22 अगस्त 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

महिला आरक्षण लागू न होने पर पवन खेड़ा का केंद्र पर हमला — 'आधी आबादी को रोककर विकसित भारत नहीं बनेगा'

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
महिला आरक्षण लागू न होने पर पवन खेड़ा का केंद्र पर हमला — 'आधी आबादी को रोककर विकसित भारत नहीं बनेगा'

सारांश

पुणे की उस भूमि पर जहाँ सावित्रीबाई फुले ने महिला शिक्षा की क्रांति शुरू की थी, कांग्रेस सांसद पवन खेड़ा ने केंद्र से सीधा सवाल पूछा — महिला आरक्षण विधेयक पास होने के बाद भी लागू क्यों नहीं? 50% आबादी को बाहर रखकर विकसित भारत का सपना खोखला है।

मुख्य बातें

कांग्रेस सांसद पवन खेड़ा ने 22 अगस्त 2026 को पुणे में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर महिला सशक्तीकरण पर केंद्र को घेरा।
खेड़ा ने कहा कि देश की 50 प्रतिशत आबादी को विकास से बाहर रखकर विकसित भारत का लक्ष्य हासिल नहीं किया जा सकता।
महिला आरक्षण विधेयक पारित होने के बावजूद परिसीमन और जनगणना के बहाने उसे लागू न करने पर सरकार की आलोचना की।
पुरुष-महिला साक्षरता में 16 प्रतिशत के अंतर को नीतिगत विफलता बताया।
सीओईपी कॉलेज में एबीवीपी द्वारा कथित तौर पर लड़कियों के हॉस्टल में घुसने की घटना को महिलाओं को डराने की कोशिश करार दिया।
यह प्रेस कॉन्फ्रेंस राहुल गांधी के 'छात्रों की गूंज' कार्यक्रम से ठीक पहले आयोजित हुई।

कांग्रेस सांसद पवन खेड़ा ने 22 अगस्त 2026 को पुणे में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में महिला सशक्तीकरण और महिला आरक्षण विधेयक के क्रियान्वयन को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। यह प्रेस कॉन्फ्रेंस लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के 'छात्रों की गूंज' कार्यक्रम से ठीक पहले आयोजित की गई। खेड़ा ने कहा कि देश की 50 प्रतिशत आबादी को विकास की यात्रा से बाहर रखकर विकसित भारत का सपना पूरा नहीं किया जा सकता।

पुणे की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और महिला शिक्षा

खेड़ा ने अपने संबोधन की शुरुआत पुणे के ऐतिहासिक महत्व से की। उन्होंने कहा कि यह वही भूमि है जहाँ सावित्रीबाई फुले ने महिला शिक्षा की नींव एक क्रांतिकारी कदम के ज़रिए रखी थी। उनके अनुसार, इसी पृष्ठभूमि में 'छात्रों की गूंज' कार्यक्रम में महिलाओं के मुद्दों को केंद्र में रखना अत्यंत प्रासंगिक है। गौरतलब है कि पुरुष और महिला साक्षरता के बीच अभी भी 16 प्रतिशत का अंतर बना हुआ है, जिसे खेड़ा ने एक सुनियोजित नीतिगत विफलता करार दिया।

महिला आरक्षण विधेयक पर केंद्र को घेरा

कांग्रेस के राज्यसभा सदस्य खेड़ा ने महिला आरक्षण विधेयक पारित होने के बावजूद उसे लागू न किए जाने पर केंद्र की आलोचना की। उनका कहना था, 'महिला आरक्षण बिल पास होने के बाद भी उसे लागू नहीं किया जा रहा है। बहाने बनाए जा रहे हैं — कभी परिसीमन की आड़ में, कभी जनगणना की आड़ में — ताकि नीतियाँ बनाने वाले कमरों में सिर्फ पुरुष ही रहें और महिलाओं को बाहर रखा जाए।' आलोचकों का कहना है कि विधेयक के क्रियान्वयन में देरी महिला राजनीतिक भागीदारी को कमज़ोर करती है।

पुणे में एबीवीपी की कथित कार्रवाई पर प्रतिक्रिया

खेड़ा ने सीओईपी कॉलेज में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) के सदस्यों द्वारा कथित तौर पर लड़कियों के हॉस्टल में घुसने की घटना का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इसे राष्ट्रीय छात्र संघ (एनएसयूआई) और एबीवीपी के बीच सामान्य झड़प कहना गलत है। उनके शब्दों में, 'अगर कोई गुंडा मेरे घर में घुसता है, तो मुझे उसे बाहर धकेलने का अधिकार है।' उन्होंने इस घटना को महिलाओं को डराने की कोशिश बताया।

