27 अगस्त 2026
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नेपाल बाढ़: 258 शव बरामद, भारत की मदद पर आरएसपी सांसद मनीष झा बोले — 'बड़े भाई जैसा भरोसा'

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नेपाल बाढ़: 258 शव बरामद, भारत की मदद पर आरएसपी सांसद मनीष झा बोले — 'बड़े भाई जैसा भरोसा'

सारांश

नेपाल में भोटेकोशी नदी की विनाशकारी बाढ़ ने 258 लोगों की जान ली है और 13,295 सुरक्षाकर्मी राहत में जुटे हैं। इस संकट में भारत की त्वरित मदद को आरएसपी सांसद मनीष झा ने 'बड़े भाई का भरोसा' कहा और भारत-चीन-नेपाल के बीच स्थायी आपदा सहयोग तंत्र की माँग उठाई।

मुख्य बातें

नेपाल में भोटेकोशी नदी की बाढ़ के बाद 258 शव बरामद, कई जिलों में तलाशी जारी।
बचाव में 13,295 सुरक्षाकर्मी तैनात — 7,250 नेपाल पुलिस , 4,200 सेना , 1,845 एपीएफ ।
हेलीकॉप्टरों की 69 उड़ानों से 351 लोग सुरक्षित निकाले गए।
आरएसपी सांसद मनीष झा ने भारत की सहायता को 'बड़े भाई की भूमिका' बताया।
आरएसपी चेयरमैन राबी लामिछाने ने भारत, चीन और नेपाल के त्रिपक्षीय सहयोग की माँग की।
प्रधानमंत्री बालेन शाह ने देशवासियों से एकजुटता की अपील की।

नेपाल के कई जिलों में 27 अगस्त 2026 को भोटेकोशी नदी में आई विनाशकारी बाढ़ के बाद अब तक 258 शव बरामद किए जा चुके हैं और बचाव अभियान जारी है। इस संकट की घड़ी में भारत की ओर से मिल रही सहायता की सराहना करते हुए नेपाल की सत्ताधारी राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (आरएसपी) के सांसद मनीष झा ने कहा कि भारत का यह समर्थन एक 'बड़े भाई' की भूमिका को दर्शाता है।

मुख्य घटनाक्रम

राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण एवं प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीआरआरएमए) के ताज़ा आँकड़ों के अनुसार, बरामद 258 शवों में रसुवा से 2, नुवाकोट से 12, धादिंग से 27, गोरखा से 20, चितवन से 108, तनहुं से 12, नवलपरासी पूर्व से 63 और नवलपरासी पश्चिम से 15 शव शामिल हैं। गृह मंत्रालय के अनुसार, बचाव अभियान में कुल 13,295 सुरक्षाकर्मी तैनात किए गए हैं — जिनमें 7,250 नेपाल पुलिस, 4,200 सेना और 1,845 सशस्त्र पुलिस बल नेपाल (एपीएफ) के जवान शामिल हैं।

सड़क संपर्क कई इलाकों में बाधित होने के कारण बचाव दल हवाई और जमीनी दोनों मार्गों से काम कर रहे हैं। सेना और निजी एयरलाइंस के हेलीकॉप्टरों ने अब तक 69 उड़ानें भरी हैं, जिससे उच्च जोखिम वाले क्षेत्रों में फंसे 351 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुँचाया जा चुका है।

भारत की भूमिका पर सांसद मनीष झा का बयान

आरएसपी सांसद मनीष झा ने भारत की सहायता को ऐतिहासिक संदर्भ में रखते हुए कहा, 'मैंने यह कई बार देखा है। मैंने भूकंप के दौरान देखा है और मैंने पड़ोसी जिले में आई बाढ़ के दौरान भी देखा है। उस समय भी, वह भारत के उत्तरी हिस्से को लेकर बहुत ध्यान रखते थे और चिंतित थे, और हमें जिस तरह का समर्थन मिल रहा है, उससे एक बड़े भाई की भूमिका का पता चलता है। इससे हमें एक तरह का भरोसा भी मिलता है कि हमारा एक अच्छा पड़ोसी है।'

झा ने यह भी कहा कि नेपाल की अपनी सीमाएँ हैं और इस आपदा से निपटने के लिए क्षेत्रीय सहयोग अनिवार्य है। उन्होंने बताया कि आरएसपी के चेयरमैन राबी लामिछाने ने भी अपने भाषण में भारत, चीन और नेपाल के एकजुट होकर काम करने की ज़रूरत पर बल दिया था।

