रामायपट्टनम पोर्ट निजीकरण पर जगन का बड़ा आरोप: ₹4,929 करोड़ की परियोजना ₹1,500 करोड़ में सौंपने की तैयारी
सारांश
मुख्य बातें
वाईएसआर कांग्रेस पार्टी (वाईएसआरसीपी) के अध्यक्ष और आंध्र प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री वाई.एस. जगन मोहन रेड्डी ने 19 जुलाई 2026 को रामायपट्टनम बंदरगाह के निजीकरण को लेकर मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू के नेतृत्व वाली तेलुगु देशम पार्टी (टीडीपी) सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। जगन ने कहा कि ₹4,929 करोड़ की लागत से विकसित हो रही इस परियोजना को मात्र ₹1,500 करोड़ की अग्रिम राशि पर निजी कंपनियों को सौंपा जा रहा है, जिससे राज्य के खजाने को भारी नुकसान होगा।
आरोप का सार: क्या है विवाद
जगन मोहन रेड्डी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर आरोप लगाया कि निजीकरण के बाद भी राज्य सरकार को ₹3,500 करोड़ से अधिक के कर्ज का बोझ वहन करना पड़ेगा। उन्होंने मुख्यमंत्री नायडू से सवाल किया — 'यह कैसी अर्थव्यवस्था है?' उनके अनुसार, यह सौदा राज्य के हित में नहीं बल्कि टीडीपी के शीर्ष नेताओं को आर्थिक लाभ पहुँचाने के उद्देश्य से किया जा रहा है।
पूर्व सरकार की उपलब्धियों का दावा
वाईएसआरसीपी प्रमुख ने दावा किया कि जून 2024 से पहले उनकी सरकार ने रामायपट्टनम, मछलीपट्टनम और मुलापेटा बंदरगाहों के विकास के लिए भूमि अधिग्रहण, वैधानिक मंजूरियाँ, वित्तीय समापन (फाइनेंशियल क्लोजर) और ईपीसी अनुबंध जैसी महत्त्वपूर्ण प्रक्रियाएँ पूरी कर ली थीं। उन्होंने कहा कि इससे परियोजनाओं में पर्याप्त भौतिक प्रगति हो चुकी थी।
बंदरगाह से जुड़े बड़े औद्योगिक निवेश
जगन ने रामायपट्टनम पोर्ट से जुड़े कई बड़े निवेश प्रस्तावों का उल्लेख किया। उनके अनुसार, बीपीसीएल यहाँ 9 से 12 एमएमटीपीए क्षमता वाली ग्रीनफील्ड रिफाइनरी और पेट्रोकेमिकल कॉम्प्लेक्स स्थापित करने जा रही है, जिसमें ₹1 लाख करोड़ से अधिक का निवेश प्रस्तावित है। इसके अलावा, इंडोसोल सोलर एकीकृत 'क्वार्ट्ज-टू-मॉड्यूल' विनिर्माण संयंत्र स्थापित कर रही है, जहाँ कच्चे माल के आयात और सौर मॉड्यूल के निर्यात के लिए बंदरगाह की निकटता अहम होगी।
जगन ने यह भी बताया कि जेएसडब्ल्यू स्टील रामायपट्टनम पोर्ट पर दो बर्थ विकसित कर रही है, जिनका उपयोग वाईएसआर कडप्पा जिले में निर्माणाधीन एकीकृत इस्पात संयंत्र के लिए लौह अयस्क और कोकिंग कोयले की ढुलाई में होगा।
आर्थिक महत्त्व और रोजगार का सवाल
वाईएसआरसीपी प्रमुख ने कहा कि ये सभी परियोजनाएँ राज्य में बड़े पैमाने पर रोजगार सृजित करेंगी और कर एवं गैर-कर राजस्व बढ़ाने में सहायक होंगी। उनके अनुसार, बंदरगाह-आधारित विकास आंध्र प्रदेश की आर्थिक प्रगति की रीढ़ है। यह ऐसे समय में आया है जब आंध्र प्रदेश अपनी बुनियादी ढाँचा क्षमता को विस्तार देने की कोशिश में है।
टीडीपी सरकार पर सीधा निशाना
जगन ने आरोप लगाया कि इतनी बड़ी आर्थिक संभावनाओं के बावजूद टीडीपी सरकार का ध्यान केवल इस परियोजना को कथित घोटाले में बदलकर अपने नेताओं के लिए धन जुटाने पर केंद्रित है। गौरतलब है कि टीडीपी सरकार की ओर से इन आरोपों पर अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। आने वाले दिनों में यह विवाद आंध्र प्रदेश की विधानसभा और सार्वजनिक बहस में केंद्रीय मुद्दा बन सकता है।