कांग्रेस की महिला नेतृत्व परंपरा का संदर्भ

खेड़ा ने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस / INC) की महिला नेतृत्व परंपरा का हवाला देते हुए इंदिरा गांधी, सोनिया गांधी और प्रियंका गांधी के योगदान को रेखांकित किया। उन्होंने राहुल गांधी की तारीफ करते हुए कहा कि उन्होंने दिल्ली में उन युवा महिलाओं के साथ प्रेस वार्ता की जिन्होंने विभिन्न आंदोलनों में आवाज़ उठाई। खेड़ा ने यह भी कहा कि पुरुषों को महिलाओं से खतरा नहीं है, बल्कि खतरा उनके अहंकार को है — और उसी अहंकार ने महिलाओं को कॉलेजों, नौकरियों और राजनीति से दूर रखा है।

आगे की राह

खेड़ा ने स्पष्ट किया कि कार्यस्थल, शिक्षा और राजनीति में महिलाओं के सामने आने वाली चुनौतियों पर सक्रिय रूप से बात करना और उनसे जुड़ना ज़रूरी है। 'छात्रों की गूंज' कार्यक्रम इसी दिशा में एक कदम है। यह देखना अहम होगा कि विपक्ष का यह दबाव महिला आरक्षण विधेयक के क्रियान्वयन की समयसीमा पर कोई असर डालता है या नहीं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन परिसीमन और जनगणना की अनिश्चितता के चलते उसका क्रियान्वयन अनिश्चितकाल के लिए टल गया है। विपक्ष इस देरी को जानबूझकर की गई राजनीतिक चाल बता रहा है, जबकि सरकार तकनीकी अनिवार्यताओं का हवाला देती है। असली सवाल यह है कि साक्षरता में 16 प्रतिशत के अंतर और नीति-निर्माण में महिलाओं की सीमित भागीदारी के बावजूद, क्या 'छात्रों की गूंज' जैसे कार्यक्रम संरचनात्मक बदलाव ला सकते हैं या ये केवल चुनावी संदेश हैं — यह जाँचना ज़रूरी है।
RashtraPress
22 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पवन खेड़ा ने पुणे में महिला सशक्तीकरण पर क्या कहा?
कांग्रेस सांसद पवन खेड़ा ने 22 अगस्त 2026 को पुणे में कहा कि देश की 50 प्रतिशत आबादी को विकास की यात्रा से बाहर रखकर विकसित भारत का लक्ष्य हासिल नहीं किया जा सकता। उन्होंने महिला आरक्षण विधेयक लागू न होने और पुरुष-महिला साक्षरता के 16 प्रतिशत अंतर पर भी सवाल उठाए।
महिला आरक्षण विधेयक अभी तक लागू क्यों नहीं हुआ?
महिला आरक्षण विधेयक संसद में पारित हो चुका है, लेकिन इसका क्रियान्वयन परिसीमन और जनगणना प्रक्रिया पूरी होने से जोड़ा गया है। खेड़ा के अनुसार, ये बहाने हैं जो महिलाओं को नीति-निर्माण से दूर रखने के लिए इस्तेमाल किए जा रहे हैं।
पुणे के सीओईपी कॉलेज में क्या हुआ?
कथित तौर पर एबीवीपी के सदस्य सीओईपी कॉलेज में लड़कियों के हॉस्टल में घुस गए, जिसके बाद एबीवीपी और एनएसयूआई के बीच झड़प हुई। खेड़ा ने इसे महिला छात्राओं को डराने की कोशिश बताया और कहा कि इसे सामान्य छात्र संघर्ष कहना गलत है।
'छात्रों की गूंज' कार्यक्रम क्या है?
यह राहुल गांधी द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम है जिसमें छात्रों और युवाओं से सीधे संवाद किया जाता है। 22 अगस्त 2026 को पुणे में इस कार्यक्रम का विशेष फोकस महिला छात्राओं और उनके मुद्दों पर था।
कांग्रेस महिला नेतृत्व के मामले में क्या दावा करती है?
खेड़ा ने कहा कि कांग्रेस ने इंदिरा गांधी, सोनिया गांधी और प्रियंका गांधी जैसी नेताओं को आगे बढ़ाया है और पार्टी में सैकड़ों महिलाएं सक्रिय रूप से राजनीति में भाग ले रही हैं। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 1 सप्ताह पहले
  2. 2 सप्ताह पहले
  3. 4 महीने पहले
  4. 4 महीने पहले
  5. 4 महीने पहले
  6. 4 महीने पहले
  7. 4 महीने पहले
  8. 4 महीने पहले