रजिस्ट्रेशन सेवा केंद्र निजीकरण नहीं: आंध्र प्रदेश CM चंद्रबाबू नायडू ने भ्रामक प्रचार को किया खारिज
सारांश
मुख्य बातें
आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने सोमवार, 20 जुलाई को स्पष्ट शब्दों में कहा कि राज्य में स्थापित किए जा रहे रजिस्ट्रेशन सेवा केंद्र (RSK) किसी भी रूप में निजीकरण नहीं हैं, बल्कि ये नागरिकों को तेज़ और सुलभ पंजीकरण सुविधाएँ देने की सरकारी पहल हैं। अमरावती स्थित राज्य सचिवालय में विभागीय समीक्षा बैठक के दौरान उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि सब-रजिस्ट्रार कार्यालयों के निजीकरण को लेकर फैलाए जा रहे भ्रामक प्रचार का तथ्यों के साथ खंडन किया जाए।
मुख्य घटनाक्रम
मुख्यमंत्री नायडू ने राज्य सचिवालय के RTGS केंद्र में विभिन्न विभागों की कार्यप्रगति की समीक्षा की। इस दौरान सब-रजिस्ट्रार कार्यालयों के कथित निजीकरण का मुद्दा उठा, जिस पर उन्होंने सीधे जवाब दिया। नायडू ने कहा, "सरकार लोगों को बेहतर रजिस्ट्रेशन सेवाएं देने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। इसी उद्देश्य से रजिस्ट्रेशन सेवा केंद्र शुरू किए जा रहे हैं। यह किसी भी तरह का निजीकरण नहीं है।"
पासपोर्ट सेवा केंद्र जैसा मॉडल
मुख्यमंत्री ने रजिस्ट्रेशन सेवा केंद्रों की तुलना पासपोर्ट सेवा केंद्रों से की और कहा कि ये उसी तर्ज पर काम करेंगे। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे आम जनता को समझाएं कि किस प्रकार पासपोर्ट सेवा केंद्रों ने पासपोर्ट बनवाने की प्रक्रिया को सरल और तीव्र बनाया है, और RSK भी इसी प्रकार पंजीकरण सेवाओं को सुगम बनाएंगे। साथ ही उन्होंने आश्वस्त किया कि दस्तावेज़ लेखकों (document writers) की आजीविका पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा और सरकार उनके हितों की रक्षा के लिए उचित समाधान निकालेगी।
सरकार की प्रतिक्रिया और अधिकारियों को निर्देश
नायडू ने आरोप लगाया कि कुछ तत्व जानबूझकर RSK को लेकर गलत सूचनाएं फैला रहे हैं। उन्होंने कहा, "अधिकारियों की जिम्मेदारी है कि वे लोगों को सही जानकारी दें और रजिस्ट्रेशन सेवा केंद्रों के फायदे समझाएं।" मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि गैर-वित्तीय शिकायतों का तत्काल निपटारा किया जाए, जबकि वित्तीय मामलों को प्राथमिकता के आधार पर सुलझाया जाए।
बार-बार याचिका दायर करने वालों पर निगरानी
बैठक में मुख्यमंत्री ने 'बार-बार याचिकाएं दायर करने वाले लोगों' के मुद्दे पर भी ध्यान केंद्रित किया। उन्होंने बताया कि राज्य में 81 ऐसे व्यक्तियों की पहचान हुई है, जिन्होंने औसतन 246 याचिकाएं प्रति व्यक्ति दायर की हैं। नायडू ने कहा कि इन लोगों की जानकारी जिला कलेक्टरों को भेजी जाएगी और जनहित से परे, केवल सरकार या अधिकारियों की छवि धूमिल करने के उद्देश्य से दायर याचिकाओं की पहचान की जाएगी।
अल-नीनो का असर और किसानों के लिए सलाह
मुख्यमंत्री ने बताया कि इस वर्ष अल-नीनो के प्रभाव से राज्य में वर्षा में 49 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि किसानों को सूखा-सहिष्णु फसलों की खेती के लिए प्रोत्साहित किया जाए और इस जलवायु चुनौती से निपटने के वैकल्पिक उपाय अपनाए जाएं। इसके अलावा, 'दीपम-2.0' योजना के लाभार्थियों को सब्सिडी निर्धारित तिथियों पर व्यवस्थित रूप से मिले, इसके लिए नागरिक आपूर्ति और वित्त विभाग के बीच समन्वय सुनिश्चित करने को कहा गया। आने वाले दिनों में RSK के क्रियान्वयन और किसान जागरूकता अभियान की दिशा में सरकार की कार्रवाई पर सबकी नज़रें टिकी रहेंगी।