30 अगस्त 2026
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भविष्य के युद्ध पर त्रि-सेवा मंथन: एआई, साइबर और अंतरिक्ष पर चौथा संयुक्त पाठ्यक्रम संपन्न

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भविष्य के युद्ध पर त्रि-सेवा मंथन: एआई, साइबर और अंतरिक्ष पर चौथा संयुक्त पाठ्यक्रम संपन्न

सारांश

जमीन, समुद्र और आसमान की सीमाएँ अब युद्ध की पूरी तस्वीर नहीं हैं। नई दिल्ली के मानेकशॉ सेंटर में संपन्न चौथे त्रि-सेवा भविष्य युद्ध पाठ्यक्रम ने एआई, साइबर और अंतरिक्ष को भारतीय सैन्य रणनीति के केंद्र में रखा — और पाँचवाँ संस्करण नवंबर में आ रहा है।

मुख्य बातें

चौथा त्रि-सेवा भविष्य युद्ध पाठ्यक्रम 30 अगस्त 2026 को मानेकशॉ सेंटर, नई दिल्ली में संपन्न हुआ।
चार सप्ताह के पाठ्यक्रम में एआई, क्वांटम तकनीक, साइबर युद्ध, अंतरिक्ष अभियान और बहु-क्षेत्रीय अभियान पर केंद्रित मंथन हुआ।
सीडीएस जनरल एनएस राजा सुब्रमणि ने प्रतिभागियों से सीधे संवाद किया और भविष्य के संस्करणों के लिए सुझाव माँगे।
एयर मार्शल तेजिंदर सिंह ने प्रमाणपत्र और लेफ्टिनेंट जनरल एसएस महल (सेवानिवृत्त) ने 'पीजी डिप्लोमा इन फ्यूचर वारफेयर' प्रदान किया।
पाँचवाँ संस्करण 16 नवंबर से 11 दिसंबर 2026 तक आयोजित होगा।

नई दिल्ली के मानेकशॉ सेंटर में 30 अगस्त 2026 को चौथा त्रि-सेवा भविष्य युद्ध पाठ्यक्रम सफलतापूर्वक संपन्न हुआ, जिसमें थल सेना, नौसेना और वायुसेना के अधिकारियों ने एआई, साइबर युद्ध, अंतरिक्ष अभियानों और स्वायत्त प्रणालियों जैसे उभरते युद्धक्षेत्रों पर गहन विचार-विमर्श किया। चार सप्ताह तक चले इस पाठ्यक्रम ने यह रेखांकित किया कि आधुनिक सैन्य नेतृत्व के लिए पारंपरिक प्रशिक्षण अब अपर्याप्त है।

पाठ्यक्रम का स्वरूप और प्रतिभागी

मुख्यालय एकीकृत रक्षा स्टाफ के तत्वावधान में और संयुक्त युद्ध अध्ययन केंद्र के समन्वय से आयोजित इस पाठ्यक्रम में तीनों सेनाओं के अधिकारियों के साथ-साथ विभिन्न सरकारी संगठनों, शिक्षाविदों, रक्षा उद्योग के प्रतिनिधियों, वैज्ञानिकों और रणनीतिक विचार संस्थानों के विशेषज्ञों ने भाग लिया। यह सम्मिलित भागीदारी इस पाठ्यक्रम को केवल सैन्य अभ्यास से अलग एक व्यापक राष्ट्रीय रक्षा-चिंतन का मंच बनाती है।

प्रतिभागियों को केवल विशेषज्ञ व्याख्यानों तक सीमित नहीं रखा गया — विचार-मंथन सत्र, संभावित युद्ध परिस्थितियों का अनुकरण, क्षेत्रीय दौरे और प्रतिभागियों की स्वयं की प्रस्तुतियाँ इस पाठ्यक्रम की विशेषता रहीं।

मुख्य विषय और चर्चा के क्षेत्र

पाठ्यक्रम के दौरान जिन विषयों पर केंद्रित मंथन हुआ, उनमें भू-राजनीतिक बदलाव, क्वांटम तकनीक, संज्ञानात्मक युद्ध, सूचना युद्ध, ग्रे-जोन गतिविधियाँ और बहु-क्षेत्रीय अभियान प्रमुख रहे। बहु-क्षेत्रीय अभियान का अर्थ है — जमीन, समुद्र, हवा और अंतरिक्ष में एक साथ समन्वित सैन्य कार्रवाई की क्षमता।

गौरतलब है कि यूक्रेन-रूस संघर्ष और पश्चिम एशिया की स्थितियों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि ड्रोन, साइबर हमले और सूचना युद्ध अब पारंपरिक युद्धक्षेत्र जितने ही निर्णायक हैं। इस पृष्ठभूमि में भारत का यह पाठ्यक्रम समयानुकूल रणनीतिक तैयारी का हिस्सा है।

सीडीएस की भागीदारी और सुझाव

चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल एनएस राजा सुब्रमणि ने पाठ्यक्रम में शामिल अधिकारियों से सीधे संवाद किया और उनके अनुभव जाने। उन्होंने भविष्य के संस्करणों को और प्रासंगिक बनाने के लिए नए विषयों और उभरते क्षेत्रों को पाठ्यक्रम में जोड़ने के सुझाव भी माँगे। इस दौरान तीनों सेनाओं के एकीकृत ढाँचे में परिचालन और कार्यात्मक दक्षता बढ़ाने के लिए पारंपरिक सोच से परे नए विचारों पर भी चर्चा हुई।

