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गुजरात में शांतिपूर्ण मुहर्रम: 919 संवेदनशील स्थानों पर कड़ी निगरानी, 7,000 सुरक्षाकर्मी तैनात

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गुजरात में शांतिपूर्ण मुहर्रम: 919 संवेदनशील स्थानों पर कड़ी निगरानी, 7,000 सुरक्षाकर्मी तैनात

सारांश

गुजरात में मुहर्रम इस बार केवल आस्था का पर्व नहीं था — यह प्रशासनिक तैयारी की भी परीक्षा थी। 919 संवेदनशील स्थानों की पहचान, 7,000 सुरक्षाकर्मियों की तैनाती और डीजीपी स्तर की समीक्षा बैठक के बाद राज्यभर में जुलूस बिना किसी घटना के संपन्न हुए।

मुख्य बातें

गुजरात में 26 जून 2026 को मुहर्रम पूरी तरह शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ।
अहमदाबाद , सूरत , वडोदरा और राजकोट सहित कई जिलों में पारंपरिक ताजिया जुलूस निकाले गए।
राज्यभर में 919 संवेदनशील स्थानों की पहचान कर विशेष निगरानी और एहतियाती इंतज़ाम किए गए।
सूरत में अकेले 7,000 से अधिक सुरक्षाकर्मी तैनात किए गए; ड्रोन और सीसीटीवी से निगरानी हुई।
मलिक की अध्यक्षता में उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में सभी पुलिस आयुक्त और जिला अधीक्षक शामिल हुए।
SRPF , स्थानीय पुलिस और रैपिड रेस्पॉन्स टीम को प्रमुख स्थानों पर तैनात किया गया था।

गुजरात में शुक्रवार, 26 जून 2026 को मुहर्रम पूरी तरह शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ। अहमदाबाद, सूरत, वडोदरा, राजकोट सहित राज्य के कई जिलों में पारंपरिक ताजिया जुलूस निकाले गए, जिनके लिए गुजरात पुलिस ने राज्यभर में 919 संवेदनशील स्थानों की पहचान कर व्यापक सुरक्षा तंत्र सक्रिय किया था। अधिकारियों के अनुसार पुलिस, आयोजकों और समुदाय प्रतिनिधियों के आपसी समन्वय से पूरे राज्य में कोई बड़ी घटना नहीं हुई।

अहमदाबाद में सुरक्षा का व्यापक घेरा

अहमदाबाद के पुराने शहर में पूर्व-निर्धारित मार्गों से ताजिया जुलूस निकाले गए। संवेदनशील इलाकों में बैरिकेडिंग की गई और यातायात मार्ग बदले गए। भीड़ प्रबंधन के लिए सीसीटीवी कैमरों और ड्रोन से निरंतर निगरानी की गई, जबकि बड़ी संख्या में पुलिस बल मौके पर मौजूद रहा।

सूरत में 7,000 सुरक्षाकर्मी, ड्रोन से हवाई नज़र

सूरत में तय स्थानों से व्यवस्थित तरीके से ताजिया जुलूस निकाले गए। आयोजकों ने जुलूस मार्ग और प्रशासनिक दिशा-निर्देशों का पूरी तरह पालन किया। शहर में 7,000 से अधिक सुरक्षाकर्मी तैनात किए गए थे और ड्रोन व सीसीटीवी के ज़रिए हर गतिविधि पर नज़र रखी गई।

वडोदरा और राजकोट में भी अमन-चैन

वडोदरा और राजकोट में भी मुहर्रम के जुलूस बिना किसी अप्रिय घटना के संपन्न हुए। संवेदनशील इलाकों और प्रमुख चौराहों पर अतिरिक्त पुलिस बल तैनात रहा। वरिष्ठ पुलिस अधिकारी स्वयं मौके पर पहुँचकर सुरक्षा व्यवस्था की निगरानी करते रहे।

डीजीपी मलिक की अगुआई में उच्चस्तरीय तैयारी

मुहर्रम से पूर्व पुलिस भवन में पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) जी.एस. मलिक की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई थी। इसमें सभी पुलिस आयुक्त, रेंज आईजी और जिला पुलिस अधीक्षक वर्चुअल माध्यम से शामिल हुए। बैठक में खुफिया जानकारी जुटाने, संवेदनशील क्षेत्रों में गश्त बढ़ाने और जुलूस मार्गों पर समन्वित सुरक्षा सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए।

