नेपाल बाढ़: फाफ डु प्लेसिस ने जताया दुख, 626 मौतें और 2,426 लापता
सारांश
मुख्य बातें
दक्षिण अफ्रीका के पूर्व कप्तान फाफ डु प्लेसिस ने नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ पर गहरी संवेदनाएं व्यक्त की हैं। उन्होंने इस प्राकृतिक आपदा को 'भयानक' बताते हुए पीड़ित परिवारों और समुदायों के साथ अपनी प्रार्थनाएं साझा कीं। अब तक 626 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि 2,426 लोग अभी भी लापता हैं।
डु प्लेसिस का नेपाल से भावनात्मक जुड़ाव
फाफ डु प्लेसिस ने पिछले वर्ष नेपाल प्रीमियर लीग (NPL) में विराटनगर किंग्स की ओर से खेलते हुए नेपाल में समय बिताया था। उन्होंने वहाँ के लोगों की दयालुता और देश की प्राकृतिक सुंदरता को करीब से अनुभव किया था। उसी व्यक्तिगत अनुभव की पृष्ठभूमि में उनकी संवेदनाएं और भी गहरी महसूस होती हैं।
शनिवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में डु प्लेसिस ने लिखा, 'मैं भाग्यशाली था कि पिछले साल नेपाल जा सका और वहाँ के लोगों की दयालुता और देश की अद्भुत सुंदरता को खुद अनुभव कर सका। जो हुआ है, उसे देखकर बहुत दुख होता है। मेरी संवेदनाएं और प्रार्थनाएं प्रभावित सभी लोगों और ऐसे दिल दहला देने वाले नुकसान का सामना कर रहे परिवारों और समुदायों के साथ हैं।'
आपदा का विस्तार और बचाव कार्य
यह संदेश ऐसे समय में आया है जब नेपाल-तिब्बत सीमा क्षेत्र में आई विनाशकारी बाढ़ के बाद पूरे नेपाल में खोज, बचाव और राहत अभियान तेज़ गति से जारी हैं। बचाव दलों ने 187 विदेशियों सहित लगभग 4,451 फंसे हुए लोगों को सुरक्षित निकाला है। 1,700 से अधिक घायल लोग आपातकालीन चिकित्सा सुविधाओं में उपचाराधीन हैं।
लापता लोगों में सुरक्षाबल और सरकारी कर्मचारी भी शामिल हैं — नेपाल पुलिस के 27 जवान, नेपाल सेना के 45 जवान, सशस्त्र पुलिस बल के 13 जवान, सीमा शुल्क कार्यालय के 15 कर्मचारी और आव्रजन कार्यालय के 4 कर्मचारी। नेपाल सेना ने राहत कार्यों की कमान संभालने के लिए लगभग 6,700 जवान तैनात किए हैं।
भारत की राहत सहायता
काठमांडू के औपचारिक अनुरोध के बाद भारत ने तत्काल सहायता प्रदान की। बुधवार से नेपाल के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में 62 टन मानवीय राहत सामग्री भेजी गई है। इसके साथ चिकित्सा कर्मियों और विशेष सुरंग बचाव विशेषज्ञों सहित 11 सदस्यीय भारतीय दल भी राहत कार्यों में सहयोग के लिए नेपाल पहुँच चुका है।
भारत से भेजी गई राहत सामग्री में टेंट, कंबल, हाइजीन किट, सोलर लैंप, पानी निकालने वाले पंप, किचन सेट, जनरेटर सेट, 8 टन दवाएं और 1 टन खाद्य सामग्री शामिल है। यह सहायता भारत-नेपाल के पड़ोसी संबंधों की परंपरागत मज़बूती को दर्शाती है।
आगे की स्थिति
गौरतलब है कि नेपाल में बाढ़ और भूस्खलन की घटनाएं हर मानसून सीज़न में भारी तबाही मचाती हैं, लेकिन आँकड़ों के अनुसार इस बार का संकट अपने इतिहास की सबसे बड़ी प्राकृतिक आपदाओं में से एक बताया जा रहा है। राहत एजेंसियाँ अभी भी दूरदराज़ के इलाकों तक पहुँचने का प्रयास कर रही हैं, और लापता लोगों की संख्या में बदलाव की आशंका बनी हुई है।