नेपाल बाढ़ राहत: भारत ने 95 टन सामग्री और 54 विशेषज्ञ भेजे, 275 भारतीय अभी भी लापता
सारांश
मुख्य बातें
भारत के विदेश मंत्रालय (MEA) ने 4 सितंबर को पुष्टि की कि बाढ़-प्रभावित नेपाल को मानवीय सहायता के तहत अब तक सात विमानों के ज़रिए लगभग 95 टन राहत सामग्री पहुँचाई जा चुकी है और बचाव अभियान में मदद के लिए 54 विशेषज्ञ कर्मी तैनात किए गए हैं। नई दिल्ली में द्विसाप्ताहिक प्रेस ब्रीफिंग में यह जानकारी देते हुए विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि भारत नेपाल की ज़रूरतों के अनुरूप सहायता जारी रखेगा।
राहत अभियान का विवरण
विदेश मंत्रालय के अनुसार, तैनात 54 कर्मियों में 30 टनल रेस्क्यू विशेषज्ञ, 19 फोरेंसिक विशेषज्ञ और 5 सदस्यीय चिकित्सा दल शामिल हैं। ये सभी टीमें नेपाली अधिकारियों के साथ समन्वय करते हुए ज़मीन पर सक्रिय हैं। 3 सितंबर को भी दो भारतीय विमान 21 टन सामग्री लेकर काठमांडू पहुँचे थे।
जायसवाल ने बताया कि आने वाले दिनों में अतिरिक्त फोरेंसिक किट, बेली ब्रिज और नेपाल सरकार द्वारा माँगी गई अन्य सामग्री भी भेजी जाएगी। यह सहायता नेपाल की माँग-आधारित ज़रूरतों के आधार पर तय की जा रही है।
लापता और बचाए गए भारतीय नागरिक
विदेश मंत्रालय के अनुसार, अब तक 275 भारतीय नागरिक लापता हैं, जबकि नेपाल में 166 भारतीयों को सुरक्षित बचाया जा चुका है। इसके अतिरिक्त, 1,907 भारतीय नागरिक चीन से सुरक्षित नेपाल पहुँच चुके हैं। चीन में आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र में अब कोई भारतीय यात्री फँसा हुआ नहीं है।
जायसवाल ने बताया कि भारत सरकार नेपाल के गृह मंत्रालय और संबंधित भारतीय राज्य सरकारों के साथ लगातार संपर्क में है और बचाए गए नागरिकों की सूची नियमित रूप से जारी की जा रही है।
आपदा की पृष्ठभूमि
नेपाल के रसुवा ज़िले में आई यह विनाशकारी अचानक बाढ़ 26 अगस्त को चीन के तिब्बत क्षेत्र में उत्पन्न हुई थी। सीमा पार बहने वाली भोटे कोशी नदी के उफान से यह तबाही नेपाल में फैली, जिसमें विदेशी नागरिकों सहित 1,000 से अधिक लोगों की जान गई और व्यापक क्षति हुई।
राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण एवं प्रबंधन प्राधिकरण (NDRRMA) के ताज़ा आँकड़ों के अनुसार, 4 सितंबर तक मृतकों की संख्या 1,252 हो चुकी थी और 4,216 लोगों से संपर्क नहीं हो पा रहा था।
भारत-नेपाल संबंधों का संदर्भ
यह ऐसे समय में आया है जब भारत और नेपाल के बीच रणनीतिक और मानवीय सहयोग को नई गहराई दी जा रही है। गौरतलब है कि भारत पड़ोसी देशों में आपदा राहत के मामले में 'फर्स्ट रिस्पॉन्डर' की भूमिका निभाता रहा है — 2015 के नेपाल भूकंप के दौरान भी भारत ने इसी तत्परता से सहायता पहुँचाई थी। वर्तमान अभियान की पैमाइश और विशेषज्ञता उस परंपरा को आगे बढ़ाती है।
आने वाले दिनों में नेपाल में पुनर्निर्माण की चुनौती और भी बड़ी होगी, और विशेषज्ञों का मानना है कि बेली ब्रिज जैसी बुनियादी ढाँचागत मदद दूरदराज़ के इलाकों तक राहत पहुँचाने में निर्णायक भूमिका निभाएगी।