ऑपरेशन सिंदूर की वर्षगांठ पर जयपुर में तीनों सेनाओं का संयुक्त कमांडर्स सम्मेलन, राजनाथ सिंह होंगे शामिल

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ऑपरेशन सिंदूर की वर्षगांठ पर जयपुर में तीनों सेनाओं का संयुक्त कमांडर्स सम्मेलन, राजनाथ सिंह होंगे शामिल

सारांश

ऑपरेशन सिंदूर की पहली वर्षगांठ पर जयपुर में तीनों सेनाओं का संयुक्त कमांडर्स सम्मेलन — यह महज़ एक समीक्षा बैठक नहीं है। AI, साइबर और अंतरिक्ष युद्ध जैसे नए मोर्चों पर रणनीति तय होगी, स्वदेशी रक्षा उद्योग को नई गति मिलेगी और भारत की भावी सैन्य दिशा की रूपरेखा खींची जाएगी।

मुख्य बातें

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह 7-8 मई 2025 को जयपुर, राजस्थान में तीनों सेनाओं के संयुक्त कमांडर्स सम्मेलन में भाग लेंगे।
सम्मेलन ऑपरेशन सिंदूर की पहली वर्षगांठ पर आयोजित हो रहा है; कमांडर्स मौजूदा परिचालन स्थिति की समीक्षा करेंगे।
सम्मेलन का केंद्रीय विषय 'नए क्षेत्रों में सैन्य क्षमता' है — AI, साइबर, अंतरिक्ष और संज्ञानात्मक युद्ध पर विशेष फोकस।
रक्षा उत्पादन में आत्मनिर्भरता, स्वदेशीकरण और सिविल-मिलिट्री तालमेल एजेंडे में प्रमुख।
रक्षा मंत्री ने 6 मई को वियतनाम के रक्षा मंत्री जनरल फान वान जियांग से मुलाकात कर द्विपक्षीय रक्षा सहयोग मजबूत करने पर सहमति जताई।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह 7-8 मई को राजस्थान के जयपुर में आयोजित होने वाले तीनों सेनाओं — भारतीय थलसेना, नौसेना और वायुसेना — के संयुक्त कमांडर्स सम्मेलन में भाग लेंगे। यह सम्मेलन विशेष महत्व रखता है क्योंकि यह ऑपरेशन सिंदूर की पहली वर्षगांठ के अवसर पर आयोजित किया जा रहा है, जिसमें सैन्य कमांडर्स मौजूदा परिचालन स्थिति की समीक्षा भी करेंगे।

सम्मेलन का मुख्य विषय और एजेंडा

यह कमांडर्स सम्मेलन 'नए क्षेत्रों में सैन्य क्षमता' विषय पर केंद्रित है। वरिष्ठ सैन्य अधिकारी आधुनिक युद्ध की बदलती प्रकृति और भविष्य की रणनीतिक चुनौतियों पर गहन मंथन करेंगे। रक्षा मंत्रालय के अनुसार, आज का युद्ध पारंपरिक सीमाओं से आगे बढ़कर तकनीक-आधारित और कहीं अधिक जटिल हो चुका है।

सम्मेलन में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), मानव रहित प्रणालियों (अनमैन्ड सिस्टम्स), तथा साइबर, अंतरिक्ष और संज्ञानात्मक युद्ध जैसे उभरते क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। इन नए आयामों में सैन्य क्षमता विकास, रणनीति निर्माण और भविष्य के लिए सुदृढ़ सैन्य बल तैयार करने की रूपरेखा तय की जाएगी।

आत्मनिर्भरता और स्वदेशीकरण पर जोर

सम्मेलन के एजेंडे में रक्षा उत्पादन में आत्मनिर्भरता और स्वदेशीकरण को प्रमुख स्थान दिया गया है। इसके तहत नवाचार को बढ़ावा देने, घरेलू रक्षा उद्योग को मजबूत करने और सिविल-मिलिट्री तालमेल को बेहतर बनाने पर विशेष ज़ोर रहेगा। रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, एक मजबूत रक्षा पारिस्थितिकी तंत्र विकसित करने के लिए आत्मनिर्भरता अनिवार्य है।

सम्मेलन के दौरान रक्षा बलों द्वारा विकसित अत्याधुनिक तकनीकों का प्रदर्शन भी किया जाएगा। साथ ही, भविष्य के युद्ध से जुड़े नए सिद्धांतों और परिचालन रणनीतियों से संबंधित दस्तावेज़ भी जारी किए जाएंगे।

