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रजिस्ट्रेशन सेवा केंद्र निजीकरण नहीं: आंध्र प्रदेश CM चंद्रबाबू नायडू ने भ्रामक प्रचार को किया खारिज

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रजिस्ट्रेशन सेवा केंद्र निजीकरण नहीं: आंध्र प्रदेश CM चंद्रबाबू नायडू ने भ्रामक प्रचार को किया खारिज

सारांश

आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने सब-रजिस्ट्रार कार्यालयों के निजीकरण की अफवाहों को सिरे से खारिज करते हुए रजिस्ट्रेशन सेवा केंद्रों को पासपोर्ट सेवा केंद्र मॉडल पर आधारित नागरिक सुविधा पहल बताया। साथ ही 49% वर्षा कमी और दोहराव याचिकाओं जैसे अहम मुद्दों पर भी अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए।

मुख्य बातें

मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने 20 जुलाई को स्पष्ट किया कि रजिस्ट्रेशन सेवा केंद्र (RSK) सब-रजिस्ट्रार कार्यालयों का निजीकरण नहीं है।
RSK पासपोर्ट सेवा केंद्रों की तर्ज पर काम करेंगे — तेज़, सुलभ और सरकारी नियंत्रण में।
राज्य में 81 व्यक्तियों ने औसतन 246 याचिकाएं दायर की हैं; उनकी जानकारी जिला कलेक्टरों को भेजी जाएगी।
इस वर्ष अल-नीनो के कारण राज्य में वर्षा में 49% की कमी; किसानों को सूखा-सहिष्णु फसलों के लिए प्रोत्साहित करने के निर्देश।
'दीपम-2.0' योजना की सब्सिडी निर्धारित तिथियों पर देने के लिए नागरिक आपूर्ति व वित्त विभाग को समन्वय का निर्देश।

आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने सोमवार, 20 जुलाई को स्पष्ट शब्दों में कहा कि राज्य में स्थापित किए जा रहे रजिस्ट्रेशन सेवा केंद्र (RSK) किसी भी रूप में निजीकरण नहीं हैं, बल्कि ये नागरिकों को तेज़ और सुलभ पंजीकरण सुविधाएँ देने की सरकारी पहल हैं। अमरावती स्थित राज्य सचिवालय में विभागीय समीक्षा बैठक के दौरान उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि सब-रजिस्ट्रार कार्यालयों के निजीकरण को लेकर फैलाए जा रहे भ्रामक प्रचार का तथ्यों के साथ खंडन किया जाए।

मुख्य घटनाक्रम

मुख्यमंत्री नायडू ने राज्य सचिवालय के RTGS केंद्र में विभिन्न विभागों की कार्यप्रगति की समीक्षा की। इस दौरान सब-रजिस्ट्रार कार्यालयों के कथित निजीकरण का मुद्दा उठा, जिस पर उन्होंने सीधे जवाब दिया। नायडू ने कहा, "सरकार लोगों को बेहतर रजिस्ट्रेशन सेवाएं देने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। इसी उद्देश्य से रजिस्ट्रेशन सेवा केंद्र शुरू किए जा रहे हैं। यह किसी भी तरह का निजीकरण नहीं है।"

पासपोर्ट सेवा केंद्र जैसा मॉडल

मुख्यमंत्री ने रजिस्ट्रेशन सेवा केंद्रों की तुलना पासपोर्ट सेवा केंद्रों से की और कहा कि ये उसी तर्ज पर काम करेंगे। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे आम जनता को समझाएं कि किस प्रकार पासपोर्ट सेवा केंद्रों ने पासपोर्ट बनवाने की प्रक्रिया को सरल और तीव्र बनाया है, और RSK भी इसी प्रकार पंजीकरण सेवाओं को सुगम बनाएंगे। साथ ही उन्होंने आश्वस्त किया कि दस्तावेज़ लेखकों (document writers) की आजीविका पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा और सरकार उनके हितों की रक्षा के लिए उचित समाधान निकालेगी।

सरकार की प्रतिक्रिया और अधिकारियों को निर्देश

नायडू ने आरोप लगाया कि कुछ तत्व जानबूझकर RSK को लेकर गलत सूचनाएं फैला रहे हैं। उन्होंने कहा, "अधिकारियों की जिम्मेदारी है कि वे लोगों को सही जानकारी दें और रजिस्ट्रेशन सेवा केंद्रों के फायदे समझाएं।" मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि गैर-वित्तीय शिकायतों का तत्काल निपटारा किया जाए, जबकि वित्तीय मामलों को प्राथमिकता के आधार पर सुलझाया जाए।

