नेपाल बाढ़: रसुवा पीड़ितों के DNA विश्लेषण में भारतीय फोरेंसिक विशेषज्ञ देंगे साथ, चौथी राहत उड़ान पहुंची
सारांश
मुख्य बातें
भारत के राजदूत नवीन श्रीवास्तव ने रविवार, 30 अगस्त को काठमांडू में तैनात भारतीय फोरेंसिक टीम के सदस्यों से मुलाकात की। यह विशेषज्ञ दल रसुवा जिले में 26 अगस्त को आई विनाशकारी अचानक बाढ़ में जान गंवाने वाले पीड़ितों के शवों की पहचान के लिए DNA सैंपल विश्लेषण में नेपाली सहयोगियों के साथ मिलकर काम करेगा। राजदूत श्रीवास्तव ने स्पष्ट किया कि भारत नेपाल में जारी बचाव और राहत अभियान में पूरी मजबूती से सहयोग देता रहेगा।
चौथी राहत उड़ान का काठमांडू आगमन
भारतीय फोरेंसिक टीम चौथी भारतीय राहत उड़ान से काठमांडू पहुंची। इस उड़ान में 11 टन राहत सामग्री के साथ-साथ तकनीकी कर्मचारी और विशेष उपकरण भी भेजे गए। भारतीय विदेश मंत्रालय ने बताया कि यह सामग्री नेपाल के संबंधित अधिकारियों को सौंप दी गई है।
इस खेप में एक टनल टेक्निकल टीम भी शामिल थी, जो खोज और बचाव उपकरणों से लैस है। राहत सामग्री में कंबल, स्लीपिंग बैग, तिरपाल, प्लास्टिक शीट और हाइजीन किट शामिल हैं — जो बाढ़ प्रभावित इलाकों में तत्काल जरूरत की वस्तुएं हैं।
DNA विश्लेषण की अहमियत
भारतीय विदेश मंत्रालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जानकारी दी कि फोरेंसिक विशेषज्ञ नेपाली सहयोगियों के साथ मिलकर DNA सैंपल के विश्लेषण में सहायता करेंगे। बाढ़ की विभीषिका में बड़ी संख्या में शव बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए हैं, जिससे पारंपरिक तरीकों से पहचान करना अत्यंत कठिन हो गया है। ऐसे में DNA तकनीक ही सबसे विश्वसनीय माध्यम बनकर उभरी है।
यह ऐसे समय में आया है जब 2,498 लोग अभी भी संपर्क से बाहर हैं, जिनमें 589 विदेशी नागरिक भी शामिल हैं। शवों की सटीक पहचान न केवल परिवारों को राहत देती है, बल्कि कानूनी और प्रशासनिक प्रक्रियाओं के लिए भी आवश्यक है।
बाढ़ की तबाही: आंकड़े और स्थिति
नेपाल के राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण और प्रबंधन प्राधिकरण (NDRRMA) के अनुसार, 26 अगस्त को आई भीषण बाढ़ में अब तक 734 लोगों की जान जा चुकी है। यह आंकड़ा हर गुजरते दिन के साथ बढ़ता जा रहा है क्योंकि दूरदराज के इलाकों तक पहुंच अभी भी चुनौतीपूर्ण बनी हुई है।
गौरतलब है कि रसुवा जिला हिमालय की तलहटी में स्थित है, जहां अचानक आई बाढ़ (फ्लैश फ्लड) का खतरा मानसून के दौरान सबसे अधिक रहता है। यह क्षेत्र तिब्बत सीमा के निकट होने के कारण बचाव अभियानों के लिए भौगोलिक रूप से जटिल है।
भारत-नेपाल सहयोग: राजदूत का बयान
राजदूत नवीन श्रीवास्तव ने एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा कि चौथी राहत उड़ान से आए भारतीय फोरेंसिक टीम के सदस्यों से मुलाकात हुई। उन्होंने कहा कि ये विशेषज्ञ रसुवा की दुखद बाढ़ में जान गंवाने वालों के DNA सैंपल के विश्लेषण में नेपाली सहयोगियों के साथ काम करेंगे और भारत नेपाल के राहत प्रयासों में मजबूती से साथ खड़ा रहेगा।
यह पहली बार नहीं है जब भारत ने किसी प्राकृतिक आपदा में नेपाल को फोरेंसिक सहायता दी हो। दोनों देशों के बीच आपदा प्रबंधन सहयोग की एक लंबी परंपरा रही है, जो इस संकट की घड़ी में एक बार फिर सामने आई है।
आगे की राह
बचाव और राहत अभियान अभी जारी है। फोरेंसिक टीम के काम में कुछ सप्ताह लग सकते हैं, क्योंकि DNA विश्लेषण एक जटिल और समय-साध्य प्रक्रिया है। नेपाल सरकार और भारत दोनों मिलकर यह सुनिश्चित करने की कोशिश कर रहे हैं कि लापता लोगों के परिजनों को जल्द से जल्द सही जानकारी मिल सके।