23 अगस्त 2026
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राहुल गांधी का पुणे में 'मनुस्मृति मानसिकता' पर हमला: '70 करोड़ महिलाएं देश की असली ताकत'

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राहुल गांधी का पुणे में 'मनुस्मृति मानसिकता' पर हमला: '70 करोड़ महिलाएं देश की असली ताकत'

सारांश

पुणे में 'छात्रों की गूंज' में राहुल गांधी ने 'मनुस्मृति की मानसिकता' को महिलाओं की परतंत्रता की जड़ बताया। उन्होंने कहा — 70 करोड़ महिलाएं देश की सबसे बड़ी ताकत हैं, न अर्थव्यवस्था, न सेना। यह संवाद राजनीतिक मंच नहीं था, बल्कि जेन-ज़ी पीढ़ी से सीधा संवाद था।

मुख्य बातें

राहुल गांधी ने 22 अगस्त 2026 को पुणे में 'छात्रों की गूंज' कार्यक्रम में महिलाओं को देश की सबसे बड़ी शक्ति बताया।
उन्होंने कहा कि 'मनुस्मृति की मानसिकता' महिलाओं को केवल बेटी, पत्नी या माँ की सीमित पहचान में बाँधती है।
उनके दावे के अनुसार, देश में हर साल 4.5 लाख लड़कियाँ भ्रूण हत्या की शिकार होती हैं और 80% महिलाएं किसी न किसी उत्पीड़न का सामना करती हैं।
60% युवा महिलाएं अकेले सुरक्षित रूप से घर से बाहर नहीं निकल पातीं; केवल 8% महिलाओं के पास स्वतंत्र संपत्ति स्वामित्व है।
कार्यक्रम में जेन-ज़ी छात्राओं ने मंच पर आकर अपनी व्यक्तिगत चुनौतियाँ साझा कीं।

लोकसभा में विपक्ष के नेता और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने 22 अगस्त 2026 को पुणे के श्री शिवाजी प्रिपरेटरी मिलिट्री स्कूल कॉलेज ग्राउंड में आयोजित 'छात्रों की गूंज' कार्यक्रम में पितृसत्तात्मक व्यवस्था पर कड़ा प्रहार करते हुए कहा कि महिलाएं किसी की संपत्ति नहीं हैं — वे केवल खुद की हैं। उन्होंने 70 करोड़ महिलाओं के सपनों और क्षमता को भारत की सबसे बड़ी शक्ति बताया और 'मनुस्मृति की मानसिकता' को महिलाओं की परतंत्रता की जड़ करार दिया।

कार्यक्रम का स्वरूप और संदर्भ

राहुल गांधी ने स्पष्ट किया कि 'छात्रों की गूंज' कोई राजनीतिक मंच नहीं, बल्कि युवाओं के विचारों, शिक्षा में भेदभाव और सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर संवाद का अवसर है। कार्यक्रम में जेन-ज़ी पीढ़ी की बड़ी संख्या में छात्राएं उपस्थित रहीं और कई ने मंच पर आकर अपनी व्यक्तिगत चुनौतियाँ साझा कीं। शिक्षा, सामाजिक बदलाव, महिलाओं की भूमिका और युवाओं के भविष्य जैसे विषयों पर विस्तृत चर्चा हुई।

महिलाओं पर आँकड़े और मनुस्मृति पर हमला

राहुल गांधी ने कहा कि मनुस्मृति जैसी व्यवस्थाएं महिलाओं को केवल बेटी, पत्नी या माँ की सीमित पहचान में बाँधती हैं। उन्होंने दावा किया कि देश में हर साल लगभग 4.5 लाख लड़कियाँ भ्रूण हत्या की शिकार होती हैं। उनके अनुसार, 80 प्रतिशत महिलाएं किसी न किसी रूप में उत्पीड़न का सामना करती हैं और 30 प्रतिशत महिलाओं को शारीरिक हिंसा झेलनी पड़ती है। उन्होंने यह भी कहा कि 100 में से लगभग 6 महिलाएं प्रत्यक्ष शारीरिक हमले या दुष्कर्म जैसी घटनाओं का सामना करती हैं।

आर्थिक असमानता और शिक्षा में भेदभाव

राहुल गांधी ने आर्थिक असमानता का मुद्दा उठाते हुए कहा कि भारत में केवल 8 प्रतिशत महिलाओं के पास स्वतंत्र रूप से संपत्ति का स्वामित्व है। उन्होंने कहा कि हिंसा के डर से लगभग 50 प्रतिशत महिलाएं नौकरी या उच्च शिक्षा के अवसर छोड़ देती हैं, जबकि 45 प्रतिशत विवाह या घरेलू जिम्मेदारियों के कारण पढ़ाई या रोजगार से दूर हो जाती हैं। उनके अनुसार, 60 प्रतिशत युवा महिलाएं अकेले सुरक्षित रूप से घर से बाहर नहीं निकल पातीं।

