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मोदी के रहते आरक्षण अटल है: भारतीय बौद्ध संघ प्रमुख डॉ. संघप्रिय राहुल का बड़ा बयान

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मोदी के रहते आरक्षण अटल है: भारतीय बौद्ध संघ प्रमुख डॉ. संघप्रिय राहुल का बड़ा बयान

सारांश

आरक्षण को लेकर देशभर में जारी बहस के बीच भारतीय बौद्ध संघ प्रमुख डॉ. संघप्रिय राहुल ने साफ कहा — पूना पैक्ट पर आधारित आरक्षण अटल है और मोदी सरकार में यह और मजबूत हुआ है। कांग्रेस, सपा व AAP पर भ्रम फैलाने का सीधा आरोप।

मुख्य बातें

भारतीय बौद्ध संघ प्रमुख डॉ.
संघप्रिय राहुल ने 30 अगस्त को कहा कि आरक्षण कभी समाप्त नहीं होगा।
अंबेडकर के पूना पैक्ट को आरक्षण की नींव बताते हुए कहा कि PM मोदी के कार्यकाल में यह और सुदृढ़ हुआ है।
कांग्रेस , समाजवादी पार्टी और AAP पर आरक्षण समाप्त होने का भ्रम फैलाने का आरोप लगाया।
धर्म परिवर्तन करने वाले दलितों का आरक्षण समाप्त करने के कानूनी प्रावधान को सकारात्मक कदम बताया।
कहा कि मूल आरक्षण तब तक नहीं हटना चाहिए जब तक समाज में वास्तविक समानता स्थापित न हो।

भारतीय बौद्ध संघ के प्रमुख डॉ. संघप्रिय राहुल ने 30 अगस्त को नई दिल्ली में स्पष्ट किया कि डॉ. भीमराव अंबेडकर के पूना पैक्ट पर आधारित आरक्षण व्यवस्था कभी समाप्त नहीं होगी, और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में यह और अधिक सुदृढ़ हुई है। उन्होंने कहा कि विपक्षी दलों द्वारा आरक्षण समाप्त होने की जो आशंका फैलाई जा रही है, वह पूरी तरह भ्रामक है।

मुख्य बयान: आरक्षण पर कोई खतरा नहीं

डॉ. संघप्रिय राहुल ने कहा, 'डॉ. भीमराव अंबेडकर ने जो पूना पैक्ट किया था, वो हमारा समझौता था — उसी आधार पर हमें आरक्षण मिला। जब से देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आए, यह और मजबूत हुआ है। आरक्षण कभी नहीं खत्म होगा।' उन्होंने यह भी कहा कि जब तक मोदी प्रधानमंत्री हैं, कोई भी आरक्षण को समाप्त नहीं कर सकता।

विपक्ष पर भ्रम फैलाने का आरोप

बौद्ध संघ प्रमुख ने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस), समाजवादी पार्टी (सपा) और आम आदमी पार्टी (AAP) पर सीधा आरोप लगाया कि ये दल जनमानस में यह भ्रम फैला रहे हैं कि आरक्षण खत्म हो जाएगा। उन्होंने कहा कि इस तरह की भ्रांतियों से लोगों को भड़काया जा रहा है, जो देश के हित में नहीं है।

आरक्षण सुधार पर संतुलित रुख

डॉ. राहुल ने आरक्षण में सुधार के सवाल पर कहा कि यह सरकार का विषय है, परंतु दलितों को मिला मूल आरक्षण किसी भी स्थिति में समाप्त नहीं होना चाहिए। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि ग्रामीण क्षेत्रों में अभी भी बड़ी संख्या में दलित आरक्षण के वास्तविक लाभ से वंचित हैं।

उन्होंने प्रधानमंत्री और मुख्य न्यायाधीश का आभार व्यक्त करते हुए उस कानूनी प्रावधान का उल्लेख किया जिसके तहत धर्म परिवर्तन करने वाले दलितों का आरक्षण समाप्त करने की व्यवस्था की गई है। उन्होंने इसे एक सकारात्मक कदम बताया।

