ऑपरेशन सिंदूर के 1 वर्ष पर रक्षामंत्री राजनाथ सिंह बोले — सेनाओं के शौर्य और तकनीकी युद्धकला का अनूठा उदाहरण
सारांश
मुख्य बातें
रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने सोमवार, 4 मई 2026 को ऑपरेशन सिंदूर की पहली वर्षगाँठ पर कहा कि यह ऑपरेशन भारतीय सेनाओं के अदम्य शौर्य और आधुनिक तकनीकी युद्धकला का जीवंत प्रमाण है। नई दिल्ली में भारतीय सेना के 'नॉर्थ टेक सिम्पोजियम' को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि आतंकवादियों और उनके सरपरस्तों को मुंहतोड़ जवाब देकर हमारे सैनिकों ने पूरे देश का सिर गर्व से ऊँचा कर दिया।
ऑपरेशन सिंदूर: तकनीकी युद्धकला का उदाहरण
राजनाथ सिंह ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर अपने आप में टेक्नोलॉजी वॉरफेयर का एक ऐतिहासिक उदाहरण था। इस ऑपरेशन में आकाश तीर, आकाश मिसाइल सिस्टम और ब्रह्मोस जैसी उन्नत मिसाइल प्रणालियों के साथ-साथ अनेक आधुनिक उपकरणों का उपयोग किया गया। उन्होंने कहा कि इसने यह साबित किया कि हमारी सेनाएँ बदलाव को समझ भी रही हैं और उसे आत्मविश्वास के साथ अपना भी रही हैं।
रक्षामंत्री ने यह भी कहा कि भारत ने धैर्य दिखाते हुए केवल आतंकवादियों को ही निशाना बनाया — यह संयम भी भारतीय सेनाओं की परिपक्वता और अनुशासन का परिचायक है। उनके अनुसार, हमारी सेनाएँ क्या करने में सक्षम हैं, इसका अंदाज़ा पूरी दुनिया को है।
आधुनिक युद्ध की बदलती प्रकृति
रक्षामंत्री ने आधुनिक युद्ध प्रणाली पर विचार व्यक्त करते हुए कहा कि पहले कम से कम यह अंदाज़ा होता था कि सामने वाले की सैन्य क्षमता, प्लेटफॉर्म और डॉक्ट्रिन क्या है। लेकिन अब एक ऐसा चौंकाने वाला तत्व सामने आ रहा है जिसके बारे में पहले कभी सोचा भी नहीं जा सकता था। उन्होंने कहा कि जिन चीज़ों को हम सामान्य नागरिक जीवन का हिस्सा मानते थे, वे अब घातक हथियारों में बदल रही हैं।
इसी संदर्भ में उन्होंने कहा कि हमें सिर्फ सक्रिय (एक्टिव) नहीं, बल्कि अग्रसक्रिय (प्रोएक्टिव) भी रहना होगा और हर प्रकार की स्थिति के लिए तैयार रहना होगा।
रक्षा उत्पादन और निर्यात में रिकॉर्ड वृद्धि
राजनाथ सिंह ने आँकड़ों के हवाले से बताया कि भारत का घरेलू रक्षा उत्पादन वित्त वर्ष 2025-26 में ₹1 लाख 54 हज़ार करोड़ के रिकॉर्ड स्तर पर पहुँच गया। इसके साथ ही रक्षा निर्यात भी इसी वर्ष ₹38,424 करोड़ के रिकॉर्ड आँकड़े तक पहुँचा। उन्होंने कहा कि इसमें भारत के निजी क्षेत्र का बड़ा और अहम योगदान रहा है।
गौरतलब है कि रक्षा अनुसंधान एवं विकास (R&D) बजट का 25 प्रतिशत हिस्सा उद्योग, शिक्षा जगत और स्टार्टअप के लिए आवंटित किया जा चुका है, और अब तक इन सभी के द्वारा लगभग ₹4,500 करोड़ से अधिक का उपयोग किया जा चुका है।
डीआरडीओ और उद्योग जगत की साझेदारी
रक्षामंत्री ने कहा कि भविष्य में युद्ध कैसे लड़े जाएँगे, यह निर्णय आज की प्रयोगशालाओं में हो रहा है। सरकार ने रक्षा अनुसंधान को अपनी प्राथमिकता के केंद्र में रखा है और रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) के माध्यम से इसे अगले स्तर तक ले जाने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने यह भी बताया कि DRDO अब अकेला नहीं चल रहा — वह बड़ी संख्या में उद्योगों को भी साथ लेकर आगे बढ़ रहा है।
उन्होंने उद्योग जगत से आह्वान किया कि जिस तरह डिफेंस कॉरिडोर विकसित किए जा रहे हैं, उसी तर्ज पर एक 'नॉलेज कॉरिडोर' भी तैयार किया जाए, ताकि सभी एक-दूसरे से सीख सकें और आगे बढ़ सकें। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि उत्तर प्रदेश का सबसे लंबा गंगा एक्सप्रेसवे जैसे इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट भी भविष्य में रणनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण साबित होंगे।
वैश्विक मंच पर भारतीय रक्षा उद्योग की साख
राजनाथ सिंह ने कहा कि भारतीय रक्षा उद्योग की चर्चा अब दुनिया भर में होती है। जब भी वे विदेश यात्रा पर जाते हैं, तो भारतीय उद्योग के प्रति एक सकारात्मक दृष्टिकोण देखने को मिलता है। यह ऐसे समय में आया है जब भारत वैश्विक रक्षा आपूर्ति शृंखला में अपनी स्थिति मज़बूत करने की दिशा में तेज़ी से आगे बढ़ रहा है।