भारत ने श्रीलंका के मोनारागला जिला अस्पताल को आरओ वाटर प्लांट भेंट किया, द्विपक्षीय स्वास्थ्य सहयोग मजबूत
सारांश
मुख्य बातें
भारत की कार्यवाहक उच्चायुक्त मैत्रेयी कुलकर्णी ने 29 अगस्त 2026 को मोनारागला जिला सामान्य अस्पताल, श्रीलंका में एक आरओ (रिवर्स ऑस्मोसिस) जल शोधन संयंत्र का उद्घाटन किया। यह संयंत्र भारत की जनता की ओर से श्रीलंका को एक उपहार के रूप में प्रदान किया गया है, जिससे अस्पताल के मरीजों, आगंतुकों और स्वास्थ्यकर्मियों को स्वच्छ एवं सुरक्षित पेयजल सुनिश्चित होगा।
उद्घाटन समारोह और उपस्थित गणमान्य
उद्घाटन समारोह में श्रीलंका के व्यापार, वाणिज्य, खाद्य सुरक्षा और सहकारी विकास उपमंत्री आरएम जयवर्धने भी उपस्थित रहे। हंबनटोटा स्थित भारतीय वाणिज्य दूतावास ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर इस आयोजन की जानकारी साझा करते हुए बताया कि यह पहल स्वास्थ्य क्षेत्र में भारत-श्रीलंका के विकास सहयोग को और सुदृढ़ करती है।
दक्षिणी प्रांत के राज्यपाल से मुलाकात
इससे एक दिन पूर्व, 28 अगस्त को कार्यवाहक उच्चायुक्त मैत्रेयी कुलकर्णी ने दक्षिणी प्रांत के राज्यपाल प्रोफेसर सुसिरिपाला मानवाडु से भेंट की। इस बैठक में भारत-श्रीलंका के मध्य चल रही विविध परियोजनाओं पर विचार-विमर्श हुआ, विशेष रूप से सांस्कृतिक, शैक्षणिक और जन-संपर्क कार्यक्रमों पर। वाणिज्य दूतावास के अनुसार, दोनों पक्षों ने दक्षिणी प्रांत में जारी द्विपक्षीय साझेदारी की समीक्षा की और नए सहयोग के अवसर तलाशे।
भारत-श्रीलंका फाउंडेशन की 41वीं बोर्ड बैठक
इसी क्रम में, 27 अगस्त को श्रीलंका में भारत के उच्चायुक्त संतोष झा ने नई दिल्ली में आयोजित भारत-श्रीलंका फाउंडेशन की 41वीं बोर्ड बैठक की सह-अध्यक्षता की। इस बैठक में भारत में श्रीलंका की उच्चायुक्त माहिशिनी कोलोन के साथ-साथ बोर्ड सदस्य मोहन कुमार, अशोक मलिक और प्रसाद करियावासम भी शामिल हुए।
उच्चायुक्त संतोष झा ने एक्स पर जानकारी देते हुए बताया कि बैठक में फाउंडेशन की गतिविधियों की समीक्षा की गई तथा शिक्षा, संस्कृति, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी सहित अनेक क्षेत्रों में द्विपक्षीय संबंधों को और प्रगाढ़ बनाने के लिए नए परियोजना प्रस्तावों पर चर्चा हुई।
आम जनता और स्वास्थ्य सेवाओं पर असर
मोनारागला जिले में स्थापित यह आरओ संयंत्र एक व्यावहारिक कदम है जो सीधे तौर पर अस्पताल में आने वाले मरीजों और कर्मचारियों के दैनिक जीवन को प्रभावित करेगा। यह ऐसे समय में आया है जब भारत, श्रीलंका के साथ अपने संबंधों को आर्थिक पुनर्निर्माण और मानवीय सहायता के धरातल पर नए सिरे से मजबूत कर रहा है। गौरतलब है कि श्रीलंका हाल के वर्षों में गंभीर आर्थिक संकट से उबरने की प्रक्रिया में है और भारत इस दौरान उसके सबसे बड़े सहयोगियों में रहा है।
आगे क्या
भारत-श्रीलंका फाउंडेशन की बोर्ड बैठक में स्वीकृत नए परियोजना प्रस्तावों के क्रियान्वयन की दिशा में आने वाले महीनों में ठोस कदम अपेक्षित हैं। दक्षिणी प्रांत में सहयोग के नए अवसरों पर हुई चर्चा से संकेत मिलता है कि दोनों देशों के बीच जमीनी स्तर पर विकास साझेदारी और विस्तृत होगी।