भारत-श्रीलंका रक्षा सचिव स्तरीय बैठक: द्विपक्षीय साझेदारी मजबूत करने पर सहमति, स्वास्थ्य क्षेत्र में भी सहयोग
सारांश
मुख्य बातें
रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह ने गुरुवार, 16 जुलाई को नई दिल्ली में श्रीलंका के रक्षा मंत्रालय के सचिव, एयर वाइस मार्शल (सेवानिवृत्त) संपथ थुयाकोंथा से मुलाकात की। इस उच्चस्तरीय बैठक में दोनों पक्षों ने द्विपक्षीय रक्षा सहयोग को और गहरा करने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। भारत के रक्षा मंत्रालय ने इस बैठक की जानकारी एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर साझा की।
बैठक में क्या हुआ
दोनों पक्षों ने द्विपक्षीय रक्षा सहयोग योजना के तहत अब तक हुई प्रगति की विस्तृत समीक्षा की। आपसी हित के क्षेत्रों में रक्षा सहयोग को और अधिक सुदृढ़ करने पर सहमति जताई गई। यह बैठक ऐसे समय में हुई है जब भारत और श्रीलंका के बीच रणनीतिक और मानवीय सहयोग के कई मोर्चों पर गतिविधियाँ तेज हुई हैं।
पिछले महीनों में रक्षा सहायता
गौरतलब है कि इससे पहले अप्रैल 2026 में भारत ने श्रीलंका तटरक्षक बल को दो पर्सनल वाटरक्राफ्ट और सुरक्षा उपकरण सौंपे थे। इस सहायता से तटीय क्षेत्रों में खोज एवं बचाव अभियानों की क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। इसके अतिरिक्त, 24 अप्रैल को भारत ने अपनी 'आरोग्य मैत्री' पहल के तहत श्रीलंका को दो 'भीष्म' क्यूब भी सौंपे, जो भारत की निरंतर मानवीय सहायता का हिस्सा हैं।
स्वास्थ्य क्षेत्र में बड़ा समझौता
रक्षा सहयोग के साथ-साथ स्वास्थ्य के मोर्चे पर भी एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया। श्रीलंका में भारत के उच्चायुक्त संतोष झा और श्रीलंका के स्वास्थ्य मंत्रालय के सचिव डॉ. अनिल जासिंघे ने एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए। इस एमओयू के तहत भारत, देनियाया के बेस अस्पताल को आधुनिक चिकित्सा उपकरण उपलब्ध कराने के लिए एसएलआर 60 करोड़ (600 मिलियन श्रीलंकाई रुपए) की अनुदान सहायता देगा।
उच्चायुक्त संतोष झा ने एक्स पर लिखा कि यह एमओयू भारत-श्रीलंका के बीच क्लाइमेट-रेज़िलिएंट स्वास्थ्य सेवाओं के लिए साझेदारी का हिस्सा है। इस अनुदान से अस्पताल के इमरजेंसी विभाग, ऑपरेशन थिएटर, हाई डिपेंडेंसी यूनिट और स्पेशल केयर बेबी यूनिट जैसे महत्वपूर्ण विभागों को अत्याधुनिक उपकरण मिलेंगे।
आम जनता पर असर
देनियाया का बेस अस्पताल श्रीलंका के एक महत्वपूर्ण क्षेत्र की स्वास्थ्य सेवाओं का केंद्र है। इस अनुदान से न केवल अस्पताल को आधुनिक उपकरण मिलेंगे, बल्कि इसे एक सुरक्षित और आपदा-रोधी स्थान पर स्थानांतरित करने में भी सहायता मिलेगी, जिससे वहाँ के नागरिकों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएँ मिल सकेंगी।
क्या होगा आगे
भारत और श्रीलंका के बीच यह बहुआयामी सहयोग — रक्षा, तटरक्षक क्षमता निर्माण, मानवीय सहायता और स्वास्थ्य सेवा — दोनों देशों के बीच संबंधों की गहराती रणनीतिक साझेदारी को दर्शाता है। आने वाले समय में द्विपक्षीय रक्षा सहयोग योजना के तहत नए कदमों की उम्मीद है।