युवाओं से आह्वान

राहुल गांधी ने युवतियों से सामाजिक बंधनों को तोड़कर हर क्षेत्र में स्वतंत्र पहचान बनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि महिलाओं में स्वाभाविक रूप से संवेदनशीलता, सहानुभूति और करुणा अधिक होती है — और यही गुण उन्हें देश के नेतृत्व के लिए सशक्त बनाते हैं। उन्होंने जोर दिया कि भारत की युवा आबादी देश की सबसे बड़ी ताकत है और युवाओं को अपनी क्षमता पहचानकर राष्ट्र के विकास में योगदान देना चाहिए।

आगे का संदर्भ

यह कार्यक्रम ऐसे समय में आया है जब महिला सुरक्षा और लैंगिक समानता के मुद्दे राष्ट्रीय विमर्श के केंद्र में हैं। गौरतलब है कि राहुल गांधी की 'छात्रों की गूंज' श्रृंखला देश के विभिन्न शहरों में युवाओं से सीधे संवाद का प्रयास है, जिसमें वे राजनीतिक बहस से अलग सामाजिक मुद्दों पर ध्यान केंद्रित करते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो आँकड़े उन्होंने प्रस्तुत किए — जैसे 4.5 लाख भ्रूण हत्याएं, 80% उत्पीड़न — उनके स्रोत कार्यक्रम में स्पष्ट नहीं किए गए, जो इन दावों की सत्यापनीयता पर सवाल उठाता है। 'छात्रों की गूंज' श्रृंखला की असली ताकत यह है कि यह कांग्रेस को युवा मतदाताओं, विशेषकर महिलाओं, से सीधे जोड़ने का प्रयास है — लेकिन इस संवाद को नीतिगत प्रतिबद्धताओं में बदलने की चुनौती अभी बाकी है।
RashtraPress
23 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

राहुल गांधी ने 'छात्रों की गूंज' में क्या कहा?
राहुल गांधी ने पुणे में 22 अगस्त 2026 को आयोजित 'छात्रों की गूंज' कार्यक्रम में कहा कि महिलाएं किसी की संपत्ति नहीं हैं और 'मनुस्मृति की मानसिकता' महिलाओं को सीमित भूमिकाओं में बाँधती है। उन्होंने 70 करोड़ महिलाओं को देश की सबसे बड़ी शक्ति बताया।
राहुल गांधी ने मनुस्मृति पर क्यों हमला किया?
राहुल गांधी ने मनुस्मृति को पितृसत्तात्मक सोच का प्रतीक बताते हुए कहा कि यह महिलाओं को दूसरों पर निर्भर रखने की मानसिकता को बढ़ावा देती है। उनके अनुसार, महिलाओं की स्वतंत्र पहचान और अधिकार इस सोच से सबसे बड़ा खतरा है।
राहुल गांधी ने महिलाओं से जुड़े कौन-से आँकड़े पेश किए?
उन्होंने दावा किया कि हर साल 4.5 लाख लड़कियाँ भ्रूण हत्या की शिकार होती हैं, 80% महिलाएं उत्पीड़न झेलती हैं, 60% युवा महिलाएं अकेले बाहर नहीं निकल पातीं और केवल 8% महिलाओं के पास स्वतंत्र संपत्ति स्वामित्व है। ये आँकड़े उन्होंने कार्यक्रम में प्रस्तुत किए, हालाँकि उनके स्रोत का उल्लेख नहीं किया गया।
'छात्रों की गूंज' कार्यक्रम क्या है?
'छात्रों की गूंज' राहुल गांधी की एक संवाद श्रृंखला है जिसमें वे देश के विभिन्न शहरों में युवाओं से सीधे बात करते हैं। यह राजनीतिक रैली नहीं, बल्कि शिक्षा, सामाजिक बदलाव और युवाओं की चुनौतियों पर केंद्रित संवाद मंच है।
राहुल गांधी ने युवा महिलाओं से क्या आह्वान किया?
राहुल गांधी ने युवतियों से सामाजिक बंधनों को तोड़कर हर क्षेत्र में स्वतंत्र पहचान बनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि महिलाओं की संवेदनशीलता और करुणा उन्हें देश के नेतृत्व के लिए सशक्त बनाती है।
राष्ट्र प्रेस
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