1 अगस्त 2026
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नीरज चोपड़ा ने कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में जीता सिल्वर, बोले — 'इंजरी के बाद डर रहता है, लय धीरे-धीरे लौट रही है'

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नीरज चोपड़ा ने कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में जीता सिल्वर, बोले — 'इंजरी के बाद डर रहता है, लय धीरे-धीरे लौट रही है'

सारांश

इंजरी से वापसी के बाद नीरज चोपड़ा ने ग्लासगो में सीज़न का बेस्ट प्रदर्शन करते हुए सिल्वर जीता, यशवीर सिंह ने ब्रॉन्ज। नीरज का कहना है — लय अभी पूरी नहीं लौटी, लेकिन आगे और बेहतर होगा। एक दिन में दो जैवलिन पदक भारत की बढ़ती गहराई का प्रमाण।

मुख्य बातें

नीरज चोपड़ा ने 1 अगस्त 2026 को ग्लासगो में कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 की जैवलिन थ्रो स्पर्धा में सिल्वर मेडल जीता — यह उनका इस सीज़न का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन।
यशवीर सिंह ने उसी स्पर्धा में ब्रॉन्ज मेडल जीता, एक दिन में भारत को जैवलिन में दोहरा पदक।
स्वर्ण पदक श्रीलंका के रोमेश थरंगा ने 89.75 मीटर के थ्रो से जीता।
नीरज ने स्वीकार किया कि इंजरी से वापसी के बाद मानसिक और शारीरिक दोनों स्तरों पर सावधानी बरतनी पड़ती है।
नीरज ने इंजरी के बाद पहली प्रतियोगिता दोहा में खेली थी; ग्लासगो में प्रदर्शन उससे बेहतर रहा।

नीरज चोपड़ा ने 1 अगस्त 2026 को ग्लासगो में जारी कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 के 9वें दिन जैवलिन थ्रो स्पर्धा में सिल्वर मेडल जीता — यह उनके इस सीज़न का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन रहा। इसी स्पर्धा में यशवीर सिंह ने ब्रॉन्ज मेडल अपने नाम किया, जिससे भारत को एक ही दिन जैवलिन में दो पदक मिले।

मुख्य घटनाक्रम

स्वर्ण पदक श्रीलंका के रोमेश थरंगा ने जीता, जिन्होंने 89.75 मीटर का थ्रो फेंककर शीर्ष स्थान हासिल किया। नीरज अपनी लय पूरी तरह स्थापित नहीं कर सके और उन्होंने खुद स्वीकार किया कि वह 'लाइन नहीं पकड़ पा रहे थे।' यशवीर के लिए यह उनके सीज़न का भी बेहतरीन प्रदर्शन रहा।

नीरज ने क्या कहा

पदक समारोह के बाद पत्रकारों से बात करते हुए नीरज ने कहा, 'बहुत खुशी है कि मेरे साथ यशवीर भी मेडल जीतने में सफल रहे। ऐसा पहले एशियन गेम्स में हुआ था, जहाँ मैंने और किशोर ने मेडल जीता था और मुझे खुशी है कि यशवीर ने यहाँ अपने सीज़न का बेस्ट प्रदर्शन किया।' उन्होंने आगे जोड़ा, 'काफी अच्छा लग रहा है कि हम पोडियम पर हैं। हमारी हमेशा कोशिश रहती है कि देश का नेशनल एंथम बजे, लेकिन ठीक है — मैंने भी सीज़न का अपना बेस्ट प्रदर्शन किया।'

थरंगा के थ्रो पर नीरज ने कहा, 'जाहिर तौर पर थरंगा का थ्रो काफी अच्छा था। मुझे भी लग रहा था कि मैं थोड़ा और बेहतर कर सकता हूँ, लेकिन मैं लाइन नहीं पकड़ पा रहा था। मैं फिर से लय में आने की धीरे-धीरे कोशिश कर रहा हूँ।' उन्होंने हल्के-फुल्के अंदाज़ में यह भी कहा, 'पता नहीं मैं ठंड में उतना बेहतर प्रदर्शन नहीं कर पाता हूँ, मुझे गर्मी पसंद है — क्योंकि मेरे अंदर भारतीय खून है ना।'

इंजरी से वापसी की चुनौती

नीरज ने अपनी फिटनेस की स्थिति पर खुलकर बात की। उन्होंने कहा, 'देखिए, मैं यह नहीं कह सकता कि मेरी फिटनेस पहले जैसी है। अभी धीरे-धीरे उस फिटनेस को हासिल करने का प्रयास जारी है। इंजरी के बाद मेरी पहली प्रतियोगिता दोहा में थी, जहाँ कोई नहीं कह सकता कि हम अच्छी तैयारी में थे। हालाँकि, यहाँ थोड़ा बेहतर था।'

