ऑपरेशन सिंदूर से मिली शिक्षाएँ: ड्रोन और काउंटर ड्रोन तकनीक की आवश्यकता

Click to start listening
ऑपरेशन सिंदूर से मिली शिक्षाएँ: ड्रोन और काउंटर ड्रोन तकनीक की आवश्यकता

सारांश

भारतीय सेना ने 'ऑपरेशन सिंदूर' से मिली शिक्षाओं के आधार पर ड्रोन और काउंटर ड्रोन प्रणालियों के उपयोग पर जोर दिया है। यह आधुनिक युद्ध तकनीकों की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

Key Takeaways

  • ऑपरेशन सिंदूर से महत्वपूर्ण सबक लिए गए हैं।
  • ड्रोन और काउंटर ड्रोन प्रणालियों का बढ़ता उपयोग।
  • वर्ष 2026 को नेटवर्किंग और डेटा केंद्रितता का वर्ष घोषित किया गया।
  • आपूर्ति श्रृंखला संकट के चलते आत्मनिर्भरता की आवश्यकता।
  • सुरक्षा चुनौतियों से निपटने के लिए एक राष्ट्रव्यापी दृष्टिकोण पर चर्चा।

नई दिल्ली, 17 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। भारतीय सेना लगातार आधुनिकीकरण की दिशा में अग्रसर है। विशेषकर, आधुनिक युद्ध तकनीकों और तरीकों पर ध्यान दिया जा रहा है। इसका परिणाम यह है कि युद्धक ड्रोन और मानवरहित हवाई प्रणालियाँ निरंतर भारतीय सेना में समाहित की जा रही हैं।

भारतीय सेना के अनुसार, 'ऑपरेशन सिंदूर' से प्राप्त शिक्षाओं और वैश्विक स्तर पर मौजूदा परिचालन स्थितियों को ध्यान में रखते हुए, मानवरहित हवाई प्रणालियों (यूएएस) और काउंटर मानव रहित हवाई प्रणालियों (सी-यूएएस) के उपयोग और उनकी परिचालन क्षमता पर ध्यान केंद्रित किया गया है।

नई दिल्ली में आयोजित आर्मी कमांडर्स कांफ्रेंस में वरिष्ठ सैन्य नेतृत्व ने इन मुद्दों पर चर्चा की। यह द्विवार्षिक सम्मेलन 13 से 16 अप्रैल तक चला, जिसमें सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी की अध्यक्षता में शीर्ष सैन्य अधिकारी शामिल हुए। इस सम्मेलन में कैबिनेट सचिव, चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ, रक्षा सचिव और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार सहित उच्चस्तरीय सरकारी अधिकारियों ने कमांडर्स को संबोधित किया।

भारतीय सेना ने 'भविष्य के लिए तैयार बल' के लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए वर्ष 2026 को नेटवर्किंग और डेटा केंद्रितता का वर्ष घोषित किया है। इस सम्मेलन में सेना के आधुनिकीकरण और युद्ध अभियानों में प्रौद्योगिकी के समावेश पर विचार-विमर्श किया गया। साथ ही, सेना की सैद्धांतिक और प्रशिक्षण संबंधी आवश्यकताओं के साथ-साथ ऑपरेशनल तत्परता बढ़ाने पर भी चर्चा की गई।

रक्षा मंत्रालय के अनुसार, बदलते भू-राजनीतिक परिदृश्य और उभरते वैश्विक, क्षेत्रीय और आंतरिक सुरक्षा संबंधी पहलुओं पर इस सम्मेलन में विचार किया गया। वैश्विक संघर्षों से लिए गए सबकों का उल्लेख करते हुए, वक्ताओं ने देश की रणनीतिक और सुरक्षा हितों के लिए कठोर शक्ति की आवश्यकता पर जोर दिया।

उन्होंने अंतर-मंत्रालयी समन्वय, नागरिक और सैन्य संस्थानों के बीच बेहतर तालमेल और जटिल सुरक्षा चुनौतियों के समन्वित राष्ट्रीय समाधान के लिए एक राष्ट्रव्यापी दृष्टिकोण पर बल दिया। चर्चा के दौरान यह बात सामने आई कि वर्तमान आपूर्ति श्रृंखला संकट को देखते हुए, रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने और दीर्घकालिक रणनीतिक लचीलापन सुनिश्चित करने के लिए स्वदेशी उत्पादन क्षमताओं में वृद्धि की तत्काल आवश्यकता है।

Point of View

NationPress
18/04/2026

Frequently Asked Questions

ऑपरेशन सिंदूर क्या है?
ऑपरेशन सिंदूर भारतीय सेना द्वारा एक विशेष सैन्य अभियान है, जिससे महत्वपूर्ण रणनीतिक सबक लिए गए हैं।
भारतीय सेना ड्रोन का उपयोग क्यों कर रही है?
भारतीय सेना आधुनिक युद्ध तकनीकों के अनुरूप युद्धक ड्रोन और मानवरहित हवाई प्रणालियों का उपयोग कर रही है।
आर्मी कमांडर्स कांफ्रेंस में क्या चर्चा हुई?
इस सम्मेलन में मानवरहित प्रणालियों और आत्मनिर्भरता को बढ़ाने पर चर्चा की गई।
वर्ष 2026 को क्या महत्वपूर्ण घोषित किया गया है?
वर्ष 2026 को नेटवर्किंग और डेटा केंद्रितता का वर्ष घोषित किया गया है।
रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता का क्या महत्व है?
आत्मनिर्भरता से देश की सुरक्षा और दीर्घकालिक रणनीतिक लचीलापन बढ़ता है।
Nation Press