नीट-यूजी 2026: MP पुलिस की बहु-स्तरीय सुरक्षा योजना, DGP मकवाना ने दिए कड़े निर्देश
सारांश
Key Takeaways
- 3 मई 2026 को मध्य प्रदेश के 30 शहरों में नीट-यूजी परीक्षा आयोजित होगी।
- 1.18 लाख उम्मीदवार राज्य के 283 परीक्षा केंद्रों पर परीक्षा देंगे, सर्वाधिक केंद्र इंदौर में हैं।
- DGP कैलाश मकवाना ने जीरो-टॉलरेंस नीति और भौतिक निरीक्षण के कड़े निर्देश दिए।
- 38 साइबर कमांडो डिजिटल प्लेटफॉर्म पर निगरानी रखेंगे और सोशल मीडिया अफवाहों पर कार्रवाई करेंगे।
- प्रश्न पत्र परिवहन के दौरान पुलिस एस्कॉर्ट और डैशकैम ट्रैकिंग अनिवार्य की गई है।
- 2024 नीट पेपर लीक विवाद से सबक लेते हुए सभी केंद्रों पर अनिवार्य सीसीटीवी कवरेज लागू की गई है।
भोपाल, 25 अप्रैल — मध्य प्रदेश में 3 मई 2026 को आयोजित होने वाली नीट-यूजी परीक्षा को लेकर राज्य पुलिस ने व्यापक बहु-स्तरीय सुरक्षा योजना तैयार की है। पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) कैलाश मकवाना ने शनिवार को सभी जिलों के पुलिस अधीक्षकों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए राज्य-स्तरीय समीक्षा बैठक की और परीक्षा के शांतिपूर्ण, निष्पक्ष एवं सुरक्षित संचालन के लिए कड़े निर्देश जारी किए।
डीजीपी मकवाना के प्रमुख निर्देश
डीजीपी कैलाश मकवाना ने स्पष्ट कहा कि नीट-यूजी लाखों छात्रों के भविष्य से जुड़ी अत्यंत संवेदनशील परीक्षा है, इसलिए हर प्रक्रिया त्रुटि-रहित, पारदर्शी और सुरक्षित होनी चाहिए। उन्होंने किसी भी चूक के प्रति 'जीरो-टॉलरेंस' नीति अपनाने का आदेश दिया।
उन्होंने निर्देश दिया कि परीक्षा से पूर्व सभी परीक्षा केंद्रों, स्ट्रॉन्ग रूम और परीक्षा कक्षों का भौतिक निरीक्षण अनिवार्य रूप से किया जाए और सुरक्षा व्यवस्था को और सुदृढ़ किया जाए। परीक्षार्थियों की जांच के लिए हैंडहेल्ड मेटल डिटेक्टर (एचएचएमडी) और पर्याप्त संख्या में पुलिसकर्मियों की तैनाती अनिवार्य की गई है।
प्रश्न पत्र परिवहन और निगरानी व्यवस्था
डीजीपी ने प्रश्न पत्रों की आवाजाही पर कड़ी निगरानी रखने पर विशेष जोर दिया। बैंकों, डाकघरों, स्ट्रॉन्ग रूम और परीक्षा केंद्रों के बीच परिवहन के दौरान पुलिस एस्कॉर्ट और डैशकैम के जरिए वाहनों की ट्रैकिंग सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए।
परीक्षा समाप्त होने के बाद ओएमआर शीट और अन्य परीक्षा सामग्री के सुरक्षित वापसी तक लगातार निगरानी रखी जाएगी। चंबल क्षेत्र और सीमावर्ती जिलों जैसे संवेदनशील इलाकों में पेपर लीक और संगठित नकल की आशंका को देखते हुए अतिरिक्त सतर्कता बरतने का आदेश दिया गया है।
साइबर निगरानी और डिजिटल सुरक्षा
सोशल मीडिया पर फैलने वाली अफवाहों और गलत सूचनाओं पर तत्काल कार्रवाई के लिए 38 प्रशिक्षित साइबर कमांडो और साइबर सेल तैनात किए जाएंगे। ये दल डिजिटल प्लेटफॉर्म पर संदिग्ध गतिविधियों की पहचान कर उन पर कार्रवाई करेंगे।
पेपर लीक, इंपर्सनेशन (किसी और की जगह परीक्षा देना) या संगठित नकल में संलिप्त पाए जाने वाले किसी भी व्यक्ति के खिलाफ एफआईआर सहित कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
परीक्षा का विस्तार और 2024 की घटनाओं से सबक
अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक ए. साई मनोहर ने बताया कि 2024 में नीट पेपर लीक विवाद से सीख लेते हुए इस बार सुधार किए गए हैं। 283 परीक्षा केंद्रों पर केंद्र-स्तरीय सुरक्षा और अनिवार्य सीसीटीवी कवरेज पर विशेष ध्यान दिया गया है।
उप महानिरीक्षक तरुण नायक ने जानकारी दी कि यह परीक्षा मध्य प्रदेश के 30 शहरों में लगभग 1.18 लाख उम्मीदवारों के लिए आयोजित होगी, जिसमें इंदौर में सर्वाधिक परीक्षा केंद्र बनाए गए हैं।
2024 विवाद की पृष्ठभूमि और व्यापक संदर्भ
गौरतलब है कि 2024 में नीट-यूजी परीक्षा में पेपर लीक के गंभीर आरोपों ने पूरे देश में हंगामा मचाया था और सुप्रीम कोर्ट तक मामला पहुंचा था। उस विवाद के बाद राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) की कार्यप्रणाली पर सवाल उठे थे और केंद्र सरकार को कई सुधार लागू करने पड़े थे। इस पृष्ठभूमि में मध्य प्रदेश पुलिस की यह तैयारी न केवल प्रशासनिक जिम्मेदारी बल्कि छात्रों के विश्वास को पुनर्स्थापित करने की कोशिश भी है।
यह भी उल्लेखनीय है कि देशभर में नीट-यूजी के माध्यम से मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश पाने वाले लाखों छात्रों का भविष्य इस एकल परीक्षा पर निर्भर करता है, जिससे इसकी सुरक्षा और पारदर्शिता की जिम्मेदारी और भी बढ़ जाती है।
3 मई 2026 को परीक्षा के दिन मध्य प्रदेश में सुरक्षा व्यवस्था की कड़ी परीक्षा होगी और इसके परिणाम देश के अन्य राज्यों के लिए भी एक मानक तय कर सकते हैं।