नेपाल बाढ़ त्रासदी: राजनाथ सिंह ने दूतावास जाकर जताई संवेदना, भारत ने बचाव में सहयोग का दिया भरोसा
सारांश
मुख्य बातें
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सोमवार, 31 अगस्त को नई दिल्ली स्थित नेपाल दूतावास, बाराखंभा रोड पहुँचकर 26 अगस्त की विनाशकारी बाढ़ के पीड़ितों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की। उन्होंने दूतावास की शोक पुस्तिका में संदेश दर्ज किया और स्पष्ट किया कि भारत इस कठिन घड़ी में एक करीबी मित्र और साझेदार के रूप में नेपाल के साथ अडिग रूप से खड़ा है।
बाढ़ ने मचाई व्यापक तबाही
26 अगस्त को नेपाल के कई इलाकों में अचानक आई बाढ़ ने भारी जनहानि और संपत्ति का नुकसान किया। इस आपदा की चपेट में नेपाली नागरिकों के अलावा बड़ी संख्या में विदेशी नागरिक भी आए, जिनमें भारतीय नागरिक भी शामिल हैं। बुनियादी ढाँचे को व्यापक क्षति पहुँची और खोज-बचाव अभियान अब भी जारी हैं।
राजनाथ सिंह ने क्या कहा
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भारत सरकार और देश की जनता की ओर से नेपाल की सरकार एवं वहाँ की जनता के प्रति गहरी संवेदना प्रकट की। उन्होंने कहा, 'इस त्रासदी में जिन लोगों ने अपने प्रियजनों को खोया है, भारत की संवेदनाएँ और प्रार्थनाएँ उनके परिवारों के साथ हैं।' उन्होंने बाढ़ में घायल लोगों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना भी की।
राजनाथ सिंह ने भारत-नेपाल संबंधों को महज पड़ोसी देशों के औपचारिक रिश्ते तक सीमित नहीं माना। उन्होंने इसे 'सुख-दुख के साथी' का रिश्ता बताते हुए कहा कि भारत हमेशा नेपाल के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ा रहा है और इस संकट की घड़ी में भी यही प्रतिबद्धता कायम है।
बचाव और पुनर्वास में भारत का सहयोग
रक्षा मंत्री ने भरोसा दिलाया कि भारत नेपाल में जारी खोज, बचाव और पुनर्वास प्रयासों में सक्रिय सहयोग देने के लिए प्रतिबद्ध है। यह ऐसे समय में आया है जब नेपाल में राहत कार्य अभी भी प्रारंभिक चरण में हैं और प्रभावित इलाकों तक पहुँच एक बड़ी चुनौती बनी हुई है।
गौरतलब है कि भारत और नेपाल के बीच खुली सीमा, साझा सांस्कृतिक विरासत और ऐतिहासिक संबंधों के कारण दोनों देशों के नागरिक एक-दूसरे की आपदाओं से सीधे प्रभावित होते हैं। पिछले कई वर्षों में भी भारत ने नेपाल में आई प्राकृतिक आपदाओं — विशेषकर 2015 के भूकंप — में तत्काल राहत पहुँचाई थी।
कूटनीतिक संदेश
रक्षा मंत्री का स्वयं दूतावास जाकर शोक व्यक्त करना एक महत्त्वपूर्ण कूटनीतिक संकेत है। यह भारत की 'पड़ोसी पहले' नीति के व्यावहारिक प्रदर्शन के रूप में देखा जा रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार, इस तरह के उच्चस्तरीय मानवीय संपर्क द्विपक्षीय विश्वास को मज़बूत करते हैं, खासकर तब जब क्षेत्र में अन्य शक्तियाँ भी नेपाल के साथ अपनी उपस्थिति बढ़ा रही हैं।
आने वाले दिनों में भारत की ओर से राहत सामग्री और तकनीकी सहायता की आपूर्ति पर सभी की नज़रें टिकी हैं।