समापन समारोह और प्रमाणपत्र वितरण

समापन समारोह में चीफ ऑफ इंटीग्रेटेड डिफेंस स्टाफ एवं चीफ्स ऑफ स्टाफ कमेटी के चेयरमैन एयर मार्शल तेजिंदर सिंह ने प्रतिभागियों को प्रमाणपत्र प्रदान किए। लेफ्टिनेंट जनरल एसएस महल (सेवानिवृत्त) ने प्रतिभागियों को 'पीजी डिप्लोमा इन फ्यूचर वारफेयर' प्रदान किया।

रक्षा मंत्रालय के अनुसार, संयुक्त प्रशिक्षण, तकनीकी समझ, रणनीतिक दूरदृष्टि और बदलते युद्धक्षेत्र के लिए परिचालन तैयारी अब सैन्य नेतृत्व की अनिवार्य आवश्यकता बन चुकी है।

आगे क्या

इस पाठ्यक्रम का पाँचवाँ संस्करण 16 नवंबर से 11 दिसंबर 2026 तक आयोजित किया जाएगा। चौथे संस्करण की सफलता यह संकेत देती है कि भारतीय सशस्त्र बल भविष्य के बहु-आयामी युद्धक्षेत्र के लिए अपनी वैचारिक और रणनीतिक तैयारी को व्यवस्थित रूप से आगे बढ़ा रहे हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि इस वैचारिक मंथन का अनुवाद परिचालन क्षमता में कितनी तेज़ी से होता है। भारत के पड़ोस में — चीन की पीएलए पहले से ही 'इंटेलिजेंटाइज़ेशन' सिद्धांत पर काम कर रही है — यह पाठ्यक्रम ज़रूरी है, पर पर्याप्त नहीं। सालाना एक बार का चार सप्ताही पाठ्यक्रम तब तक सीमित असर करेगा जब तक इसके निष्कर्ष सेवा-स्तरीय सिद्धांत और खरीद निर्णयों में नहीं उतरते। रक्षा मंत्रालय को यह सुनिश्चित करना होगा कि 'भविष्य की सोच' केवल प्रमाणपत्र समारोहों तक न रहे।
RashtraPress
30 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

त्रि-सेवा भविष्य युद्ध पाठ्यक्रम क्या है?
यह भारतीय थल सेना, नौसेना और वायुसेना के अधिकारियों के लिए संयुक्त रूप से आयोजित एक विशेष प्रशिक्षण पाठ्यक्रम है, जो भविष्य के युद्धक्षेत्र — एआई, साइबर, अंतरिक्ष और बहु-क्षेत्रीय अभियानों — पर केंद्रित है। यह मुख्यालय एकीकृत रक्षा स्टाफ के तत्वावधान में संयुक्त युद्ध अध्ययन केंद्र द्वारा आयोजित किया जाता है।
इस पाठ्यक्रम में किन विषयों पर चर्चा हुई?
पाठ्यक्रम में एआई, क्वांटम तकनीक, साइबर युद्ध, संज्ञानात्मक युद्ध, सूचना युद्ध, स्वायत्त प्रणालियाँ, अंतरिक्ष आधारित अभियान, ग्रे-जोन गतिविधियाँ और बहु-क्षेत्रीय अभियान प्रमुख विषय रहे। भू-राजनीतिक बदलावों के संदर्भ में इन तकनीकों की रणनीतिक भूमिका पर विशेष ध्यान दिया गया।
सीडीएस जनरल राजा सुब्रमणि की इस पाठ्यक्रम में क्या भूमिका रही?
चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल एनएस राजा सुब्रमणि ने पाठ्यक्रम के प्रतिभागियों से सीधे संवाद किया और उनके अनुभव जाने। उन्होंने भविष्य के संस्करणों को अधिक प्रासंगिक बनाने के लिए नए विषयों और उभरते क्षेत्रों को पाठ्यक्रम में शामिल करने के सुझाव भी माँगे।
पाठ्यक्रम का अगला संस्करण कब होगा?
पाँचवाँ संस्करण 16 नवंबर से 11 दिसंबर 2026 तक आयोजित किया जाएगा। रक्षा मंत्रालय के अनुसार यह पाठ्यक्रम श्रृंखला सैन्य नेतृत्व की निरंतर तकनीकी और रणनीतिक तैयारी का हिस्सा है।
इस पाठ्यक्रम में केवल सेना के अधिकारी शामिल थे या अन्य भी?
नहीं, इसमें तीनों सेनाओं के अधिकारियों के साथ-साथ विभिन्न सरकारी संगठनों, शिक्षाविदों, रक्षा उद्योग के प्रतिनिधियों, वैज्ञानिकों और रणनीतिक विचार संस्थानों के विशेषज्ञ भी शामिल थे। यह बहु-हितधारक भागीदारी पाठ्यक्रम की एक विशेष पहचान है।
राष्ट्र प्रेस
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