नेपाल बाढ़: मृतकों की पहचान के लिए एनएफएसयू की 10 सदस्यीय डीएनए फोरेंसिक टीम रवाना, 669 की मौत, 2,000 लापता
सारांश
मुख्य बातें
गुजरात की नेशनल फोरेंसिक साइंसेज यूनिवर्सिटी (एनएफएसयू) ने 29 अगस्त 2026 को 10 सदस्यीय डीएनए फोरेंसिक टीम नेपाल रवाना की है, जो 26 अगस्त को मध्य नेपाल और नेपाल-तिब्बत सीमा क्षेत्र में आई विनाशकारी बाढ़ में जान गंवाने वाले लोगों की पहचान में सहयोग करेगी। अब तक 669 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है और करीब 2,000 लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं।
मिशन का नेतृत्व और कार्यप्रणाली
यह टीम एनएफएसयू के सेंटर ऑफ एक्सीलेंस इन डीएनए फोरेंसिक्स के प्रमुख भार्गव पटेल के नेतृत्व में काम करेगी। विशेषज्ञ बरामद शवों से डीएनए नमूने एकत्र कर उन्हें लापता व्यक्तियों के परिजनों के नमूनों से मिलाएंगे और आपदा पीड़ित पहचान (DVI) की मानक प्रक्रिया के तहत पहचान सुनिश्चित करेंगे।
एनएफएसयू के अनुसार, 'पहचान प्रक्रिया पूरी होने के बाद टीम लापता लोगों के परिवारों को उनके परिजनों के बारे में पूरी जानकारी उपलब्ध कराएगी।' यह मिशन भारत के विदेश मंत्रालय और गृह मंत्रालय की संयुक्त निगरानी में संचालित किया जाएगा।
आपदा की व्यापकता और राहत की चुनौतियाँ
26 अगस्त को आई इस भीषण बाढ़ के बाद हजारों लोगों को सुरक्षित निकाला जा चुका है। हालांकि, सड़कों, पुलों और अन्य बुनियादी ढाँचे को हुए व्यापक नुकसान के कारण प्रभावित क्षेत्रों तक राहत पहुँचाने में गंभीर कठिनाइयाँ आ रही हैं। नेपाल के अधिकारी बचाए गए और लापता लोगों की सूची तैयार करने के साथ-साथ प्रभावित जिलों में शव बरामदगी का काम लगातार जारी रखे हुए हैं।
यह ऐसे समय में आया है जब मृतकों की पहचान राहत कार्यों की सबसे बड़ी चुनौती बन चुकी है — कई परिवार अपने लापता परिजनों की पुष्टि का इंतजार कर रहे हैं।
भारतीय नागरिकों पर असर
इस आपदा से बड़ी संख्या में भारतीय नागरिक भी प्रभावित हुए हैं। विदेश मंत्रालय ने 28 अगस्त की अपनी ब्रीफिंग में कहा था कि बाढ़ प्रभावित भारतीय नागरिकों का पता लगाने और उनकी सुरक्षित वापसी के प्रयास लगातार जारी हैं। विशेष रूप से गुजरात से जुड़े 25 लोगों के लापता होने की सूचना है, जिनमें कुछ विदेशी नागरिकता रखने वाले लोग भी शामिल हैं।
एनएफएसयू की विशेषज्ञता और पूर्व अनुभव
गौरतलब है कि एनएफएसयू इस प्रकार के मिशनों में अनुभवी है। पिछले वर्ष 12 जून को हुए एआई-171 विमान हादसे के बाद मृतकों की डीएनए पहचान महज 10 दिनों में पूरी कर ली गई थी — जो संस्था की त्वरित कार्यक्षमता का प्रमाण है। इसके अलावा, एनएफएसयू के फोरेंसिक विशेषज्ञ अमेरिका के रक्षा विभाग के साथ मिलकर द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान भारत में लापता हुए अमेरिकी सैनिकों की पहचान में भी सहयोग कर चुके हैं, जिसके तहत तीन सैनिकों के अवशेष बरामद किए गए थे।
विश्वविद्यालय के पास मानव पहचान और आपदा पीड़ित पहचान के क्षेत्र में विशेष शैक्षणिक एवं तकनीकी विशेषज्ञता उपलब्ध है। आने वाले दिनों में टीम की रिपोर्ट के आधार पर लापता परिवारों को राहत मिलने की उम्मीद है।