बार-बार याचिका दायर करने वालों पर निगरानी

बैठक में मुख्यमंत्री ने 'बार-बार याचिकाएं दायर करने वाले लोगों' के मुद्दे पर भी ध्यान केंद्रित किया। उन्होंने बताया कि राज्य में 81 ऐसे व्यक्तियों की पहचान हुई है, जिन्होंने औसतन 246 याचिकाएं प्रति व्यक्ति दायर की हैं। नायडू ने कहा कि इन लोगों की जानकारी जिला कलेक्टरों को भेजी जाएगी और जनहित से परे, केवल सरकार या अधिकारियों की छवि धूमिल करने के उद्देश्य से दायर याचिकाओं की पहचान की जाएगी।

अल-नीनो का असर और किसानों के लिए सलाह

मुख्यमंत्री ने बताया कि इस वर्ष अल-नीनो के प्रभाव से राज्य में वर्षा में 49 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि किसानों को सूखा-सहिष्णु फसलों की खेती के लिए प्रोत्साहित किया जाए और इस जलवायु चुनौती से निपटने के वैकल्पिक उपाय अपनाए जाएं। इसके अलावा, 'दीपम-2.0' योजना के लाभार्थियों को सब्सिडी निर्धारित तिथियों पर व्यवस्थित रूप से मिले, इसके लिए नागरिक आपूर्ति और वित्त विभाग के बीच समन्वय सुनिश्चित करने को कहा गया। आने वाले दिनों में RSK के क्रियान्वयन और किसान जागरूकता अभियान की दिशा में सरकार की कार्रवाई पर सबकी नज़रें टिकी रहेंगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

क्योंकि वह मॉडल आम जनता में लोकप्रिय है — लेकिन असली सवाल यह है कि RSK में सरकारी जवाबदेही की संरचना क्या होगी और तृतीय-पक्ष संचालकों की भूमिका कितनी होगी। दस्तावेज़ लेखकों की आजीविका की चिंता को 'समाधान निकालेंगे' कहकर टालना पर्याप्त नहीं है — इस वर्ग को लिखित नीतिगत आश्वासन चाहिए। 81 'दोहराव याचिकाकर्ताओं' पर निगरानी की बात वैध प्रशासनिक चिंता है, परंतु इसे लागू करते समय वैध जनहित याचिकाओं के दमन का जोखिम न बने, इसकी स्पष्ट सीमारेखा अभी तय नहीं हुई है।
RashtraPress
21 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

रजिस्ट्रेशन सेवा केंद्र (RSK) क्या है और यह सब-रजिस्ट्रार कार्यालय से कैसे अलग है?
RSK आंध्र प्रदेश सरकार की एक नई नागरिक सुविधा पहल है, जो पासपोर्ट सेवा केंद्रों की तरह पंजीकरण सेवाएं तेज़ और सुलभ तरीके से देगी। मुख्यमंत्री नायडू के अनुसार यह सब-रजिस्ट्रार कार्यालयों का निजीकरण नहीं है, बल्कि उनकी सेवा-डिलीवरी को बेहतर बनाने की व्यवस्था है।
क्या आंध्र प्रदेश में सब-रजिस्ट्रार कार्यालयों का निजीकरण हो रहा है?
नहीं। मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने 20 जुलाई को स्पष्ट रूप से इस दावे को भ्रामक प्रचार बताकर खारिज किया। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे तथ्यों के साथ इस गलत सूचना का खंडन करें।
दस्तावेज़ लेखकों (document writers) की नौकरी पर RSK का क्या असर होगा?
मुख्यमंत्री नायडू ने आश्वस्त किया कि दस्तावेज़ लेखकों की आजीविका पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा और सरकार उनके हितों की रक्षा के लिए उचित समाधान निकालेगी। हालांकि, इस समाधान का विस्तृत ब्यौरा अभी सार्वजनिक नहीं किया गया है।
आंध्र प्रदेश में अल-नीनो का किसानों पर क्या असर हुआ है?
इस वर्ष अल-नीनो के प्रभाव से राज्य में वर्षा में 49 प्रतिशत की कमी आई है। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि किसानों को सूखा-सहिष्णु फसलों की खेती के लिए प्रोत्साहित किया जाए और वैकल्पिक उपाय अपनाए जाएं।
'दीपम-2.0' योजना क्या है और इसमें क्या बदलाव होगा?
'दीपम-2.0' आंध्र प्रदेश सरकार की एक सब्सिडी योजना है। मुख्यमंत्री नायडू ने निर्देश दिया है कि इसके लाभार्थियों को सब्सिडी निर्धारित तिथियों पर व्यवस्थित रूप से मिले, और इसके लिए नागरिक आपूर्ति व वित्त विभाग के बीच समन्वय सुनिश्चित किया जाए।
राष्ट्र प्रेस
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