त्रिपक्षीय सहयोग की माँग

सांसद झा ने कहा, 'हम तीन अलग-अलग देश हैं, लेकिन हम हिमालय को शेयर करते हैं, इसलिए इस आपदा का तीनों देशों से कनेक्शन है।' उन्होंने बताया कि चीनी विदेश मंत्री ने भी एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट कर आपदा-पूर्व सूचना तंत्र के लिए मिलकर काम करने की सहमति जताई है। यह ऐसे समय में आया है जब हिमालयी क्षेत्र में जलवायु परिवर्तन के कारण बाढ़ और भूस्खलन की घटनाएँ लगातार बढ़ रही हैं।

नेपाल सरकार की प्रतिक्रिया

नेपाल के प्रधानमंत्री बालेंद्र उर्फ बालेन शाह ने देशवासियों से एकजुट होकर इस संकट का सामना करने की अपील की है। गौरतलब है कि रसुवा जिले में भोटेकोशी नदी में आई बाढ़ ने सबसे पहले व्यापक तबाही मचाई, जिसके बाद प्रभावित जिलों की संख्या तेज़ी से बढ़ती गई।

आगे की राह

बचाव और राहत अभियान अभी भी जारी है और कई जिलों में लापता लोगों की तलाश की जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस स्तर की आपदा में भारत-नेपाल-चीन के बीच एक स्थायी पूर्व-चेतावनी तंत्र की स्थापना समय की माँग है, ताकि भविष्य में जनहानि को कम किया जा सके।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि क्या यह भावनात्मक एकजुटता किसी ठोस त्रिपक्षीय आपदा-प्रबंधन ढाँचे में बदलेगी। भारत, नेपाल और चीन हिमालयी जल-तंत्र साझा करते हैं, फिर भी तीनों के बीच कोई बाध्यकारी पूर्व-चेतावनी संधि नहीं है। जलवायु परिवर्तन के कारण ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड (GLOF) की आवृत्ति बढ़ रही है — ऐसे में चीनी विदेश मंत्री की एक्स पोस्ट और नेपाली नेताओं के भाषण पर्याप्त नहीं हैं। बिना संस्थागत तंत्र के, हर बाढ़ के बाद यही चक्र दोहराया जाएगा: तबाही, श्रद्धांजलि, और भुला दिया जाना।
RashtraPress
27 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

नेपाल बाढ़ 2026 में अब तक कितनी मौतें हुई हैं?
एनडीआरआरएमए के ताज़ा आँकड़ों के अनुसार, भोटेकोशी नदी में आई बाढ़ के बाद विभिन्न जिलों से कुल 258 शव बरामद किए गए हैं। सबसे अधिक 108 शव चितवन जिले से मिले हैं।
नेपाल बाढ़ राहत में कितने सुरक्षाकर्मी तैनात हैं?
गृह मंत्रालय के अनुसार कुल 13,295 सुरक्षाकर्मी तैनात हैं — 7,250 नेपाल पुलिस, 4,200 सेना और 1,845 सशस्त्र पुलिस बल (एपीएफ) के जवान। हेलीकॉप्टरों की 69 उड़ानों से 351 लोगों को बचाया जा चुका है।
आरएसपी सांसद मनीष झा ने भारत के बारे में क्या कहा?
मनीष झा ने कहा कि भारत की ओर से मिल रहा समर्थन 'बड़े भाई की भूमिका' को दर्शाता है और इससे नेपाल को भरोसा मिलता है कि उसका एक अच्छा पड़ोसी है। उन्होंने भूकंप और पिछली बाढ़ों में भी भारत की मदद का उल्लेख किया।
नेपाल बाढ़ में भारत, चीन और नेपाल के सहयोग की माँग क्यों उठी?
तीनों देश हिमालय साझा करते हैं और इस क्षेत्र में आने वाली आपदाएँ सभी को प्रभावित करती हैं। आरएसपी चेयरमैन राबी लामिछाने ने कहा कि तीनों देशों को मिलकर काम करना होगा, और चीनी विदेश मंत्री ने भी आपदा-पूर्व सूचना तंत्र के लिए सहयोग पर सहमति जताई है।
नेपाल में बाढ़ से सबसे ज़्यादा प्रभावित जिले कौन से हैं?
एनडीआरआरएमए के आँकड़ों के अनुसार, चितवन (108 शव), नवलपरासी पूर्व (63), धादिंग (27), गोरखा (20), नुवाकोट (12), तनहुं (12), नवलपरासी पश्चिम (15) और रसुवा (2) सर्वाधिक प्रभावित जिले हैं।
राष्ट्र प्रेस
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