जयपुर में संयुक्त कमांडर्स सम्मेलन: राजनाथ सिंह और CDS अनिल चौहान शामिल, ऑपरेशन सिंदूर की पहली वर्षगांठ पर फोकस
सारांश
मुख्य बातें
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह 8 मई 2026 को जयपुर में शुरू हो रहे संयुक्त कमांडर्स सम्मेलन के दूसरे संस्करण में शामिल होंगे, जिसका केंद्रीय विषय 'नए क्षेत्रों में सैन्य क्षमता' रखा गया है। यह उच्चस्तरीय सम्मेलन ऑपरेशन सिंदूर की पहली वर्षगांठ के अवसर पर आयोजित किया जा रहा है, जिसे भारत की राजनीतिक इच्छाशक्ति और सैन्य सटीकता का प्रतीक माना जाता है।
सम्मेलन में कौन-कौन शामिल
चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) जनरल अनिल चौहान भी इस सम्मेलन में उपस्थित रहेंगे। अधिकारियों के अनुसार, यह आयोजन उभरते खतरों की समीक्षा करने और भविष्य के लिए मजबूत तथा आधुनिक सैन्य क्षमता तैयार करने की रणनीति निर्धारित करने का अहम मंच बनेगा। जयपुर को इस आयोजन के लिए इसलिए चुना गया है क्योंकि सीमावर्ती राज्य होने के कारण राजस्थान ने ऑपरेशन सिंदूर में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।
मुख्य एजेंडा और फोकस क्षेत्र
सम्मेलन में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), मानव रहित प्रणालियों और पारंपरिक युद्धक्षेत्र से परे उभरते खतरों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। भारतीय सेनाएं साइबर युद्ध, अंतरिक्ष युद्ध और संज्ञानात्मक युद्ध जैसी चुनौतियों की तैयारी पर जोर दे रही हैं। यह ऐसे समय में आया है जब आधुनिक युद्ध तेजी से तकनीक-आधारित हो रहे हैं और पारंपरिक सैन्य ढाँचों को नए सिरे से परिभाषित किया जा रहा है।
सम्मेलन में आत्मनिर्भर भारत पहल को मजबूत करने, रक्षा क्षेत्र में नवाचार बढ़ाने और घरेलू रक्षा तंत्र में नागरिक-सैन्य सहयोग को बढ़ावा देने पर भी खास फोकस रहेगा। सशस्त्र बलों द्वारा विकसित उन्नत तकनीकों और भविष्य की सैन्य प्रणालियों का प्रदर्शन भी किया जाएगा।
ऑपरेशन सिंदूर की पृष्ठभूमि
ऑपरेशन सिंदूर की शुरुआत 7 मई 2025 को भारतीय सेना, वायुसेना और नौसेना के संयुक्त अभियान के रूप में हुई थी। इस अभियान के तहत पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओके) में आतंकी ठिकानों पर सटीक हमले किए गए थे। रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि इस मिशन ने तीनों सेनाओं के बीच बढ़ते तालमेल और संयुक्त रणनीति की क्षमता को स्पष्ट रूप से प्रदर्शित किया।
गौरतलब है कि यह हाल के वर्षों में सीमा पार आतंकी ढाँचे के खिलाफ भारत की सबसे बड़ी सैन्य कार्रवाइयों में से एक था। उस समय इस ऑपरेशन को लेकर राजनीतिक और कूटनीतिक स्तर पर भी तीखी प्रतिक्रियाएँ देखने को मिली थीं।
सैन्य सिद्धांत और भविष्य की रणनीति
अधिकारियों के अनुसार, सम्मेलन में अगली पीढ़ी के युद्ध और सैन्य रणनीतियों से जुड़े नए सिद्धांत पेश किए जाने की संभावना है। यह कार्यक्रम बदलती वैश्विक सुरक्षा चुनौतियों के बीच भारत की रक्षा क्षमताओं को आधुनिक बनाने की प्रतिबद्धता को रेखांकित करता है। ऑपरेशन सिंदूर की पहली वर्षगांठ पर यह सम्मेलन भारत की सुरक्षा रणनीति और आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई पर गहन चर्चा का मंच बनने की उम्मीद है।