, किशनगंज, बांका, मुंगेर, जमुई और खगड़िया को एक-एक कंपनी और छह-छह वाहन उपलब्ध कराए जाएंगे। श्रेणी 'सी' में अरवल, शिवहर, बगहा, लखीसराय, शेखपुरा और नवगछिया को एक-एक प्लाटून तथा दो-दो वाहन दिए जाएंगे।

त्वरित प्रतिक्रिया की कार्यप्रणाली

पुलिस मुख्यालय के अनुसार, किसी जिले में दंगा या हिंसक स्थिति की सूचना मिलते ही जिला नियंत्रण कक्ष तत्काल अलर्ट जारी करेगा। इसके बाद दंगा निरोधी दस्ता 20 मिनट के भीतर निर्धारित स्थान के लिए रवाना होगा। घटनास्थल पर पहुँचकर टीम वरिष्ठ पुलिस पदाधिकारी के साथ समन्वय स्थापित करेगी, स्थिति का निरंतर आकलन करेगी और नियमानुकूल कार्रवाई सुनिश्चित करेगी।

विशेष प्रशिक्षण की व्यवस्था

प्रत्येक जिले के पुलिस केंद्र में एक माह का विशेष प्रशिक्षण आयोजित किया जाएगा। पुलिस निरीक्षक, सार्जेंट मेजर और पुलिस उपाधीक्षक स्तर के चयनित प्रशिक्षकों को रैपिड एक्शन फोर्स अकादमी फॉर पब्लिक ऑर्डर, मेरठ में प्रशिक्षण दिलाया जाएगा। इसके बाद वे अपने-अपने जिलों में दंगा निरोधी बल के पदाधिकारियों और जवानों को प्रशिक्षित करेंगे। इसके अतिरिक्त प्रत्येक तीन महीने में हर प्लाटून के लिए एक सप्ताह का रिफ्रेशर कोर्स भी आयोजित होगा।

निगरानी और जवाबदेही

पुलिस मुख्यालय ने स्पष्ट किया है कि दंगा निरोधी बल की तैनाती, प्रशिक्षण, उपकरण और आवास सहित समस्त व्यवस्थाओं की निगरानी वरिष्ठ पुलिस अधिकारी करेंगे। क्षेत्रीय स्तर पर पुलिस महानिरीक्षक और पुलिस उपमहानिरीक्षक भी इसकी समीक्षा करेंगे। यह व्यवस्था बिहार में हिंसक घटनाओं पर त्वरित नियंत्रण स्थापित करने की दिशा में एक संरचनात्मक कदम है।

संपादकीय दृष्टिकोण

निर्धारित प्रतिक्रिया समय और मेरठ की विशेष अकादमी से प्रशिक्षण — लेकिन असली परीक्षा क्रियान्वयन की होगी। गौरतलब है कि बिहार में सांप्रदायिक तनाव के इतिहास को देखते हुए ऐसे दस्तों की आवश्यकता लंबे समय से महसूस की जा रही थी। सवाल यह है कि 294 वाहनों की खरीद, प्रशिक्षण चक्र और वास्तविक तैनाती की समयसीमा क्या होगी — और क्या जवाबदेही का कोई सार्वजनिक मापन ढाँचा भी बनेगा। बिना पारदर्शी समीक्षा तंत्र के, यह योजना कागज पर मजबूत और ज़मीन पर अधूरी रह सकती है।
RashtraPress
19 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बिहार जिला दंगा निरोधी दस्ता क्या है?
यह बिहार पुलिस मुख्यालय द्वारा राज्य के सभी जिलों में गठित की जाने वाली विशेष इकाई है, जो दंगा, हिंसक प्रदर्शन, सामुदायिक तनाव और सरकारी संपत्ति पर हमले जैसी स्थितियों से निपटने के लिए 20 मिनट के भीतर घटनास्थल पर पहुँचेगी। 19 अगस्त 2026 को इसकी विस्तृत कार्ययोजना जारी की गई।
बिहार में कुल कितनी दंगा निरोधी कंपनियाँ और वाहन होंगे?
राज्यभर में कुल 49 कंपनियाँ गठित की जाएंगी और इनके लिए 294 वाहन उपलब्ध कराने की योजना है। प्रत्येक कंपनी में तीन प्लाटून होंगी और हर प्लाटून में 47 कर्मी तथा 2 वाहन रहेंगे।
जिलों को किस आधार पर श्रेणियों में बाँटा गया है?
जिलों को तीन श्रेणियों — A, B और C — में बाँटा गया है। श्रेणी A में पटना (3 कंपनियाँ, 18 वाहन) और 11 अन्य बड़े जिले (2-2 कंपनियाँ, 12-12 वाहन) हैं। श्रेणी B के 22 जिलों को एक-एक कंपनी और 6-6 वाहन, जबकि श्रेणी C के 6 जिलों को एक-एक प्लाटून और 2-2 वाहन मिलेंगे।
दंगा निरोधी दस्ते को प्रशिक्षण कैसे और कहाँ दिया जाएगा?
प्रत्येक जिले में एक माह का विशेष प्रशिक्षण होगा। चयनित प्रशिक्षकों को पहले रैपिड एक्शन फोर्स अकादमी फॉर पब्लिक ऑर्डर, मेरठ में प्रशिक्षित किया जाएगा, जो बाद में अपने जिलों में जवानों को प्रशिक्षण देंगे। इसके अलावा हर तीन महीने में एक सप्ताह का रिफ्रेशर कोर्स भी होगा।
इस व्यवस्था की निगरानी कौन करेगा?
दंगा निरोधी बल की तैनाती, प्रशिक्षण, उपकरण और आवास की निगरानी वरिष्ठ पुलिस अधिकारी करेंगे। क्षेत्रीय स्तर पर पुलिस महानिरीक्षक और पुलिस उपमहानिरीक्षक भी इसकी समीक्षा के लिए जिम्मेदार होंगे।
राष्ट्र प्रेस
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