महिला आरक्षण लागू न होने पर पवन खेड़ा का केंद्र पर हमला — 'आधी आबादी को रोककर विकसित भारत नहीं बनेगा'
सारांश
मुख्य बातें
कांग्रेस सांसद पवन खेड़ा ने 22 अगस्त 2026 को पुणे में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में महिला सशक्तीकरण और महिला आरक्षण विधेयक के क्रियान्वयन को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। यह प्रेस कॉन्फ्रेंस लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के 'छात्रों की गूंज' कार्यक्रम से ठीक पहले आयोजित की गई। खेड़ा ने कहा कि देश की 50 प्रतिशत आबादी को विकास की यात्रा से बाहर रखकर विकसित भारत का सपना पूरा नहीं किया जा सकता।
पुणे की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और महिला शिक्षा
खेड़ा ने अपने संबोधन की शुरुआत पुणे के ऐतिहासिक महत्व से की। उन्होंने कहा कि यह वही भूमि है जहाँ सावित्रीबाई फुले ने महिला शिक्षा की नींव एक क्रांतिकारी कदम के ज़रिए रखी थी। उनके अनुसार, इसी पृष्ठभूमि में 'छात्रों की गूंज' कार्यक्रम में महिलाओं के मुद्दों को केंद्र में रखना अत्यंत प्रासंगिक है। गौरतलब है कि पुरुष और महिला साक्षरता के बीच अभी भी 16 प्रतिशत का अंतर बना हुआ है, जिसे खेड़ा ने एक सुनियोजित नीतिगत विफलता करार दिया।
महिला आरक्षण विधेयक पर केंद्र को घेरा
कांग्रेस के राज्यसभा सदस्य खेड़ा ने महिला आरक्षण विधेयक पारित होने के बावजूद उसे लागू न किए जाने पर केंद्र की आलोचना की। उनका कहना था, 'महिला आरक्षण बिल पास होने के बाद भी उसे लागू नहीं किया जा रहा है। बहाने बनाए जा रहे हैं — कभी परिसीमन की आड़ में, कभी जनगणना की आड़ में — ताकि नीतियाँ बनाने वाले कमरों में सिर्फ पुरुष ही रहें और महिलाओं को बाहर रखा जाए।' आलोचकों का कहना है कि विधेयक के क्रियान्वयन में देरी महिला राजनीतिक भागीदारी को कमज़ोर करती है।
पुणे में एबीवीपी की कथित कार्रवाई पर प्रतिक्रिया
खेड़ा ने सीओईपी कॉलेज में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) के सदस्यों द्वारा कथित तौर पर लड़कियों के हॉस्टल में घुसने की घटना का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इसे राष्ट्रीय छात्र संघ (एनएसयूआई) और एबीवीपी के बीच सामान्य झड़प कहना गलत है। उनके शब्दों में, 'अगर कोई गुंडा मेरे घर में घुसता है, तो मुझे उसे बाहर धकेलने का अधिकार है।' उन्होंने इस घटना को महिलाओं को डराने की कोशिश बताया।
कांग्रेस की महिला नेतृत्व परंपरा का संदर्भ
खेड़ा ने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस / INC) की महिला नेतृत्व परंपरा का हवाला देते हुए इंदिरा गांधी, सोनिया गांधी और प्रियंका गांधी के योगदान को रेखांकित किया। उन्होंने राहुल गांधी की तारीफ करते हुए कहा कि उन्होंने दिल्ली में उन युवा महिलाओं के साथ प्रेस वार्ता की जिन्होंने विभिन्न आंदोलनों में आवाज़ उठाई। खेड़ा ने यह भी कहा कि पुरुषों को महिलाओं से खतरा नहीं है, बल्कि खतरा उनके अहंकार को है — और उसी अहंकार ने महिलाओं को कॉलेजों, नौकरियों और राजनीति से दूर रखा है।
आगे की राह
खेड़ा ने स्पष्ट किया कि कार्यस्थल, शिक्षा और राजनीति में महिलाओं के सामने आने वाली चुनौतियों पर सक्रिय रूप से बात करना और उनसे जुड़ना ज़रूरी है। 'छात्रों की गूंज' कार्यक्रम इसी दिशा में एक कदम है। यह देखना अहम होगा कि विपक्ष का यह दबाव महिला आरक्षण विधेयक के क्रियान्वयन की समयसीमा पर कोई असर डालता है या नहीं।