ओबीसी सूची से मुसलमानों को बाहर करने पर संसद में हंगामा, विपक्ष ने कहा- यह निर्णय संविधान के खिलाफ है

Click to start listening
ओबीसी सूची से मुसलमानों को बाहर करने पर संसद में हंगामा, विपक्ष ने कहा- यह निर्णय संविधान के खिलाफ है

सारांश

संसद में ओबीसी सूची से मुसलमानों को बाहर करने के मुद्दे पर सियासी हंगामा छिड़ गया है। विपक्ष ने भाजपा पर संविधान का उल्लंघन करने का आरोप लगाया है। जानिए इस विवाद की पूरी कहानी।

Key Takeaways

  • ओबीसी सूची से मुसलमानों को बाहर करने का मुद्दा संसद में गरमा गया है।
  • विपक्ष ने भाजपा पर संविधान का उल्लंघन करने का आरोप लगाया है।
  • सभी धर्मों के लोगों को बराबरी का अधिकार है।
  • संविधान के अनुच्छेद 14 का महत्व है।
  • सामाजिक न्याय की अवधारणा को खतरा हो सकता है।

नई दिल्ली, ३० मार्च (राष्ट्र प्रेस)। संसद में शून्यकाल के दौरान ओबीसी सूची से मुसलमानों को बाहर रखने का मुद्दा सियासी हंगामे का कारण बन गया है। विपक्षी दलों ने भारतीय जनता पार्टी पर संविधान के खिलाफ रुख अपनाने का आरोप लगाया और विरोध स्वरूप सदन से वॉकआउट किया।

कांग्रेस के सांसद प्रमोद तिवारी ने भाजपा पर हमला करते हुए कहा कि शून्यकाल में उठाया गया यह प्रश्न हमारे संविधान और मंडल आयोग की भावना के विपरीत है। उन्होंने कहा कि भाजपा पिछड़े वर्गों और अल्पसंख्यकों को मिलने वाले आरक्षण का विरोध कर रही है, जो कि सामाजिक न्याय की अवधारणा को कमजोर करता है।

समाजवादी पार्टी के सांसद जावेद अली खान ने कहा कि भाजपा द्वारा ओबीसी सूची से मुसलमानों को बाहर रखने का मुद्दा उठाने पर पूरा विपक्ष एकजुट हो गया और विरोध के रूप में सदन से बाहर चला गया। भाजपा के इस रुख से उन्हें कोई आश्चर्य नहीं हुआ।

तृणमूल कांग्रेस की सांसद सागरिका घोष ने इसे संविधान के अनुच्छेद १४ पर सीधा हमला बताया। उन्होंने कहा कि संविधान धर्म के आधार पर नहीं, बल्कि सामाजिक और आर्थिक पिछड़ेपन के आधार पर आरक्षण की व्यवस्था करता है। भाजपा पर संविधान के मूल सिद्धांतों के उल्लंघन का आरोप लगाया।

राष्ट्रीय जनता दल के सांसद मनोज कुमार झा ने भी तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि भाजपा को न तो संविधान की बुनियादी समझ है और न ही पिछड़ा वर्ग आयोग की। उन्होंने मंडल आयोग का उदाहरण देते हुए कहा कि ओबीसी सूची में शामिल समुदायों की पहचान उनके पारंपरिक पेशों के आधार पर होती है, न कि धर्म के आधार पर। उन्होंने भाजपा से सवाल किया कि क्या वह देश में सामाजिक तनाव पैदा करना चाहती है।

डीएमके सांसद पी. विल्सन ने भाजपा के बयान को शर्मनाक करार दिया। उन्होंने कहा कि किसी भी धर्म के लोगों को ओबीसी समुदाय से बाहर रखना अभूतपूर्व है और यह देश की धर्मनिरपेक्षता के खिलाफ है।

उन्होंने कहा कि भारत में सभी धर्मों के लोग बराबरी के हकदार हैं और ऐसी बयानबाजी समाज में विभाजन पैदा करती है। भाजपा जिस तरह से देश में बांटने का काम कर रही है, उससे कुछ नहीं मिलने वाला है। हमें सबको मिलकर रहना चाहिए।

Point of View

जिसमें संवैधानिक मूल्यों और सामाजिक न्याय की बहस हो रही है। विपक्ष का यह कहना है कि यह निर्णय न केवल अल्पसंख्यकों के अधिकारों का उल्लंघन करता है, बल्कि सामाजिक ताने-बाने को भी खतरे में डालता है।
NationPress
05/04/2026

Frequently Asked Questions

ओबीसी सूची से मुसलमानों को बाहर करने का कारण क्या है?
भाजपा का तर्क है कि ओबीसी सूची में शामिल समुदायों की पहचान उनके पारंपरिक पेशों के आधार पर होती है, न कि धर्म के आधार पर।
विपक्ष ने इस मुद्दे पर क्या प्रतिक्रिया दी?
विपक्ष ने आरोप लगाया है कि भाजपा का यह कदम संविधान के खिलाफ है और इसके विरोध में उन्होंने सदन से वॉकआउट किया।
संविधान के अनुच्छेद 14 का क्या महत्व है?
अनुच्छेद 14 सभी नागरिकों को समानता का अधिकार प्रदान करता है और किसी भी धर्म, जाति या वर्ग के आधार पर भेदभाव से रोकता है।
इस मुद्दे से सामाजिक ताने-बाने पर क्या असर हो सकता है?
ऐसे कदमों से समाज में विभाजन और तनाव उत्पन्न होने की आशंका है, जो कि भारतीय धर्मनिरपेक्षता के खिलाफ है।
ओबीसी आरक्षण का उद्देश्य क्या है?
ओबीसी आरक्षण का उद्देश्य समाज के पिछड़े वर्गों को शैक्षणिक और रोजगार में समान अवसर प्रदान करना है।
Nation Press