ओबीसी आरक्षण पर मंत्री संजय निषाद की माँग: निषाद समुदाय को सूची में शामिल करे सरकार
सारांश
मुख्य बातें
उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री संजय निषाद ने 18 अगस्त 2026 को नोएडा में स्पष्ट कहा कि सरकार को सामाजिक न्याय सुनिश्चित करना चाहिए और निषाद समुदाय — जिसमें केवट, मल्लाह और माझी शामिल हैं — को ओबीसी आरक्षण सूची में विधिवत स्थान मिलना चाहिए। उन्होंने यह भी माँग की कि महिलाओं तथा पिछड़े समुदायों को संवैधानिक अधिकारों के तहत पर्याप्त प्रतिनिधित्व दिया जाए।
स्थापना दिवस पर उठाई आवाज़
मंत्री निषाद ने कहा कि स्थापना दिवस के अवसर पर उनके समुदाय ने दलीलों के साथ अपील की है। उन्होंने कहा, 'हमारे पास इस बात के पक्के सबूत हैं कि हमने आज़ादी की लड़ाई में अहम योगदान दिया और संविधान निर्माण में भी केवट, मल्लाह और माझी की भूमिका रही।' उनके अनुसार, इन्हीं आधारों पर निषाद समुदाय का नाम ओबीसी सूची में शामिल किया जाना न्यायसंगत है।
2016 के आंदोलन का हवाला
मंत्री के मुताबिक, 2016 में इस मुद्दे पर किए गए आंदोलन के दौरान राज्यपाल ने स्वयं स्पष्ट किया था कि केवट, मल्लाह और संबंधित जातियों का नाम ओबीसी से हटाकर नई सूची बनाई जाए। इसके बाद उनके समुदाय ने माँग की कि इसे राष्ट्रपति की अधिसूचना के माध्यम से लागू किया जाए। निषाद ने कहा, 'हम किसी को धोखा नहीं देते — लोग अपनी गलतियों की वजह से धोखा खा रहे हैं।'
भाजपा एजेंडे और सीएम योगी का समर्थन
निषाद ने बताया कि यह मुद्दा अब भारतीय जनता पार्टी (BJP) के एजेंडे में शामिल हो चुका है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विधानसभा में इस विषय को उठाते हुए कहा था कि इन जातियों से जुड़े लोग ओबीसी श्रेणी में शामिल किए जाने के हकदार हैं। सामाजिक न्याय मंत्रालय की ओर से इस दिशा में निरंतर कार्य किए जाने का भी उन्होंने उल्लेख किया।
विपक्ष पर पलटवार और जाँच पर बयान
एक अन्य सवाल के जवाब में मंत्री निषाद ने कहा कि बिना ठोस सबूत के किसी भी नतीजे पर नहीं पहुँचा जा सकता। उन्होंने स्पष्ट किया कि जाँच जारी है और जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने विपक्ष पर आरोप लगाया कि वह बेवजह सरकार और संत समुदाय के लोगों को निशाना बना रहा है। उनके शब्दों में, 'चोर तो चोर ही होता है — उसके खिलाफ एक संवैधानिक प्रक्रिया है और उसी का पालन हो रहा है।'
आगे की राह
मंत्री निषाद ने संकेत दिया कि वे इस मुद्दे पर एक 'सच्चे मित्र' की भूमिका में लगातार काम करते रहेंगे और किसी भी स्तर पर ढिलाई स्वीकार नहीं की जाएगी। निषाद समुदाय की ओबीसी सूची में औपचारिक शामिली के लिए राष्ट्रपति अधिसूचना की माँग अभी भी केंद्रबिंदु बनी हुई है।