श्रीलंका की 19 महिला सांसदों ने भारत दौरे की सीख उच्चायुक्त संतोष झा से साझा की
सारांश
मुख्य बातें
श्रीलंका की 19 महिला सांसदों के प्रतिनिधिमंडल ने 12 जून 2026 को कोलंबो में भारत के उच्चायुक्त संतोष झा से भेंट की और मई 2026 में हुए भारत दौरे से प्राप्त अनुभव एवं सीख साझा कीं। यह प्रतिनिधिमंडल श्रीलंका की महिला सांसदों का भारत का पहला आधिकारिक दौरा था, जो 10 से 16 मई 2026 के बीच संपन्न हुआ।
दौरे का उद्देश्य और संगठन
इस दौरे का आयोजन पार्लियामेंट्री रिसर्च एंड ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट फॉर डेमोक्रेसीज (PRIDE) ने भारत सरकार के विदेश मंत्रालय के सहयोग से किया था। प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व श्रीलंका की महिला एवं बाल मामलों की मंत्री सरोजा सावित्री पॉलराज ने किया। दल में 15 सांसद और श्रीलंका की संसद के 4 वरिष्ठ अधिकारी शामिल थे, जिनमें सेक्रेटरी जनरल भी थे।
मुख्य विषय और चर्चा के बिंदु
कोलंबो स्थित भारतीय उच्चायोग ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जानकारी देते हुए बताया कि बैठक में जेंडर बजटिंग, महिलाओं और बच्चों के पोषण, महिला-नेतृत्व वाले विकास, डिजिटलीकरण और सामुदायिक भागीदारी में सर्वोत्तम प्रथाओं पर विस्तृत चर्चा हुई। भारत दौरे के दौरान प्रतिनिधिमंडल को दिल्ली पुलिस, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और महिला स्वयं सहायता समूहों के साथ सीधे संवाद का अवसर मिला।
भारत में प्रमुख मुलाकातें
भारत प्रवास के दौरान प्रतिनिधिमंडल ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से भेंट की। केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री अन्नपूर्णा देवी ने भी प्रतिनिधिमंडल का स्वागत किया। इसके अलावा, दल ने दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता से भी मुलाकात की। इन संवादों में महिला सशक्तिकरण, मातृ एवं शिशु कल्याण, केयर इकॉनमी पहल और राजनीति व शासन में महिला नेतृत्व जैसे विषयों पर सहयोग बढ़ाने पर सहमति बनी।
द्विपक्षीय साझेदारी का संदर्भ
यह दौरा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और श्रीलंका के राष्ट्रपति अनुरा कुमारा दिसानायके के साझा विज़न के अनुरूप आयोजित किया गया, जिसका लक्ष्य दोनों देशों की महिला नेताओं के बीच संसदीय सहयोग को गहरा करना है। उच्चायोग के अनुसार, इस दौरे ने समावेशी और टिकाऊ विकास को आगे बढ़ाने में संस्थागत सहयोग और महिला-नेतृत्व वाले बदलाव के महत्व को रेखांकित किया।
आगे की राह
यह पहला दौरा भविष्य में और अधिक संसदीय आदान-प्रदान की नींव रखता है। दोनों देशों के बीच शासन मॉडल, सामाजिक कल्याण कार्यक्रमों और महिला सशक्तिकरण नीतियों में अनुभव साझा करने की यह पहल भारत-श्रीलंका संबंधों को एक नया आयाम देती है।