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कसौली में भारतीय सेना का मल्टी-डोमेन युद्ध सेमिनार: AI, साइबर और सूचना युद्ध पर मंथन

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कसौली में भारतीय सेना का मल्टी-डोमेन युद्ध सेमिनार: AI, साइबर और सूचना युद्ध पर मंथन

सारांश

कसौली में सेंट्रल कमांड का यह सेमिनार सिर्फ विचार-विमर्श नहीं था — यह भारतीय सेना की उस स्वीकृति का संकेत है कि अगली लड़ाई मैदान से पहले साइबर, सूचना और संज्ञानात्मक क्षेत्र में लड़ी जाएगी। AI और हाइब्रिड युद्ध की चुनौतियाँ अब सिद्धांत की नहीं, तैयारी की माँग करती हैं।

मुख्य बातें

भारतीय सेना की सेंट्रल कमांड (सूर्य कमांड) ने 13 जून को कसौली में मल्टी-डोमेन युद्ध पर उच्चस्तरीय सेमिनार आयोजित किया।
लेफ्टिनेंट जनरल अनिंद्य सेनगुप्ता ने कहा — आधुनिक युद्ध साइबर, सूचना और संज्ञानात्मक क्षेत्रों तक विस्तृत हो चुका है।
सेमिनार में AI , एयरोस्पेस क्षमता , समुद्री शक्ति और मीडिया की भूमिका पर गहन चर्चा हुई।
विशेषज्ञों ने हाइब्रिड युद्ध के वैश्विक उदाहरणों के आधार पर भारत के लिए रणनीतिक सुझाव दिए।
रक्षा विशेषज्ञों ने इस आयोजन को भारतीय सेना की भविष्योन्मुखी तैयारी का सकारात्मक संकेत बताया।

भारतीय सेना की सेंट्रल कमांड (सूर्य कमांड) ने 13 जून को कसौली में 'भविष्य के युद्ध और भारत की बहुआयामी तैयारी' विषय पर एक उच्चस्तरीय सेमिनार आयोजित किया। इस सेमिनार में वैश्विक सुरक्षा परिदृश्य, आधुनिक युद्ध की उभरती चुनौतियों और भारत की समग्र तैयारी पर गहन विमर्श हुआ। वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों, विषय विशेषज्ञों और एक पूर्व राजनयिक की उपस्थिति ने इस आयोजन को विशेष महत्व दिया।

मुख्य घटनाक्रम

सेंट्रल कमांड के जनरल ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ लेफ्टिनेंट जनरल अनिंद्य सेनगुप्ता ने सेमिनार को संबोधित करते हुए कहा कि आधुनिक युद्ध अब केवल भौतिक क्षेत्र तक सीमित नहीं रहे। उनके अनुसार, साइबर, सूचना और संज्ञानात्मक (cognitive) क्षेत्र भी युद्ध के अनिवार्य आयाम बन चुके हैं। उन्होंने जोर दिया कि भारत को इन सभी मोर्चों पर ठोस और समन्वित तैयारी रखनी होगी।

लेफ्टिनेंट जनरल सेनगुप्ता ने नई तकनीकों को तीव्र गति से अपनाने, युद्ध के मानवीय पहलू को बनाए रखने और सूचना युद्ध तथा मनोवैज्ञानिक अभियानों की बढ़ती भूमिका पर विशेष बल दिया।

किन विषयों पर हुई चर्चा

सेमिनार की चर्चा उन वैश्विक अनिश्चितताओं पर केंद्रित रही जो भारत की सुरक्षा को प्रभावित कर सकती हैं। प्रमुख विषयों में समुद्री शक्ति, एयरोस्पेस क्षमता, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और मल्टी-डोमेन युद्ध में मीडिया की भूमिका शामिल रहे। विशेषज्ञों ने वैश्विक स्तर पर जारी हाइब्रिड युद्ध के उदाहरण प्रस्तुत करते हुए भारत के लिए रणनीतिक सुझाव भी दिए।

यह ऐसे समय में आया है जब यूक्रेन-रूस संघर्ष और अन्य वैश्विक तनावों ने स्पष्ट कर दिया है कि आधुनिक युद्ध में सूचना और साइबर आयाम पारंपरिक हथियारों जितने ही निर्णायक हो सकते हैं।

मीडिया और नैरेटिव की भूमिका

सेमिनार में विशेषज्ञों ने रेखांकित किया कि मल्टी-डोमेन युद्ध में जनमानस और वैश्विक धारणा (narrative) को आकार देने में मीडिया की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण हो गई है। हाइब्रिड युद्ध के संदर्भ में यह भी चर्चा हुई कि सूचना के मोर्चे पर कमज़ोरी सैन्य बढ़त को भी निष्प्रभावी कर सकती है।

