मुहर्रम 2026: गुजरात के 919 संवेदनशील इलाकों में सुरक्षा कड़ी, DGP मलिक ने की समीक्षा बैठक
सारांश
मुख्य बातें
गुजरात पुलिस ने मुहर्रम के जुलूसों और ताजिया रूट को देखते हुए राज्यभर के 919 चिह्नित संवेदनशील स्थानों पर सुरक्षा व्यवस्था को कड़ा कर दिया है। पुलिस महानिदेशक (DGP) जी.एस. मलिक की अध्यक्षता में मंगलवार, 23 जून 2026 को गांधीनगर स्थित पुलिस भवन में एक वीडियो कॉन्फ्रेंस आयोजित की गई, जिसमें कानून-व्यवस्था की तैयारियों की व्यापक समीक्षा की गई। अधिकारियों के अनुसार इन इंतजामों का उद्देश्य त्योहार के दौरान शांति और सांप्रदायिक सद्भाव बनाए रखना है।
समीक्षा बैठक में क्या हुआ
वीडियो कॉन्फ्रेंस में राज्य के सभी पुलिस कमिश्नर, रेंज प्रमुख और जिला पुलिस अधीक्षक (SP) वर्चुअल माध्यम से शामिल हुए। DGP मलिक ने सभी शहर, जिला, रेंज और यूनिट प्रमुखों को अधिकतम तकनीकी संसाधनों का उपयोग करते हुए व्यापक सुरक्षा योजनाएँ तैयार करने के निर्देश दिए। बैठक में जुलूस मार्गों और सार्वजनिक एकत्रीकरण स्थलों पर समन्वित बंदोबस्त सुनिश्चित करने पर विशेष जोर दिया गया।
जोखिम आकलन और तैनाती की रणनीति
पुलिस इकाइयों को उन इलाकों में विशेष जोखिम आकलन (रिस्क असेसमेंट) करने का निर्देश दिया गया है, जहाँ पिछले पाँच वर्षों में मुहर्रम के दौरान कोई अप्रिय घटना हुई थी। इसके आधार पर निवारक पुलिसिंग उपाय और मजबूत किए जाएंगे। पूरे राज्य में राज्य आरक्षित पुलिस बल (SRPF) की अतिरिक्त कंपनियाँ और प्लाटून तैनात की गई हैं। संवेदनशील क्षेत्रों में 8 से 10 पुलिसकर्मियों की टीमें सघन पैदल गश्त के लिए उतारी गई हैं। फील्ड कर्मियों को तैनाती से पहले ऑपरेशनल जिम्मेदारियों, स्थानीय संवेदनशीलता और आपातकालीन प्रतिक्रिया प्रोटोकॉल की जानकारी दी जा रही है।
तकनीकी निगरानी का विस्तार
इस बार सुरक्षा व्यवस्था में तकनीकी निगरानी को विशेष प्राथमिकता दी गई है। बड़ी भीड़ और जुलूस मार्गों की निगरानी के लिए ड्रोन, सीसीटीवी कैमरे और बॉडी-वर्न कैमरे तैनात किए गए हैं। ड्यूटी पर मौजूद सभी पुलिसकर्मियों को बॉडी-वर्न कैमरे पहनना अनिवार्य किया गया है, जिससे जवाबदेही और रियल-टाइम रिकॉर्डिंग सुनिश्चित हो सके। इसके अतिरिक्त, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म की लगातार निगरानी के भी आदेश दिए गए हैं ताकि अफवाहें, भ्रामक सूचनाएँ या सांप्रदायिक सद्भाव को नुकसान पहुँचाने वाली सामग्री फैलाने वाले व्यक्तियों या समूहों की पहचान कर उनके विरुद्ध कानूनी कार्रवाई की जा सके।
यातायात और भीड़ प्रबंधन
जुलूस के दौरान आम नागरिकों की आवाजाही में न्यूनतम व्यवधान हो, इसके लिए यातायात नियमन और भीड़ प्रबंधन की विशेष योजनाएँ तैयार की गई हैं। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि संवेदनशील इलाकों में पुलिस की दृश्यमान मौजूदगी का उद्देश्य नागरिकों का विश्वास बढ़ाना और किसी भी संभावित गड़बड़ी को पहले ही रोकना है। फील्ड इकाइयों और केंद्रीय नियंत्रण प्रणाली के बीच रियल-टाइम समन्वय सुनिश्चित किया जाएगा। मुहर्रम के आयोजनों के समापन तक यह सुरक्षा ढाँचा पूरी तरह सक्रिय रहेगा।