हल्द्वानी शुद्धिकरण विवाद पर हरीश रावत: 'राज्य और समाज दोनों शर्मसार, आरोपियों को जेल भेजो'
सारांश
मुख्य बातें
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने रविवार, 30 अगस्त को कई अहम मुद्दों पर केंद्र और राज्य सरकार को घेरा। हल्द्वानी शुद्धिकरण विवाद से लेकर आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के बयान और एनडीए में आरक्षण पर मतभेद तक, रावत ने तीखे सवाल उठाए।
हल्द्वानी शुद्धिकरण विवाद पर कड़ी प्रतिक्रिया
हरीश रावत ने कहा कि हल्द्वानी की शुद्धिकरण घटना ने राज्य और समाज दोनों को शर्मसार किया है। उन्होंने कहा, 'एक संदेश बिल्कुल साफ गया कि भाजपा राज्य में उनके लोग जब खड़गे का सम्मान नहीं कर सकते तो फिर सामान्य दलित की स्थिति क्या होगी।' रावत ने यह भी जोड़ा कि जिस तरह से शुद्धिकरण किया गया, उस पर शर्म है और इस मामले में शामिल लोगों को राज्य व दिल्ली का नेतृत्व जिस तरह बचाने की कोशिश कर रहा है, वह और अधिक शर्मनाक है। उन्होंने माँग की कि आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर उन्हें जेल भेजा जाए।
भागवत के बयान पर तीखा पलटवार
न्यूयॉर्क में आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत द्वारा मुसलमानों पर दिए गए बयान पर रावत ने कहा कि यह भागवत के अपने संगठन और उनसे जुड़ी पार्टी भारतीय जनता पार्टी (BJP) के 95 प्रतिशत से अधिक लोगों की सोच के उलट है। उन्होंने कहा, 'सबसे पहले उन्हें उन लोगों को समझाना चाहिए और पूछना चाहिए कि वे हिंदू हैं या नहीं।' रावत के अनुसार, सनातन धर्म हमेशा सबको साथ लेकर चलने वाला रहा है, लेकिन भाजपा जिस दिशा में बढ़ रही है, वह इस सोच पर आधारित नहीं है।
एनडीए में आरक्षण पर मतभेद
केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान और जीतन राम मांझी के बीच आरक्षण को लेकर इस्तीफे की माँग वाले बयानों पर रावत ने कहा कि एनडीए की सबसे बड़ी पार्टी से लेकर सहयोगी दलों तक, आरक्षण पर नीति स्पष्ट नहीं है। उन्होंने कहा, 'उनके बीच कई विरोधाभासी विचार हैं और नतीजतन उनके मंत्री आपस में लड़ रहे हैं और एक-दूसरे से इस्तीफे की माँग कर रहे हैं।' रावत ने आरोप लगाया कि अगर एनडीए का बस चलता तो वह संविधान से आरक्षण शब्द को समाप्त कर देते।
नेपाल त्रासदी पर संवेदना और सरकार से अपील
नेपाल में आई प्राकृतिक आपदा पर रावत ने गहरी संवेदना जताई। उन्होंने कहा, 'भारत के कई लोग इस हादसे का शिकार हुए हैं।' उन्होंने केंद्र सरकार से आग्रह किया कि लापता लोगों का पता लगाने में नेपाल सरकार की हरसंभव मदद की जाए।
आगे क्या
हल्द्वानी शुद्धिकरण विवाद में अभी तक आरोपियों के खिलाफ ठोस कार्रवाई न होने पर विपक्ष का दबाव बढ़ता जा रहा है। कांग्रेस के इस आक्रामक रुख से उत्तराखंड की राजनीति में आने वाले दिनों में और तनाव बढ़ने की संभावना है।