नेपाल बाढ़: रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने दूतावास में शोक-पुस्तिका पर किए हस्ताक्षर, 903 शव बरामद
सारांश
मुख्य बातें
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह सोमवार, 31 अगस्त को नई दिल्ली स्थित नेपाल दूतावास पहुँचे और हाल ही में नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ में जान गँवाने वाले लोगों के प्रति भारत सरकार एवं भारत की जनता की ओर से गहरी संवेदनाएँ व्यक्त कीं। उन्होंने दूतावास में तैनात अधिकारियों से मुलाकात कर शोक-संदेश पुस्तिका पर हस्ताक्षर किए।
राजनाथ सिंह का संदेश
रक्षा मंत्री ने इस अवसर पर कहा कि भारत इस कठिन घड़ी में नेपाल के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत नेपाल में चल रहे खोज, बचाव और पुनर्वास प्रयासों में हरसंभव सहयोग देने के लिए प्रतिबद्ध है। नेपाल दूतावास ने इस भेंट की जानकारी सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म एक्स पर साझा की।
भारत की राहत कार्रवाई
बाढ़ के बाद से ही भारत ने नेपाल को ठोस सहायता प्रदान करना शुरू कर दिया है। भारतीय विदेश मंत्रालय के अनुसार, 19 सदस्यीय फोरेंसिक टीम काठमांडू पहुँचकर काम शुरू कर चुकी है। यह टीम बाढ़ में मारे गए लोगों की पहचान के लिए डीएनए सैंपल की जाँच में नेपाली अधिकारियों की सहायता कर रही है।
इसके अतिरिक्त, भारतीय टनल रेस्क्यू टीम ने चिलिमे और लांगटांग हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स में नेपाल सेना के सर्च एवं रेस्क्यू ऑपरेशन में सक्रिय भूमिका निभाई है, जहाँ करीब 898 कर्मचारी अब भी फँसे हुए हैं।
बाढ़ से तबाही के आँकड़े
नेपाल की राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण एवं प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीआरआरएमए) द्वारा सोमवार सुबह 9 बजे तक जारी आँकड़ों के अनुसार, अब तक 903 शव बरामद किए जा चुके हैं। सर्वाधिक 272 शव दक्षिणी चितवन जिले में मिले हैं।
चितवन के स्थानीय अधिकारियों ने बीमारियों के प्रसार के खतरे को देखते हुए बरामद अधिकतर शवों को देवघाट में दफ़ना दिया, जो काली गंडकी और त्रिशूली नदियों का संगम स्थल है।
लापता और फँसे लोगों की स्थिति
एनडीआरआरएमए के अनुसार, अभी भी 4,247 लोग लापता हैं, जिनमें 592 विदेशी नागरिक भी शामिल हैं। इसके अलावा, भोटेकोशी और त्रिशूली नदी क्षेत्रों की विभिन्न जलविद्युत परियोजनाओं में कार्यरत 933 कर्मचारी अब तक संपर्क में नहीं आए हैं।
अधिकारियों की टीमें भारतीय और चीनी तकनीकी विशेषज्ञों के सहयोग से सुरंगों में फँसे लोगों को निकालने के लिए निरंतर राहत एवं बचाव अभियान चला रही हैं। यह आपदा ऐसे समय में आई है जब नेपाल पहले से ही मानसूनी बाढ़ की चुनौतियों से जूझ रहा था।