31 अगस्त 2026
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नेपाल बाढ़: रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने दूतावास में शोक-पुस्तिका पर किए हस्ताक्षर, 903 शव बरामद

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नेपाल बाढ़: रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने दूतावास में शोक-पुस्तिका पर किए हस्ताक्षर, 903 शव बरामद

सारांश

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने नेपाल दूतावास पहुँचकर बाढ़ पीड़ितों के प्रति संवेदनाएँ व्यक्त कीं और भारत के समर्थन का संकल्प दोहराया। नेपाल में अब तक 903 शव बरामद, 4,247 लापता — भारत की फोरेंसिक और टनल रेस्क्यू टीमें राहत कार्य में जुटी हैं।

मुख्य बातें

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने 31 अगस्त को नई दिल्ली स्थित नेपाल दूतावास में शोक-संदेश पुस्तिका पर हस्ताक्षर किए।
एनडीआरआरएमए के अनुसार नेपाल बाढ़ में अब तक 903 शव बरामद; सर्वाधिक 272 शव चितवन जिले में मिले।
अभी भी 4,247 लोग लापता , जिनमें 592 विदेशी नागरिक शामिल हैं।
भारत की 19 सदस्यीय फोरेंसिक टीम काठमांडू में डीएनए पहचान कार्य में जुटी है।
जलविद्युत परियोजनाओं में 898 कर्मचारी अब भी फँसे; 933 कर्मचारी संपर्क से बाहर।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह सोमवार, 31 अगस्त को नई दिल्ली स्थित नेपाल दूतावास पहुँचे और हाल ही में नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ में जान गँवाने वाले लोगों के प्रति भारत सरकार एवं भारत की जनता की ओर से गहरी संवेदनाएँ व्यक्त कीं। उन्होंने दूतावास में तैनात अधिकारियों से मुलाकात कर शोक-संदेश पुस्तिका पर हस्ताक्षर किए।

राजनाथ सिंह का संदेश

रक्षा मंत्री ने इस अवसर पर कहा कि भारत इस कठिन घड़ी में नेपाल के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत नेपाल में चल रहे खोज, बचाव और पुनर्वास प्रयासों में हरसंभव सहयोग देने के लिए प्रतिबद्ध है। नेपाल दूतावास ने इस भेंट की जानकारी सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म एक्स पर साझा की।

भारत की राहत कार्रवाई

बाढ़ के बाद से ही भारत ने नेपाल को ठोस सहायता प्रदान करना शुरू कर दिया है। भारतीय विदेश मंत्रालय के अनुसार, 19 सदस्यीय फोरेंसिक टीम काठमांडू पहुँचकर काम शुरू कर चुकी है। यह टीम बाढ़ में मारे गए लोगों की पहचान के लिए डीएनए सैंपल की जाँच में नेपाली अधिकारियों की सहायता कर रही है।

इसके अतिरिक्त, भारतीय टनल रेस्क्यू टीम ने चिलिमे और लांगटांग हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स में नेपाल सेना के सर्च एवं रेस्क्यू ऑपरेशन में सक्रिय भूमिका निभाई है, जहाँ करीब 898 कर्मचारी अब भी फँसे हुए हैं।

बाढ़ से तबाही के आँकड़े

नेपाल की राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण एवं प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीआरआरएमए) द्वारा सोमवार सुबह 9 बजे तक जारी आँकड़ों के अनुसार, अब तक 903 शव बरामद किए जा चुके हैं। सर्वाधिक 272 शव दक्षिणी चितवन जिले में मिले हैं।

चितवन के स्थानीय अधिकारियों ने बीमारियों के प्रसार के खतरे को देखते हुए बरामद अधिकतर शवों को देवघाट में दफ़ना दिया, जो काली गंडकी और त्रिशूली नदियों का संगम स्थल है।

लापता और फँसे लोगों की स्थिति

एनडीआरआरएमए के अनुसार, अभी भी 4,247 लोग लापता हैं, जिनमें 592 विदेशी नागरिक भी शामिल हैं। इसके अलावा, भोटेकोशी और त्रिशूली नदी क्षेत्रों की विभिन्न जलविद्युत परियोजनाओं में कार्यरत 933 कर्मचारी अब तक संपर्क में नहीं आए हैं।

अधिकारियों की टीमें भारतीय और चीनी तकनीकी विशेषज्ञों के सहयोग से सुरंगों में फँसे लोगों को निकालने के लिए निरंतर राहत एवं बचाव अभियान चला रही हैं। यह आपदा ऐसे समय में आई है जब नेपाल पहले से ही मानसूनी बाढ़ की चुनौतियों से जूझ रहा था।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली परीक्षा ज़मीनी राहत की गति में है। भारत ने फोरेंसिक और टनल रेस्क्यू टीमें भेजी हैं — यह 'पड़ोसी प्रथम' नीति का व्यावहारिक प्रदर्शन है। हालाँकि, 898 फँसे कर्मचारियों और 4,247 लापता लोगों के आँकड़े बताते हैं कि यह संकट अभी लंबा खिंचेगा। सवाल यह है कि क्या भारत की तकनीकी सहायता उस पैमाने पर टिकी रह सकती है जो नेपाल को पुनर्वास चरण में चाहिए होगी।
RashtraPress
31 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह नेपाल दूतावास क्यों गए?
राजनाथ सिंह ने 31 अगस्त को नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ के पीड़ितों के प्रति भारत सरकार और भारत की जनता की ओर से संवेदनाएँ व्यक्त करने के लिए नई दिल्ली स्थित नेपाल दूतावास का दौरा किया। उन्होंने शोक-संदेश पुस्तिका पर हस्ताक्षर किए और भारत के समर्थन का संकल्प दोहराया।
नेपाल बाढ़ में अब तक कितने लोगों की मौत हुई और कितने लापता हैं?
एनडीआरआरएमए के सोमवार सुबह 9 बजे तक के आँकड़ों के अनुसार, 903 शव बरामद किए जा चुके हैं और 4,247 लोग अभी भी लापता हैं, जिनमें 592 विदेशी नागरिक शामिल हैं।
नेपाल बाढ़ में भारत किस प्रकार की मदद कर रहा है?
भारत ने काठमांडू में 19 सदस्यीय फोरेंसिक टीम भेजी है जो डीएनए सैंपल के ज़रिए मृतकों की पहचान में सहायता कर रही है। इसके अलावा, भारतीय टनल रेस्क्यू टीम चिलिमे और लांगटांग हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स में फँसे लोगों को निकालने के अभियान में नेपाल सेना के साथ काम कर रही है।
चितवन जिले में इतने शव क्यों मिले और उनका क्या किया गया?
दक्षिणी चितवन जिले में सर्वाधिक 272 शव बरामद हुए। बीमारियों के प्रसार के खतरे को देखते हुए स्थानीय अधिकारियों ने अधिकतर शवों को काली गंडकी और त्रिशूली नदियों के संगम स्थल देवघाट में दफ़ना दिया।
नेपाल की जलविद्युत परियोजनाओं में कितने लोग फँसे हैं?
चिलिमे और लांगटांग सहित विभिन्न हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स में करीब 898 कर्मचारी अब भी फँसे हुए हैं। इसके अतिरिक्त, भोटेकोशी और त्रिशूली नदी क्षेत्रों की जलविद्युत परियोजनाओं में काम करने वाले 933 कर्मचारी अब तक संपर्क में नहीं आए हैं।
राष्ट्र प्रेस
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