गौरतलब है कि इंजरी से लौटे किसी भी शीर्ष एथलीट के लिए मानसिक द्वंद्व उतना ही बड़ा होता है जितना शारीरिक। नीरज ने इसे स्पष्ट शब्दों में रखा: 'जब आप 100 प्रतिशत फिट रहते हैं, तो लड़ने का जज्बा अलग रहता है और लगता है कि कुछ भी कर सकते हैं। वहीं, जब आप इंजरी से आ रहे होते हैं, तो सोच-समझकर कदम रखना पड़ता है। आज भी कुछ ऐसी ही स्थिति थी — कभी लग रहा था कि पूरी जोर से दौड़ लगाऊँ, तो कभी लगा कि खुद को कंट्रोल में रखूँ। मिश्रित फीलिंग थी, लेकिन फिर भी थ्रो ठीक था।'

आम जनता और खेल जगत पर असर

यह ऐसे समय में आया है जब भारतीय जैवलिन का भविष्य नीरज की फिटनेस पर टिका माना जाता है। यशवीर सिंह का ब्रॉन्ज यह संकेत देता है कि भारत में जैवलिन की अगली पीढ़ी तैयार हो रही है — जो दीर्घकालिक दृष्टि से सकारात्मक संकेत है।

आगे क्या

नीरज ने भरोसा जताया कि आने वाले इवेंट्स में वह पूरी लय हासिल कर लेंगे। उनके अनुसार, 'यकीनन अभी और सुधार होगा। आगामी प्रतियोगिताओं में और बेहतर प्रदर्शन करने का प्रयास रहेगा।' भारतीय एथलेटिक्स प्रेमियों की निगाहें अब नीरज की अगली स्पर्धाओं पर टिकी हैं, जहाँ वह पूर्ण फिटनेस के साथ मैदान में उतरने की उम्मीद रखते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली कहानी उनकी ईमानदारी में है — इंजरी के बाद जब वह खुद कहते हैं कि 'लाइन नहीं पकड़ पा रहा था', तो यह स्पष्ट है कि वह अभी पूरी क्षमता पर नहीं हैं। यशवीर सिंह का ब्रॉन्ज भारतीय जैवलिन के लिए दीर्घकालिक रूप से अधिक महत्वपूर्ण संकेत हो सकता है — यह दिखाता है कि नीरज पर निर्भरता धीरे-धीरे कम हो रही है। मुख्यधारा की कवरेज जो अक्सर चूक जाती है वह यह है कि रोमेश थरंगा का 89.75 मीटर का थ्रो विश्व स्तरीय प्रदर्शन था — नीरज का पदक चूकना उनकी कमज़ोरी नहीं, बल्कि प्रतिस्पर्धा का उच्च स्तर दर्शाता है।
RashtraPress
1 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

नीरज चोपड़ा ने कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में कौन-सा पदक जीता?
नीरज चोपड़ा ने 1 अगस्त 2026 को ग्लासगो में कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 की जैवलिन थ्रो स्पर्धा में सिल्वर मेडल जीता। यह उनके इस सीज़न का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन रहा।
कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 जैवलिन में गोल्ड किसने जीता?
श्रीलंका के रोमेश थरंगा ने 89.75 मीटर का थ्रो फेंककर स्वर्ण पदक जीता। नीरज चोपड़ा को सिल्वर और यशवीर सिंह को ब्रॉन्ज मेडल मिला।
नीरज चोपड़ा की इंजरी के बाद वापसी कैसी रही?
नीरज ने खुद माना कि इंजरी के बाद फिटनेस पूरी तरह पहले जैसी नहीं है और लय धीरे-धीरे लौट रही है। इंजरी के बाद उनकी पहली प्रतियोगिता दोहा में थी और ग्लासगो में प्रदर्शन उससे बेहतर रहा।
यशवीर सिंह ने कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में क्या हासिल किया?
यशवीर सिंह ने कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 की जैवलिन थ्रो स्पर्धा में ब्रॉन्ज मेडल जीता। नीरज चोपड़ा के अनुसार यह यशवीर का सीज़न का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन था।
नीरज चोपड़ा ने अपने प्रदर्शन के बारे में क्या कहा?
नीरज ने कहा कि उन्हें लग रहा था कि वह थोड़ा और बेहतर कर सकते थे, लेकिन लाइन नहीं पकड़ पा रहे थे। उन्होंने यह भी कहा कि इंजरी से वापसी के दौरान मन में डर रहता है और आगामी प्रतियोगिताओं में पूरी लय हासिल करने की कोशिश रहेगी।
राष्ट्र प्रेस
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