ऑपरेशन सिंदूर की पृष्ठभूमि

गौरतलब है कि ऑपरेशन सिंदूर को भारत की दृढ़ इच्छाशक्ति और सैन्य क्षमता का प्रतीक माना जाता है, जिसमें सटीक और निर्णायक कार्रवाई देखने को मिली थी। इस सम्मेलन में सैन्य कमांडर्स ऑपरेशन के एक वर्ष बाद की मौजूदा स्थिति पर विस्तृत जानकारी देंगे। यह ऐसे समय में आया है जब भारत अपनी समग्र सैन्य रणनीति को नए खतरों के अनुरूप ढालने पर लगातार काम कर रहा है।

भारत-वियतनाम रक्षा सहयोग

इसी बीच, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने बुधवार, 6 मई को नई दिल्ली में वियतनाम के उप प्रधानमंत्री एवं रक्षा मंत्री जनरल फान वान जियांग से मुलाकात की। इस बैठक में दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग को और मजबूत करने पर सहमति जताई गई। राजनाथ सिंह ने कहा कि भारत और वियतनाम के बीच लंबे समय से मजबूत संबंध रहे हैं और हाल के घटनाक्रम द्विपक्षीय सहयोग में सकारात्मक प्रगति को दर्शाते हैं। उन्होंने भविष्य में इस रणनीतिक साझेदारी को और गहरा करने की आशा भी व्यक्त की।

आगे क्या होगा

सम्मेलन के समापन पर जारी होने वाले दस्तावेज़ और तकनीकी प्रदर्शन भारत की भावी सैन्य रणनीति की दिशा तय करेंगे। रक्षा विश्लेषकों का मानना है कि AI और साइबर युद्ध के क्षेत्र में उठाए जाने वाले कदम आने वाले वर्षों में भारतीय सेना की परिचालन क्षमता को नई ऊँचाई दे सकते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली परीक्षा यह होगी कि सम्मेलन में बनी रणनीतियाँ ज़मीनी क्षमता में कितनी तेज़ी से तब्दील होती हैं। स्वदेशीकरण का नारा वर्षों से गूँज रहा है, पर घरेलू रक्षा उद्योग की आपूर्ति श्रृंखला अभी भी आयात पर निर्भर है। बिना ठोस समयसीमा और जवाबदेही तंत्र के, ये दस्तावेज़ और घोषणाएँ पिछले सम्मेलनों की तरह महत्वाकांक्षी इरादों तक सीमित रह सकती हैं।
RashtraPress
14 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

तीनों सेनाओं का संयुक्त कमांडर्स सम्मेलन 2025 कब और कहाँ होगा?
यह सम्मेलन 7-8 मई 2025 को राजस्थान के जयपुर में आयोजित किया जा रहा है। इसमें रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के साथ-साथ तीनों सेनाओं — थलसेना, नौसेना और वायुसेना — के वरिष्ठ कमांडर्स भाग लेंगे।
इस सम्मेलन में ऑपरेशन सिंदूर का क्या महत्व है?
यह सम्मेलन ऑपरेशन सिंदूर की पहली वर्षगांठ के अवसर पर आयोजित हो रहा है। सैन्य कमांडर्स ऑपरेशन के एक वर्ष बाद की मौजूदा परिचालन स्थिति की समीक्षा करेंगे और भविष्य की रणनीति पर चर्चा करेंगे।
सम्मेलन में किन नए विषयों पर चर्चा होगी?
सम्मेलन का केंद्रीय विषय 'नए क्षेत्रों में सैन्य क्षमता' है। इसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, मानव रहित प्रणालियाँ, साइबर युद्ध, अंतरिक्ष और संज्ञानात्मक युद्ध जैसे उभरते क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
रक्षा उत्पादन में आत्मनिर्भरता सम्मेलन के एजेंडे में क्यों है?
रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, एक मजबूत रक्षा पारिस्थितिकी तंत्र विकसित करने के लिए स्वदेशीकरण अनिवार्य है। सम्मेलन में घरेलू रक्षा उद्योग को मजबूत करने, नवाचार को बढ़ावा देने और सिविल-मिलिट्री तालमेल बेहतर बनाने की रूपरेखा तय की जाएगी।
राजनाथ सिंह और वियतनामी रक्षा मंत्री की बैठक में क्या हुआ?
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने 6 मई को नई दिल्ली में वियतनाम के उप प्रधानमंत्री एवं रक्षा मंत्री जनरल फान वान जियांग से मुलाकात की। बैठक में दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग को और मजबूत करने तथा रणनीतिक साझेदारी को गहरा करने पर सहमति जताई गई।
राष्ट्र प्रेस
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