अंबेडकर के विचारों का संदर्भ

डॉ. राहुल ने डॉ. अंबेडकर के उस विचार का भी उल्लेख किया जिसमें उन्होंने हर दस वर्ष बाद राजनीतिक आरक्षण की समीक्षा की बात कही थी। हालाँकि, बौद्ध संघ प्रमुख ने स्पष्ट किया कि शिक्षा और रोज़गार में दलितों को मिला मूल आरक्षण तब तक नहीं हटना चाहिए जब तक समाज में वास्तविक समानता स्थापित न हो जाए।

आगे की राह

यह बयान ऐसे समय में आया है जब जंतर-मंतर सहित देश के कई हिस्सों में आरक्षण के समर्थन और विरोध में प्रदर्शन हो रहे हैं। डॉ. राहुल ने कहा कि भारत के बुद्धिजीवी वर्ग और दलित समाज के साथ मिलकर जो भी निर्णय होगा, वह सहमति पर आधारित होगा। आरक्षण की बहस आने वाले दिनों में और तेज़ होने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

यह ध्यान देने योग्य है कि 'आरक्षण मजबूत हुआ' के दावे की कोई ठोस नीतिगत व्याख्या बयान में नहीं दी गई — यह एक राजनीतिक कथन अधिक है, तथ्यात्मक विश्लेषण कम। ग्रामीण दलितों तक आरक्षण का लाभ न पहुँचने की बात उन्होंने स्वयं स्वीकार की, जो नीतिगत विफलता की ओर इशारा करती है। असली सवाल यह है कि क्या मौजूदा आरक्षण ढाँचा ज़मीनी समानता सुनिश्चित कर रहा है — और इस पर कोई भी दल अब तक ठोस जवाब नहीं दे सका है।
RashtraPress
31 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारतीय बौद्ध संघ प्रमुख ने आरक्षण पर क्या कहा?
डॉ. संघप्रिय राहुल ने कहा कि डॉ. अंबेडकर के पूना पैक्ट पर आधारित आरक्षण कभी समाप्त नहीं होगा और PM मोदी के नेतृत्व में यह और मजबूत हुआ है। उन्होंने विपक्षी दलों पर भ्रम फैलाने का आरोप लगाया।
पूना पैक्ट और दलित आरक्षण का क्या संबंध है?
पूना पैक्ट 1932 में डॉ. भीमराव अंबेडकर और महात्मा गांधी के बीच हुआ एक ऐतिहासिक समझौता था, जिसके आधार पर दलितों को विधायिका में आरक्षित सीटें मिलीं। डॉ. संघप्रिय राहुल के अनुसार यही समझौता भारत में दलित आरक्षण की बुनियाद है।
कांग्रेस, सपा और AAP पर क्या आरोप लगाए गए?
बौद्ध संघ प्रमुख ने कहा कि ये तीनों दल यह भ्रम फैला रहे हैं कि मोदी सरकार आरक्षण समाप्त कर देगी, जबकि वास्तविकता इसके विपरीत है। उन्होंने इसे जनता को भड़काने की राजनीतिक कोशिश बताया।
धर्म परिवर्तन करने वाले दलितों के आरक्षण पर क्या रुख है?
डॉ. राहुल ने उस कानूनी प्रावधान का समर्थन किया जिसके तहत ईसाई या मुस्लिम धर्म अपनाने वाले दलितों का आरक्षण समाप्त किया जाए। उन्होंने इसे प्रधानमंत्री और मुख्य न्यायाधीश की सकारात्मक पहल बताया।
क्या आरक्षण में सुधार की बात भी कही गई?
हाँ, डॉ. राहुल ने कहा कि आरक्षण में सुधार का निर्णय सरकार को लेना है, लेकिन दलितों का मूल आरक्षण तब तक नहीं हटना चाहिए जब तक समाज में वास्तविक समानता न आ जाए। उन्होंने डॉ. अंबेडकर के राजनीतिक आरक्षण की समय-समय पर समीक्षा के विचार का भी उल्लेख किया।
राष्ट्र प्रेस
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