आंध्र प्रदेश में जल संरक्षण हेतु 100 दिवसीय 'जलधारा' योजना का आगाज़
सारांश
Key Takeaways
- जलधारा योजना का उद्देश्य जल संरक्षण को बढ़ावा देना है।
- यह योजना अनंतपुर जिले में शुरू की गई है।
- मुख्यमंत्री ने जल स्तर को प्रबंधित करने के लिए पहल की है।
- 60,000 जल उपयोगकर्ता संघों का सहयोग इस योजना में शामिल है।
- आंध्र प्रदेश माइक्रो-इरिगेशन में अग्रणी है।
अमरावती, 6 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने सोमवार को जल संरक्षण के लिए राज्य में आरंभ की गई 100-दिन की कार्य योजना ‘जलधारा’ का उद्घाटन किया।
मुख्यमंत्री नायडू द्वारा शुरू किए गए ‘जलधारा’ कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य टैंकों की खुदाई, नालों की मरम्मत, भूमिगत जल का पुनर्भरण और जल संरक्षण को सुनिश्चित करना है, ताकि हर एकड़ के लिए पर्याप्त पानी उपलब्ध हो सके और हर किसान को आत्मविश्वास मिले।
यह कार्यक्रम अनंतपुर जिले में आरंभ किया गया, जो सूखे के प्रति संवेदनशील रायलसीमा क्षेत्र में स्थित है। उन्होंने कहा कि सरकार ने जल संरक्षण के लिए जन आंदोलन की शुरुआत की है। इस कार्यक्रम में 60,000 जल उपयोगकर्ता संघों के सदस्यों के नेतृत्व में हर नागरिक को भागीदार बनना चाहिए।
नायडू ने कहा कि यदि हम मिट्टी को प्राकृतिक जलाशय के रूप में इस्तेमाल करें, तो जल प्रबंधन अधिक प्रभावी होगा। उन्होंने लोगों, सरकारी अधिकारियों और जल उपयोगकर्ता संघों से अपील की कि वे मिलकर भूमिगत जल स्तर बढ़ाएं।
मुख्यमंत्री ने कहा, "हमें मानसून से पहले भूमिगत जल स्तर 6 मीटर की गहराई पर और मानसून के बाद 3 मीटर से कम पर सुनिश्चित करना होगा। यदि हम यह हासिल कर लेते हैं, तो राज्य में जल संकट समाप्त हो जाएगा।"
उन्होंने यह भी कहा कि जलाशयों को उनकी पूर्ण क्षमता तक भरना आवश्यक है ताकि राज्य किसी भी समय पानी का उपयोग कर सके। नायडू ने बहते पानी के प्रवाह को रोकने, जमा पानी को सुरक्षित करने और जलाशयों को भरने पर जोर दिया।
उन्होंने बताया कि राज्य ने परकोलेशन पिट्स, चेक डैम, स्प्रिंकलर सिंचाई और माइक्रो-इरिगेशन जैसी पहलों के माध्यम से महत्वपूर्ण प्रगति की है। जल संरक्षण के उपायों के कारण, भूमिगत जल स्तर 1.92 मीटर बढ़ा है।
2024 में अनंतपुर जिले में भूमिगत जल स्तर 13.36 मीटर था, जो अब प्रभावी जल प्रबंधन के चलते 11.25 मीटर तक पहुंच गया है।
मुख्यमंत्री ने कहा, "केवल पानी से ही विकास, उद्योग, कल्याण और समृद्धि संभव है। कभी मरुभूमि मानी जाने वाली अनंतपुर अब जल प्रबंधन और संरक्षण के कारण बागवानी क्षेत्र में अग्रणी बन गई है।"
उन्होंने कहा कि कई वर्षों तक अनंतपुर में पानी की कमी रही, लेकिन टीडीपी सरकार ने किसानों को सहायता और इनपुट सब्सिडी प्रदान की। उन्होंने बताया कि जिले में पानी का कुशल उपयोग सुनिश्चित करने के लिए ड्रिप इरिगेशन कार्यक्रम शुरू किया गया, जिसमें सरकार ने ड्रिप इरिगेशन उपकरण पर 90%25 तक की सब्सिडी प्रदान की।
नायडू ने याद दिलाया कि पहले प्रस्तुत माइक्रो-इरिगेशन रिपोर्ट आज पूरे देश में मानक बन गई है। वर्तमान में आंध्र प्रदेश देश में माइक्रो-इरिगेशन में नंबर एक है, जिसमें 1,031 करोड़ रुपए खर्च किए गए हैं। यही कारण है कि रायलसीमा क्षेत्र बागवानी का केंद्र बन गया है और राज्य देश में बागवानी में शीर्ष पर है।