CWG 2026: जूडो में इतिहास, नीरज का सिल्वर — एक दिन में 6 मेडल के बाद भी भारत 10वें स्थान पर
सारांश
मुख्य बातें
कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 के नौवें दिन भारत ने असाधारण प्रदर्शन करते हुए एक ही दिन में 6 मेडल अपनी झोली में डाले — जिनमें 2 स्वर्ण, 2 रजत और 2 कांस्य पदक शामिल हैं। इस उपलब्धि के बावजूद मेडल तालिका में भारत की स्थिति 10वें स्थान पर बनी रही, क्योंकि ऊपरी देशों ने भी उतनी ही तेज़ी से पदक जोड़े। 1 अगस्त 2026 को भारत का कुल मेडल योग 23 हो गया है।
जूडो में ऐतिहासिक प्रदर्शन
अस्मिता डे ने 48 किलोग्राम वर्ग में स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास रच दिया — यह भारत का कॉमनवेल्थ गेम्स में जूडो का पहला स्वर्ण था। इसी दिन हर्ष सिंह ने जूडो में दूसरा स्वर्ण पदक भारत के नाम किया। यामिनी मौर्य ने 57 किलोग्राम वर्ग में रजत पदक जीता। भारत ने एक ही दिन में जूडो में तीन पदक — दो स्वर्ण और एक रजत — जीतकर इस खेल में अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन दर्ज किया।
नीरज चोपड़ा और यशवीर सिंह का जैवलिन में जलवा
ओलंपिक चैंपियन नीरज चोपड़ा ने 85.83 मीटर का सर्वश्रेष्ठ थ्रो फेंककर रजत पदक अपने नाम किया। वहीं, यशवीर सिंह ने 85.41 मीटर के थ्रो के साथ कांस्य पदक जीता। गौरतलब है कि दोनों भारतीय एथलीटों ने 85 मीटर से अधिक की दूरी तय की, जो भारतीय जैवलिन की गहराती ताकत का संकेत है।
तेजस्विन शंकर का डेकाथलॉन में कांस्य
तेजस्विन शंकर ने डेकाथलॉन में कांस्य पदक जीतकर एक और ऐतिहासिक उपलब्धि दर्ज की। यह भारत के लिए कॉमनवेल्थ गेम्स के डेकाथलॉन इतिहास में एक यादगार क्षण रहा।
मेडल तालिका में भारत की स्थिति
ऑस्ट्रेलिया 128 मेडल (55 स्वर्ण, 30 रजत, 43 कांस्य) के साथ शीर्ष पर काबिज है। इंग्लैंड 17 स्वर्ण, 34 रजत और 29 कांस्य समेत दूसरे स्थान पर है। कनाडा 17 स्वर्ण समेत कुल 53 मेडल के साथ तीसरे, मेजबान स्कॉटलैंड (10 स्वर्ण, 8 रजत, 16 कांस्य) चौथे, और नाइजीरिया 9 स्वर्ण समेत 18 मेडल के साथ पाँचवें स्थान पर है। न्यूज़ीलैंड (7 स्वर्ण, 10 रजत, 8 कांस्य) छठे, दक्षिण अफ्रीका 7 स्वर्ण समेत 25 मेडल के साथ सातवें, मलेशिया 13 मेडल के साथ आठवें, और वेल्स (6 स्वर्ण, 6 रजत, 12 कांस्य) नौवें स्थान पर है — भारत से ठीक एक पायदान ऊपर।
आगे का सफर
भारत के पास अभी कई स्पर्धाओं में पदक जीतने के अवसर शेष हैं। यदि यही गति बनी रही, तो अंतिम तालिका में भारत की स्थिति में सुधार की उम्मीद है। जूडो में ऐतिहासिक प्रदर्शन ने संकेत दिया है कि भारत अब पारंपरिक खेलों से आगे बढ़कर नई स्पर्धाओं में भी ताकत दिखाने में सक्षम है।