डीजीपी ने विशेष रूप से उन इलाकों में सतर्कता बरतने के निर्देश दिए जहाँ अतीत में मुहर्रम के दौरान कोई घटना हो चुकी थी। तकनीकी संसाधनों — ड्रोन, सीसीटीवी और रैपिड रेस्पॉन्स टीम — के ज़रिए निरंतर निगरानी का आदेश भी दिया गया।

सुरक्षा ढाँचा: SRPF, RRT और स्थानीय पुलिस का तालमेल

सुरक्षा व्यवस्था के तहत राज्य रिज़र्व पुलिस बल (SRPF), स्थानीय पुलिस और रैपिड रेस्पॉन्स टीम (RRT) को महत्वपूर्ण स्थानों पर तैनात किया गया। राज्यभर में 919 संवेदनशील स्थानों पर विशेष निगरानी, जोखिम आकलन और एहतियाती इंतज़ाम किए गए थे। यह ऐसे समय में आया है जब सांप्रदायिक सौहार्द बनाए रखना प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता रही है। अधिकारियों के अनुसार, पुलिस और समुदाय के बीच बेहतर समन्वय इस सफल आयोजन की सबसे बड़ी वजह रही।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह सवाल भी उठता है कि हर त्योहार पर हज़ारों सुरक्षाकर्मियों की तैनाती और 919 'संवेदनशील स्थानों' की पहचान क्या दीर्घकालिक सामाजिक सौहार्द की तस्वीर पेश करती है। सुरक्षा तंत्र की सफलता निर्विवाद है, परंतु मुख्यधारा की कवरेज अक्सर यह नहीं पूछती कि इतनी भारी तैनाती की ज़रूरत क्यों बनी रहती है। असली पैमाना यह होगा कि क्या आने वाले वर्षों में यह संख्या घटती है — जो समुदायों के बीच बढ़ते भरोसे का संकेत होगा।
RashtraPress
27 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

गुजरात में मुहर्रम 2026 कब और कैसे मनाया गया?
गुजरात में मुहर्रम 26 जून 2026 को शांतिपूर्ण ढंग से मनाया गया। अहमदाबाद, सूरत, वडोदरा और राजकोट सहित कई जिलों में पारंपरिक ताजिया जुलूस निकाले गए और कोई बड़ी घटना नहीं हुई।
मुहर्रम के दौरान गुजरात में कितनी सुरक्षा तैनात की गई थी?
राज्यभर में 919 संवेदनशील स्थानों की पहचान की गई थी। सूरत में अकेले 7,000 से अधिक सुरक्षाकर्मी तैनात किए गए। SRPF, स्थानीय पुलिस और रैपिड रेस्पॉन्स टीम के साथ-साथ ड्रोन और सीसीटीवी से निगरानी की गई।
डीजीपी जी.एस. मलिक ने मुहर्रम से पहले क्या तैयारी की थी?
पुलिस महानिदेशक जी.एस. मलिक की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक हुई जिसमें सभी पुलिस आयुक्त, रेंज आईजी और जिला पुलिस अधीक्षक वर्चुअल माध्यम से शामिल हुए। अधिकारियों को खुफिया जानकारी जुटाने, गश्त बढ़ाने और पुराने घटनास्थलों पर विशेष सतर्कता के निर्देश दिए गए।
गुजरात में मुहर्रम जुलूस शांतिपूर्ण रहने का मुख्य कारण क्या रहा?
अधिकारियों के अनुसार, पुलिस, जुलूस आयोजकों और समुदाय प्रतिनिधियों के बीच बेहतर समन्वय इस सफलता की मुख्य वजह रही। आयोजकों ने तय मार्गों और प्रशासनिक दिशा-निर्देशों का पूरी तरह पालन किया।
गुजरात में 919 संवेदनशील स्थानों पर क्या विशेष इंतज़ाम किए गए थे?
आधिकारिक जानकारी के अनुसार, इन 919 स्थानों पर विशेष निगरानी, जोखिम आकलन और एहतियाती सुरक्षा इंतज़ाम किए गए थे। इसके साथ ही ड्रोन, सीसीटीवी और रैपिड रेस्पॉन्स टीम की तैनाती भी सुनिश्चित की गई थी।
राष्ट्र प्रेस
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