भारतीय सेना की भविष्योन्मुखी सोच

रक्षा विशेषज्ञों ने इस सेमिनार के आयोजन को सकारात्मक संकेत माना है। गौरतलब है कि भारतीय सेना हथियारों और तकनीक के साथ-साथ मानसिक और सूचनात्मक स्तर पर भी आधुनिक युद्ध की तैयारी कर रही है। यह आयोजन सेना की एकीकृत (integrated) युद्ध क्षमताओं के विकास की व्यापक रणनीति का हिस्सा है।

आगे की राह

इस तरह के सेमिनार नीति-निर्माण और सैन्य सिद्धांत (doctrine) को परिष्कृत करने में सहायक होते हैं। भारतीय सेना लगातार आधुनिक युद्ध तकनीकों और रणनीतियों को अपनाने की दिशा में कार्यरत है, और इस सेमिनार से निकले निष्कर्ष भविष्य की क्षमता-निर्माण योजनाओं को दिशा दे सकते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि इसके समय में है — जब भारत के दो प्रमुख पड़ोसी परमाणु-सक्षम हैं और हाइब्रिड युद्ध की रणनीतियाँ पहले से सक्रिय हैं। लेकिन सवाल यह है कि सेमिनारों से निकले निष्कर्ष वास्तविक सिद्धांत और बजट आवंटन में कितनी तेज़ी से तब्दील होते हैं। भारत की रक्षा खरीद प्रक्रिया की धीमी गति और AI-एकीकरण में संरचनात्मक कमियाँ इस तैयारी की असली कसौटी हैं। सेमिनार संकल्प का प्रमाण है — क्रियान्वयन ही उसे विश्वसनीयता देगा।
RashtraPress
31 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कसौली में आयोजित सेना का मल्टी-डोमेन युद्ध सेमिनार क्या था?
भारतीय सेना की सेंट्रल कमांड (सूर्य कमांड) ने 13 जून को कसौली में 'भविष्य के युद्ध और भारत की बहुआयामी तैयारी' विषय पर यह सेमिनार आयोजित किया। इसमें AI, साइबर, एयरोस्पेस, समुद्री शक्ति और सूचना युद्ध जैसे आधुनिक युद्ध के आयामों पर चर्चा हुई।
लेफ्टिनेंट जनरल अनिंद्य सेनगुप्ता ने सेमिनार में क्या कहा?
सेंट्रल कमांड के जनरल ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ लेफ्टिनेंट जनरल अनिंद्य सेनगुप्ता ने कहा कि आधुनिक युद्ध अब भौतिक क्षेत्र तक सीमित नहीं है — साइबर, सूचना और संज्ञानात्मक क्षेत्र भी उतने ही महत्वपूर्ण हो गए हैं। उन्होंने नई तकनीकों को तेज़ी से अपनाने और एकीकृत युद्ध क्षमताओं पर बल दिया।
मल्टी-डोमेन युद्ध में मीडिया की भूमिका क्यों अहम मानी जा रही है?
विशेषज्ञों के अनुसार, हाइब्रिड युद्ध में जनमानस और वैश्विक धारणा (narrative) को आकार देने में मीडिया निर्णायक भूमिका निभाता है। सूचना के मोर्चे पर कमज़ोरी सैन्य बढ़त को भी प्रभावहीन कर सकती है, इसलिए इसे युद्ध के एक स्वतंत्र आयाम के रूप में देखा जा रहा है।
भारतीय सेना भविष्य के युद्धों के लिए कैसे तैयार हो रही है?
भारतीय सेना हथियारों और तकनीक के साथ-साथ AI, साइबर सुरक्षा, सूचना युद्ध और मनोवैज्ञानिक अभियानों के क्षेत्र में भी क्षमता-निर्माण कर रही है। इस तरह के सेमिनार सैन्य सिद्धांत (doctrine) को परिष्कृत करने और नीति-निर्माण को दिशा देने में सहायक होते हैं।
सेंट्रल कमांड (सूर्य कमांड) का मुख्यालय कहाँ है और इसका क्षेत्र क्या है?
भारतीय सेना की सेंट्रल कमांड, जिसे सूर्य कमांड भी कहा जाता है, मध्य भारत के रणनीतिक क्षेत्रों की सुरक्षा के लिए उत्तरदायी है। इसका नेतृत्व जनरल ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ करते हैं, जो वर्तमान में लेफ्टिनेंट जनरल अनिंद्य सेनगुप्ता हैं।
राष्ट्र प्रेस
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